नये भारत, नये दर्शन और नई बीजेपी को प्रदर्शित करता कैबिनेट पुनर्गठन

file photo

मेरे लिये कुछ विषय ऐसे होते है जिन पर न मैं कोई कयास लगाता हूँ और न ही उस पर अपनी समझ को बर्बाद करता हूँ. इन विषयों में मन्त्रिमण्डल का गठन और पुनर्गठन दोनों ही शामिल है. मेरे लिये अपने आप को रोक पाना बड़ा मुश्किल होता है जब मीडिया एक हफ्ते से लोगों को मंत्री बनवा या निकलवा रहा हो और सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर लिखने वाले ज्ञानियों की कमी नहीं हो! खैर अब तो मोदी सरकार के नए नाम के साथ, नये पुराने मंत्रियों के विभाग सामने आ गये है इसलिये मेरा इस पर अब कुछ कहना बनता है.

पहली बात यह है कि मीडिया के साथ सोशल मीडिया पर लोगों को यह अब समझ लेना चाहिये कि उनकी बौद्धिक क्षमता इतनी नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिये जाने वाले निर्णयों को वह भांप पाएं. इसलिए उन्हें अपनी बौद्धिक क्षमताओं का किसी अन्य सार्थक कार्यो में उपयोग में लेना चाहिये और पलँग तोड़ राजनीतिक विश्लेषण करने में अपनी बौद्धिक ऊर्जा का ह्रास नहीं करना चाहिये.

दूसरी बात मुझे यह लगती है कि आज के बाद, भविष्य में भी, मोदी जी के प्रधानमंत्रित्व काल में होने वाले मन्त्रिमण्डल के मापदंड तय हो गये है. मंत्रियों के चयन व उनको दिये गये दायित्वों को देखते हुये यह विश्वास से कहा जा सकता है कि उनके द्वारा लिया गया यह साहसिक निर्णय, 2019 के बाद के नये भारत, नये दर्शन और नई बीजेपी के दृष्टिगत लिया गया है.

आज के मन्त्रिमण्डल का पुनर्गठन एक मामले में बिल्कुल अलग है क्योंकि भारत की राजनीति में पिछले 7 दशकों से केंद्रीय मन्त्रिमण्डल में जगह और महत्वपूर्ण विभागों पर नियुक्ति में क्षेत्रीयता और जातिगत सामंजस्य की जो परंपरा रही है, उससे मोदी जी ने किनारा कर लिया है. उनके मापदण्ड के हिसाब से जो भी खरा उतरा है उसको उन्होंने और महत्वपूर्ण विभाग दिये हैं और जहां उनको कमजोर कड़ी नजर आयी है, वहां तेज़ राज्यमंत्रियों को उनके साथ लगा दिया है.

मुझे जो कहना था वह तो मैंने कह दिया लेकिन उसी के साथ इस मन्त्रिमण्डल के द्वारा मोदी जी के जिन तीन निर्णयों ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया है उसका उल्लेख करना भी मैं जरूरी समझता हूं, जिसमे दो निर्णय 2019 के बाद की भारत की कहानी बदल देंगे.

पहला यह कि मीडिया, विपक्ष और तमाम बीजेपी समर्थको की इच्छा के विरुद्ध मोदी जी ने सुरेश प्रभु को मन्त्रिमण्डल से बाहर नहीं किया है. उन्हें रेल मंत्रालय की जगह, कम वैभव वाला लेकिन भारत की आर्थिक विकास के दृष्टि से महत्वपूर्ण ‘कॉमर्स’ का मंत्रालय दिया है. मेरे अपने आंकलन में सुरेश प्रभु श्रेष्ठ मंत्रियों में रहे है और वह निश्चित रूप से प्रधानमंत्री के विश्वासपात्रों में से हैं.

उनका दूसरा निर्णय, जहां 4 प्रशासनिक अधिकारियों को मन्त्रिमण्डल में लिया गया है वह एक ऐसा निर्णय है जिस पर मुझे बीजेपी समर्थक सबसे ज्यादा मायूस लग रहे है, वह एक ऐसा निर्णय है जो बड़ा बोल्ड निर्णय है. मुझे लगता है यह भारत की ‘वेस्ट मिनिस्टर’ शासकीय व्यवस्था में अमेरिकी ‘प्रेसिडेंशियल फॉर्म’ की व्यवस्था का आगाज़ है.

आज यह जो सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस, विदेश सेवा के लोग मन्त्रिमण्डल में जगह बनाए दिख रहे हैं, यदि मोदी जी का यह प्रयोग सफल हो गया तो 2019 के मन्त्रिमण्डल में विशेषज्ञ महत्वपूर्ण मंत्रालयों का काम देखते हुये दिखेंगे. मोदी जी ने जिन चार लोगों को लिया है उन सभी के बारे में मैं पहले से ही जानता हूँ इसलिये मेरे लिये इन सभी का स्वागत है.

हां यह ज़रूर है कि राष्ट्रवादियों का एक वर्ग आरके सिंह के चुनाव पर आहत दिख रहा है, जिसका कोई मतलब नहीं है क्योंकि उनको यही नहीं पता है कि आरके सिंह की मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने से पहले ही उनके साथ क्या भूमिका थी. मैं इस विषय पर कुछ और नहीं लिखूंगा, जो 2014 से पहले के घटनाक्रमों को पढ़ रहे है और अंदर की दखल रखते है, उन्हें अंदाज़ होगा कि वह क्यों मन्त्रिमण्डल में लिये गये हैं.

अब तीसरा निर्णय जो मेरे लिये सबसे महत्वपूर्ण और सारगर्भित है, वह है निर्मला सीतारमण का भारत का रक्षा मंत्री बनाना है. यह एक ऐसा निर्णय है जिसको लेकर समर्थकों से लेकर खुद बीजेपी के लोग आश्चर्यचकित है. यहां मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि मुझे आश्चर्य बिल्कुल भी नहीं हुआ है.

हां, यह ज़रूर है कि मैं उन्हें ‘कोर ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स’ में पहुंचता हुआ देख रहा था लेकिन मेरा आंकलन यह 2019 के बाद होने का था. मैं निर्मला जी के रक्षामंत्री बनाए जाने पर टीवी पर विभिन्न लोगो को सुन रहा हूँ लेकिन एक भी यह नहीं बता पा रहा है कि निर्मला जी यहां क्यों हैं?

मैं बताता हूँ निर्मला सीतारमण क्यों महत्वपूर्ण हैं और मोदी जी के भारत के भविष्य की परियोजना में उनकी क्या हैसियत है. 2009, जब से मोदी जी ने भारत के प्रधानमंत्री के पद पर पहुंच कर भारत के परिदृश्य को बदलने की यात्रा की शुरूआत की थी तब से 2014 तक दो प्रबुद्ध मंडल (Think Tank) उनकी तैयारी कर रहे थे और उनका मार्गदर्शन कर रहे थे.

इनमें पहला नाम अजित डोभाल का ‘विवेकानंद फाउंडेशन’ था. उससे जुड़े लोगों ने भारत की संप्रभुता और विकास के लिए भविष्य की चुनौतियों और उनको पाने के लिये, मोदी जी के लिये ब्लूप्रिंट तैयार किया था. इसमें सभी अति अनुभवी व वरिष्ठ लोग थे.

इसी के साथ 2011 में एक नया प्रबुद्ध मंडल उदित हुआ जिससे जुड़े लोग युवा थे, जो मोदी जी की सामरिक व आर्थिक सोच को वैश्विक परिदृश्य में व्यवहारिक मूर्त रूप देने का काम कर रहे थे. यह Think Tank था ‘इंडियन फाउंडेशन’ जिसे, विदेश छोड़ भारत वापस आये, अजित डोभाल के सुपुत्र श्रेय डोभाल ने कुछ लोगों के साथ स्थापित किया था.

जिन लोगों ने श्रेय डोभाल के साथ इस इंडियन फाउंडेशन को गठित किया था और काम कर रहे थे, उसमें आरएसएस के राम माधव, एमजे अकबर और निर्मला सीतारमण थे. जब 2014 में निर्मला जी मंत्री बन गयी थी तब इंडियन फाउंडेशन, ने अपना कार्यालय, निर्मला जी के पूर्व आफिस को ही बना लिया था.

मैंने इतना सब कुछ इस लिये निर्मला सीतारमण जी के लिये लिखा है क्योंकि रिपब्लिक टीवी पर कोई मूर्ख, एक महिला को रक्षामंत्री बनाए जाने पर आलोचना कर रहा था. निर्मला जी को महिला समझ कम आंकना सबके लिये भारी पड़ेगा क्योंकि विचारधारा और कर्म, दोनों से ही वह कठोर व दृढ़ निश्चयी हैं.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY