गीताप्रेस गोरखपुर : केवल सांप्रदायिकता फैलाने के उद्देश्य से नहीं बना प्रत्येक हिन्दू विचार या संस्थान

65 करोड़ से अधिक पुस्तकें छापनेवाली गीता प्रेस संसार के सबसे बड़े प्रकाशन संस्थानों में से एक है. विगत कुछ काल से यह संस्थान छद्म वामपंथियों के आक्रमणों का केंद्र रहा है. भारत का संविधान सभी धर्मों को अपने प्रचार की पूर्ण स्वाधीनता देता है.

यह सुखद आश्चर्य का विषय है कि भारतीय संस्कृति की सुदीर्घ परम्परा के कारण अन्यान्य ग्रंथों और भारतीयों के पुस्तकप्रेम के कारण 65 करोड़ से अधिक पुस्तकें गीता प्रेस बेच चुकी है. यह संख्या 65 करोड़ केवल पिछले कुछ वर्षों का आँकड़ा है, जिसके खाते गीता प्रेस के पास उपलब्ध है.

प्रत्येक हिन्दू विचार या संस्थान सांप्रदायिकता फैलाने के उद्देश्य से नहीं बना है. हिंदुओं में दर्शन की महान परम्परा है किंतु देखा जा रहा है कि छद्म वामपंथियों द्वारा जो भी हिन्दू है वह बुरा है, ऐसा प्रचुर प्रचार किया जा रहा है, जो एकांगी और भ्रामक है.

बंधुओं, गीताप्रेस की किताबें अद्भुत और सरस शैली में लिखी, दाम में सस्ती, मज़बूत जिल्दवाली और सुरचिपूर्ण रूप से प्रकाशित है. 29 जुलाई 2017 को 11 करोड़ की जर्मन प्रिंटिंग मशीन गीता प्रेस में आई है; यह उनकी जानकारी के लिए जो इसके बंद होने की अफ़वाह से वशीभूत है.

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