दिल्ली : ग़ाज़ीपुर डंपिंग ग्राउंड से ढहा कचरे का पहाड़, 3 की मौत

नई दिल्ली. पूर्वी दिल्ली के ग़ाज़ीपुर डंपिंग यार्ड का एक हिस्सा कोंडली नहर में जा गिरा. जिसके चलते कई बाइक और स्कूटी सवार महिला नहर में डूब गए. कूड़े के इस पहाड़ का एक हिस्सा गिर जाने से कम से कम 3 लोगों की मौत की खबर है. यह इलाका दिल्ली और गाजियाबाद का बॉर्डर है और सुबह-शाम भारी संख्या में लोग इस कूड़े के पहाड़ के किनारे से निकलते थे.

दमकल की 6 गाड़ियां मौके पर मौजूद हैं और लोगों को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन चलाया जा रहा है. हादसे में तीन लोगों के मौत की खबर है. जबकि 4 लोगों को अब तक मलबे से बाहर निकाला जा चुका है.

कूड़े के इस पहाड़ के ढह कर रोड पर आ गिरा, जिससे वहां से गुजर रही गाड़ियों के भी धंसने की खबर है. कचरे के इस हिस्से के धसकने से यहां से गुजर रही एक स्विफ्ट कार और एक स्कूटी पास के कोंडली नाले में गिर गई. एमसीडी की टीम बचाव कार्य के लिए घटनास्थल पर पहुंच गई है.

पुलिस ने एक लड़की की मौत की पुष्टि कर दी है. लड़की का नाम राजकुमारी है, जो स्कूटी पर सवार थी और घटना के वक्त यहां से गुजर रही थी. यहां से गुजरते हुए अचानक कूड़े के पहाड़ का एक हिस्सा गिर गया, जिसके चलते उसकी मौत हो गई.

गोताखोरों की मदद से रेस्क्यू टीम बचाव कार्य में जुटी हुई है. पुलिस ने बताया कि उसे 6 लोगों के गिरने की जानकारी मिली थी, जिसमें से 4 को सुरक्षित निकाल लिया है, जबकि 1 लड़की समेत दो लोगों के शव बरामद हुए हैं.

ग़ाज़ीपुर की यह जमीन कभी आसपास की जमीन की ही तरह समतल थी. लेकिन सालों से यहां लाया जा रहा दिल्ली का कूड़ा डंप होने से यह एक पहाड़ की तरह ऊंचा होती चली गई. दिल्ली और आसपास लोगों में यह जगह कूड़े के पहाड़ के रूप में ही चर्चित है.

ग़ाज़ीपुर में यह कूड़े का डंपिंग ग्राउंड है, जहां से पूर्वी दिल्ली का सारा कूड़ा लाकर डंप किया जाता है. कई बार प्रशासन को यह जानकारी दी गई थी कि इस डंपिंग ग्राउंड की क्षमता पूरी हो चुकी है और दिल्ली के कूड़े को डंप करने के लिए किसी नई डंपिंग फील्ड की जरूरत है. लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया और लगातार कूड़े की डंपिंग यहीं की जाती रही.

इस लैंडफिल पर सालों से दिल्ली का कूड़ा डंप किया जा रहा है. इसकी क्षमता कई साल पहले ही पूरी हो चुकी है. एमसीडी का कहना है कि वह कई बार सरकार से कूड़े के निपटारे के लिए नई जमीन की मांग कर चुका है, लेकिन उसे कूड़े के निपटारे के लिए अभी तक नई जमीन नहीं दी गई. ऐसे में वह (एमसीडी) इस जमीन पर ही कूड़े की डंपिंग का काम कर रही थी.

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