भारत दर्शन – भाग 1

पूरे चौदह दिनों तक भारत भूमि के दर्शन का सौभाग्य मिला. छतीसगढ़, झारखण्ड, उड़ीसा, बंगाल, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु कर्नाटक और महाराष्ट्र में समय बिताने का मौका मिला. जिसमें से अधिकांश समय आंध्र और उड़ीसा में बिता. हर जगह का अनुभव अलग अलग रहा. जिसके कुछ अंश आपके साथ साझा कर रहा हूँ.

उड़ीसा की बात करे तो उड़ीसा में काफी अच्छी हिंदी बोली जाती है. ग्रामीण हो या शहरी सभी स्कूलों में फुटबॉल मैदान मिलेंगे. एक ओर पश्चिमी उड़ीसा बहुत ही अभाव में जंगलों में निवास करता है तो वहीं समुद्री किनारा बड़ा ही सम्पन्न और शैक्षणिक गतिविधियों में अव्वल दिखता है.

यहाँ शाल का विशाल वन क्षेत्र है इस शाल वृक्ष को यहाँ साल महाराज भी कहते हैं. यहाँ बहुत तेज गर्मी है जिसके कारण यहाँ के लोग साँवले ही दिखेंगे. सड़क की स्थिति ग्रामीण क्षेत्रो में अति दयनीय है. यहाँ के रहवासी बड़े ही दुबले पतले ओर कमजोर दिखाई देते हैं पशुधन में यहाँ की छोटी छोटी बकरियों को देख आप आश्चर्य में पड़ जायेंगे.

यहाँ के लोगो मे मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के लिए काफी आदर भाव है. यहाँ मंदिरों में काफी अच्छी व्यवस्था है यहाँ पर बाबा रामदेव जी का भी मंदिर है. जगन्नाथ पुरी, सूर्यमन्दिर और समुद्री तट उड़ीसा का गौरव है. यहां की मंदिर निर्माण शैली विश्वभर में प्रसिद्ध है. उड़ीसा के लोगों का मेहमानों के प्रति काफी अच्छा आदर भाव है. घनघोर जंगल हो या दुकानदार यहाँ किसी भी प्रकार की लूट नहीं होती है. यहाँ हिन्दू धर्म प्रबल और मजबूत और मानवता जिंदा है. धन्य है उड़ीसा और उड़ीसा के लोग.

आंध्रप्रदेश की बात करे तो यह बड़ा ही धनी प्रदेश है. यहाँ के लोग स्वर्ण को बहुत पसंद करते हैं. यहाँ हिंदी को कम ही जानते हैं. यहां भूख और गरीबी कम ही दिखती है. यहाँ इस समय सीताफल बड़ी मात्रा में पक कर तैयार हो चुके हैं. यहाँ हर गांव में वीर हनुमान की बड़ी बड़ी मूर्तियाँ दिखेगी. यहाँ गणेश उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है. विशाल पंडाल और विशाल मूर्तियां लगाना मानो इनका शौक बन गया है.

जितना यहाँ हिन्दू धर्म प्रबल दिखता है उतना ही कमजोर भी है यहाँ जितनी हनुमान की मूर्तियां दिखेगी उतने बड़े बड़े चर्च ओर गिरजाघर भी दिखेगे. जहाँ हिन्दू अपना धर्म परिवर्तन कर औरों के परिवर्तन में लगा है. यहां के मंदिरों की व्यवस्था लाजवाब है तिरुपति बालाजी हो या मल्लिकार्जुन सभी जगह समुचित व्यवस्था मन मोह लेती है. मंदिर में लगा एक पोस्टर यह ध्यान आकर्षित करवाता है कि इस प्रदेश में धर्मान्तरण कितनी बड़ी समस्या है. यहाँ दुबले पतले लोग कम ही दिखते हैं सभी हष्ट पुष्ट नजर आते हैं. यहाँ के केले ओर फलों का साइज बड़ा छोटा है वहीं तेज गर्मी बेहाल करती है.

बात करे बंगाल की तो यहाँ ट्रैफिक व्यवस्था के अलावा कुछ भी अच्छा नहीं है. बंगाल के लोग भी हिंदी अच्छे से बोल लेते हैं समझ लेते हैं. यहां कलकत्ता की स्थिति बहुत ही खराब है. लगता है स्वच्छ भारत अभियान ने यहाँ दस्तक ही नहीं दी.

बंगाल में माँ कालिका को बहुत अधिक पूजा जाता है यहाँ अभी से ही नवरात्रि के लिए बड़े बड़े पंडाल बनने शुरु हो गए हैं. बंगाल में गंगासागर हिन्दुओं का सबसे बड़ा तीर्थ है जहाँ लाखों लोग पहुँचेते हैं पर वहाँ की व्यवस्था काफी चिंताजनक है. वहाँ हर कोई अपनी मर्जी का मालिक है. साफ सफाई का बहुत ही अभाव लगता है.

यहाँ पहुंचने वालों के लिए सरकार की तरफ से कोई भी अच्छा प्रयास किया नही दिखता. गंगासागर में मंदिर से अधिक यहाँ मछली मारने वाले को सरकार प्रोत्साहित करती हैं. तीनों प्रदेश की एक समानता है कि तीनों में धान की खेती मुख्य रूप से की जाती है. गेंहू सोयाबीन इधर नहीं बोते, पानी पताशे और दही बड़े वाले आपका रास्ते रास्ते इंतजार करते मिलेंगे.

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