रविश कुमार के नाम खुला ख़त

सेवा में,

प्रिय रविश कुमार जी, एनडीटीवी वाले!

महोदय, आज आपने लिखा कि नोटबंदी विफल हुई, 14 लाख 44 हज़ार करोड़ करेंसी में से 16 हज़ार करोड़ ही नहीं आएँ। 8 हज़ार करोड़ नए नोट छापने में लगे। नोटबंदी का कोई फ़ायदा नहीं हुआ, सबको लम्बी लम्बी क़तारों में लगवाने से देश का घाटा हुआ, आदि आदि!

रविश बाबू! मुझे नहीं पता कि आप किसके लिए काम करते हैं,मुझे नहीं पता कि नोटबंदी के बहुआयामी लाभ आपको क्यों नहीं दिख रहे हैं,फिर भी आपके एवं आपके प्रसंशकों के लिए, जो आपको बड़ा भारी पत्रकार मानते हैं, उनके लिए निम्न तथ्य प्रस्तुत हैं-

जैसा कि जगज़ाहिर है कि अर्थव्यवस्था में 15 लाख 44 हज़ार के अलावा जाली नोटे भी थी, जिसका सही सही अनुमान किसी के पास में नहीं है कितनी थी! एक लाख करोड़ थी या 2 लाख करोड़ थी। लेकिन जो भी थी वो नोटबंदी के दौरान नष्ट हो गई, इतना तो आप जानभूझ के भले न लिखे लेकिन इसे इनकार तो क़तई नहीं कर सकते हैं! ये आप भी जानते हैं!

फिर भी बैंकों में रोज़मर्रा के कैश गणना के दौरान मिलने वाली जाली नोटों की प्रायिकता से पाया कि कुल मूल्य की कोई कम से कम 6% जाली नोटें होनी चाहिए अर्थ व्यवस्था में! माने कोई 1 लाख करोड़ के आस पास! ये जाली नोटें नष्ट हो गई! माने यदि 16000 करोड़ नहीं लौटी और साथ साथ 1 लाख करोड़ नष्ट भी हुई! तो कुल आँकड़ा बनता है 1 लाख 16 हज़ार करोड़! माने इतना न्यूनतम है, इससे ज़्यादा भी हो सकता है! आशा है आप समझ रहे होंगे! हम ये मानकर चल रहे हैं कि पत्रकार होते हुए भी आपको थोड़ी बहुत गणित आती होगी!

दूसरी बात, सामाजिक दृष्टिकोण से देखें तो ये एक लाख 16 हज़ार करोड़ रुपया किसके पास था, ये भी मैटर करता है! माने आतंकी के पास था, या नक्सल के पास था, अपराधी के पास था! आम आदमी जिन्हें घोषित आय से ज़्यादा रक़म जमा करने पे पकड़े जाने का डर तो था लेकिन उन्हें केवल अर्थदंड देना था, उन्होंने बिना डरे नोट जमा किया, क्योंकि अर्थदंड के बाद भी उन्हें लाभ था! ऐसी बड़ी आबादी थी!

अब ये जो एक लाख 16 हज़ार करोड़ हैं, ज़ाहिर है कि ये पैसा उन्ही के पास था, जिनके आपराधिक कारणों से पकड़े जाने का डर था, माने अपराधी, आतंकी, नक्सली, अतः ये वापस नहीं आए! इससे उनकी शक्ति कम हुई! माने शैतानों के पास से 1 लाख 16 हज़ार करोड़ लूट जाना कोई छोटी मोटी बात नहीं है! शैतानी शक्तियाँ कमज़ोर हुई हैं! मुझे नहीं पता आपके शैतानों के साथ अवैद्य सम्बंध हैं या नहीं!

तीसरी बात नोटबंदी से देश में कितने अमीर हैं, कितने ग़रीब ये सरकार को पता चल गया है, 60 लाख ऐसे बड़े नाम सामने आएँ हैं जिनकी इंकम तो बहुत ज़्यादा है लेकिन कभी इंकम टैक्स नहीं दिया. उन्हें Operation Clean Money के तहत नोटिस जा रहा है, नए टैक्स पेयर बन रहे हैं, टैक्स बेस बढ़ रहा है, GST सही सही लागू करने में ये मिल का पत्थर है, माने अब जीवन भर इसका फ़ायदा मिलेगा! और साथ ही डाटा माइनिंग के साथ नए नाम आते जा रहे हैं जिनकी संख्या करोड़ों में हैं, माने इंकम टैक्स विभाग को लम्बा प्रोजेक्ट मिल गया है राजस्व बढ़ाने व टैक्स चोरी रोकने का! ये लंबा चलेगा, जिसके दूरगामी परिणाम होंगे! जिससे इंकम टैक्स दर कम होने की सम्भावना प्रबल हो गई है!

चौथी बात अब अर्थव्यवस्था में छोटे नोटों का चलन बढ़ रहा है, 50, 100, 200 के नोटों का प्रतिशत बढ़ रहा है, साथ ही सरकार सारे नोट नहीं छापेगी, बाक़ी सॉफ़्ट करेंसी का चलन रहेगा, जिससे करप्शन में कमी आएगी!

अब ज़रा आप ही बतायिए क्या ये सब बिना नोट बंदी सम्भव था! मुझे नहीं पता कि आप किस पार्टी की पत्रकारिता करते हैं, लेकिन आप जो भी करते हैं उसे पत्रकारीता नहीं अपितु दलाली कहते हैं!

– अश्विनी कुमार वर्मा

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY