वो एक माँ थी, मर कर भी बेटियों के लिये तड़पती मां!

आधी रात को बहुत बारिश हो रही थी. आशीष और उसकी बीवी प्रिया एक मित्र की पार्टी से अपनी गाड़ी से घर वापस लौट रहे थे. बारिश की वजह से आशीष बहुत धीमी गति से गाड़ी चला रहा था, तभी अचानक बिजली गिरी..

बिजली की रोशनी में आशीष को गाड़ी के सामने एक बदहवास सी एक औरत दिखाई दी. आशीष ने गाड़ी रोक दी! गाड़ी रुकने पर उसकी बीवी ने कहा :- क्या हुआ? गाड़ी क्यों रोक दी?

आशीष ने आगे की ओर इशारा किया. प्रिया ने आगे देखा तो वो डर गयी, क्योंकि गाड़ी के सामने एक औरत खड़ी थी. वो औरत गाड़ी के पास आयी, और हाथ से गाड़ी का शीशा नीचे करने का इशारा करने लगी. आशीष की बीवी प्रिया काफी डर गयी थी, उसने आशीष को गाड़ी चलाने को कहा, लेकिन गाड़ी भी स्टार्ट नहीं हुईं.

गाड़ी के बाहर खड़ी औरत बारिश की वजह से भीग गयी थी. वो हाथ जोड़कर गाड़ी का शीशा नीचे करने का इशारा कर रही थी. आशीष को लगा कि वो औरत किसी मुसीबत में है, इसलिए उसने गाड़ी का शीशा नीचे किया. वो औरत हाथ जोड़कर बोली, “भाई साहब मेरी मदद करें. तेज़ बारिश की वजह से मेरी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है, मेरी गाड़ी रास्ते के नीचे गिर गयी है, उसमें मेरी छोटी बच्ची है.. प्लीज़ उसे बचाईये… “आशीष गाड़ी से उतरा और उस औरत के पीछे गया. उस औरत की गाड़ी रास्ते के काफी नीचे गिर गयी थी. आशीष नीचे उतरकर उस गाड़ी के पास गया तो देखा कि उसमें एक प्यारी छोटी सी फूल सी बच्ची रो रही है. उसने बच्ची को बाहर निकाला, फिर आशीष को लगा कि ड्रायवर की सीट पर भी कोई है. जब आशीष ने ड्रायवर की सीट पर देखा तो उसके होश उड़ गये, क्योंकि ड्रायवर की सीट पर वही औरत खून से लथपथ मरी पड़ी थी.

आशीष को अब सब समझ में आया. वो बच्ची को लेकर अपनी गाड़ी के पास आया, बच्ची को अपनी बीवी प्रिया को दिया. उसकी बीवी बोली, “वो औरत कहाँ है? वह कौन थीं?”

आशीष बोला – “वो एक माँ थी. मर कर भी बेटियों के लिये तड़पती मां!”

माँ की अपार ममता उसकी मृत्यु के बाद भी उसके बच्चों के लिए ज़िन्दा रहती हैं.

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