अमृता जन्मोत्सव : साईं! मैं तेरी दरगाह पर तीसरे पीर की मेहंदी ले आई हूँ

साईं! मैं तेरी दरगाह पर
आज तीसरे पीर की मेहंदी ले आई हूँ…
वे जो देव और दानव
और जिन्हें सारा संसार जाने
वे मेरे भी दिशा पीर लगते हैं…
और संसार जाने-
कि कोई एक दिशा को जाए
तो दूसरी दिशा की ओर पीठ होती है….
.
और इस तरह इंसान का अपना मुंह
उस अपनी पीठ से लड़ता है….
और जब हार जाता है-
तब देव-दानव संग्राम होता है….
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साईं! रास्ते, खून के भीगे हुए
पर वही जो मेरे दिशा पीर हैं
मैं दोनों दिशाओं से होती हुई
एक पवन की तरह आई हूँ….
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साईं! इंतज़ार का युग बीत गया
मैंने एक मुराद माँगी थी
और मेहंदी की जड़ों को जाकर
मैंने मौली की तार बांधी थी…
.
यह शायद उसी मौली का कर्म हुआ
कि मुझे तीसरे पीर का दीदार हुआ
अद्वेत की मिट्टी मैंने मस्तक पर लगाई
तब वहां मेहंदी का पौधा उग आया….

वही मेहंदी-
मैं रास्तों पर छिड़कती आई हूँ…
और साईं! मैं तेरी दरगाह पर-
आज तीसरे पीर की मेहंदी ले आई हूँ…

– अमृता प्रीतम

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