संघ की पोल खोल भाग-8 : राष्ट्रीय ध्वज से नफरत करने वाले और तिरंगा न फहराने वाले संघी

क्या आप जानते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने 52 साल तक भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा नहीं फहराया? जी हां, ये सच है और ये सिर्फ मैं नहीं कह रहा बल्कि जनवरी 2017 में राहुल गांधी ने भी कही थी. ये एकदम सच है कि 1950 से ले कर 2002 तक RSS ने तिरंगा नहीं फहराया.

तो क्या है इस तिरंगे के ना फहराने का सच आइये जानते हैं :

[संघ की पोल खोल भाग-1 : First Hand Experience]

15 अगस्त 1947 को भारत आज़ाद हुआ. संघ के सरसंघचालक आदरणीय गुरुजी श्री गोलवलकर जी ने स्वयं RSS के नागपुर मुख्यालय पर पहली बार 15 अगस्त 1947 को तिरंगा फहराया था और देश में RSS की सभी शाखाओं पर तिरंगा फहराया गया और राष्ट्रगान हुआ.

तिरंगा हर साल 15 अगस्त को फहराया जाता रहा, और सन् 1950 तक बदस्तूर जारी रहा. लेकिन कांग्रेसी तो कहते है कि संघ ने कभी तिरंगा फहराया ही नही? ऐसा इसलिए कि उनका ‘होनहार’ उपाध्यक्ष उन्हें सिखाता है.

[संघ की पोल खोल भाग-2 : संघ में जातिवाद]

कोई कांग्रेसी या राहुल गांधी मुझे ये बताएं कि 1947 से 1950 तक RSS ने तिरंगा फहराया कि नहीं? देश भर में फैली अपनी हर शाखा पर फहराया कि नहीं? इसमें कोई विवाद ही नहीं है और कांग्रेसी भी मानते हैं कि फहराया, तभी तो राहुल गांधी ने 52 वर्ष कहा था, 1950 से 2002 तक 52 वर्ष.

तो ऐसा क्या हुआ कि 1950 के बाद RSS ने तिरंगा फहराना बंद कर दिया? आज़ादी के बाद संघ की शक्ति लगातार बढ़ती जा रही थी और संघ ने 15 अगस्त जैसा राष्ट्रीय पर्व ज़ोर शोर से मनाना शुरू कर दिया, जनता ने भी इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना शुरू कर दिया, संघ का जबरदस्त विस्तार हो रहा था. हर गली हर मोहल्ले में शाखा लगनी शुरू हो गई थी.

[संघ की पोल खोल भाग-3 : कम्युनल संघ]

इस से नेहरू को अपना सिंहासन डोलता नज़र आया और बड़ी ही चालाकी से उन्होंने भारत के संविधान में एक अध्याय जुड़वा दिया ‘National Flag Code’. नेशनल फ्लैग कोड को संविधान की अन्य धाराओं के साथ 1950 में लागू कर दिया गया, और इसी के साथ तिरंगा फहराना अपराध की श्रेणी में आ गया.

इस कानून के लागू होने के बाद तिरंगा सिर्फ सरकारी इमारतों पर कुछ खास लोगों द्वारा ही फहराया जा सकता था और यदि कोई व्यक्ति इसका उल्लंघन करता तो उसे सश्रम कारावास की सज़ा का प्रावधान था, यानी कानूनन अब तिरंगा संघ की शाखाओं में नहीं फहराया जा सकता था क्योंकि वे प्राइवेट जगह थी ना कि सरकारी इमारत.

[संघ की पोल खोल भाग-4 : संघ प्रचारकों का पर्दाफाश]

संघ ने कानून का पालन किया और तिरंगा फहराना बंद कर दिया. यह कानून नेहरू के डर के कारण बनाया गया था वरना इसका कोई औचित्य नहीं था क्योंकि आज़ादी की लड़ाई में तो हर आम आदमी राष्ट्रीय ध्वज हाथ में ले कर सड़कों पर होता था. पर अचानक उसी आम आदमी और समस्त भारत की जनता से उनके देश के झंडे को फहराने का अधिकार छीन लिया गया, और जिस तिरंगे के लिए लाखों लोग शहीद हो गए, वह तिरंगा फहराने का अधिकार अब सिर्फ नेहरू-गांधी परिवार की जागीर बन चुका था.

[संघ की पोल खोल भाग-5 : स्वाधीनता संग्राम और संघ का योगदान]

कांग्रेस के Member of Parliament नवीन जिंदल ने अपनी फैक्ट्री ‘जिंदल विजयनगर स्टील्स’ में तिरंगा फहराया और उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई व उन्हें गिरफ्तार किया गया. इसके बाद उन्होंने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और 2002 में सुप्रीम कोर्ट से ये आदेश जारी करवाया कि भारत का ध्वज हर खास-ओ-आम फहरा सकता है, अपनी प्राइवेट बिल्डिंग पर भी फहरा सकता है, बशर्ते वे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान न करे और तिरंगे को फ्लैग कोड के अनुसार फहराए. इसके बाद से लगातार संघ की हर शाखा में तिरंगा फहराया जा रहा है.

[संघ की पोल खोल भाग-6 : आज़ादी का आंदोलन और गद्दार संघ]

है कोई माई का लाल कांग्रेसी, वामपंथी या आपिया जो मेरे इन तथ्यों को झुठला सके? आज वही कांग्रेसी सवाल उठा रहे हैं जो राष्ट्रगान के समय उठते तक नहीं, कुर्सी पर बैठे रहते है (वीडियो देखें).

[संघ की पोल खोल भाग-7 : स्वाधीनता संग्राम और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ]

आपको गूगल पर कई कांग्रेसी मुल्लों और वामपंथियों के ब्लॉग मिल जाएंगे जिसमें तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया होगा, पर हर जगह एक बात जरूर मिलेगी की 1950 से पहले और 2002 के बाद संघ लगातार तिरंगा फहराता आ रहा है, क्यो इसका रहस्योद्घाटन ऊपर कर चुका हूँ.

तो आज आपको पता चला कि तिरंगे का असली गुनहगार कौन था? सवाल ये है कि आखिर भारतीयों से उनके अपने ही देश का ध्वज क्यों छीन लिया गया?

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY