अच्छे आपसी सम्बन्ध बच्चे होने पर और अच्छे होते हैं, तो बुरे और भी बिगड़ जाते हैं!

चैनल नया था और प्रोग्राम भी, लेकिन काफी पहले अन्नू कपूर उस प्रोग्राम के एंकर हुआ करते थे जिसमें एक छोटी लड़की जीती थी. अब वो लड़की मशहूर गायिका, सुनिधि चौहान है. अन्नू कपूर गानों के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं यही मानकर हम भी वो प्रोग्राम देख रहे थे. ये कोई सा रे गा मा जैसा टैलेंट हंट नहीं था, इस पर कुछ ट्रिविया यानि फिल्मों से जुड़ी रोचक जानकारी के साथ पुराने गाने दिखा रहे थे. जब प्रोग्राम ख़त्म हुआ तो कुछ जो चिट्ठियां आई थी अन्नू कपूर ने उनमें से एक को पढ़ा और उसमें किस गाने का निवेदन है वो भी देखा.

ख़त में ‘कभी कभी’ फिल्म का गाना ‘मेरे घर आई एक नन्ही परी’ बजाने का निवेदन था. फ़िल्म में जब ये गाना फिल्माया गया है तो दृश्य कुछ यूँ है कि अमिताभ अपनी पत्नी के साथ बैठे हैं जहाँ उनकी पत्नी ये गाना गा रही है. पति पत्नी की एक नौजवान बेटी भी वहीँ है, वो सोच रही है कि उसकी माँ उसके लिए गा रही है. वहीँ एक दूसरी लड़की भी उनसे मिलने आई है, ये लड़की भी उनकी ही बरसों पहले अलग हुई बेटी है. गाना दरअसल मिलने आई अघोषित बेटी के लिए गाया जा रहा होता है, लेकिन दोनों लड़कियां, मन ही मन सोच रही होती हैं कि उसके लिए ही गाया जा रहा है.

चिट्ठी पढ़ते पढ़ते अन्नू कपूर भावुक हो चले. लिखने वाले कोई बुजुर्ग थे. बरसों पहले वो अपनी पोतियों को गोद में लिए घुमाते ये गाना गुनगुनाया करते थे. बाद में फिर उनके बेटे का तलाक हो गया और बच्चियां माँ की कस्टडी में गयीं. अब वो बुजुर्ग को उन बच्चियों से मिलने नहीं देती थी, और बुजुर्ग सोचते थे कभी बड़ी होने पर वो बच्चियां शायद उनसे दोबारा मिलने आयें. प्रोग्राम में चिट्ठी पहले पढ़ी गई और एक-आध लाइन की चर्चा के बाद गाना बजा, इसलिए हम गाना सुनते कुछ और सोचते रहे.

पति-पत्नी में अगर सम्बन्ध अच्छे ना हो तो शुरुआत में ही पता चल जाता है, और सिर्फ दोनों को खुद ही नहीं पता चलता, आस पास के, परिवार-दोस्त, मिलने आने वालों को भी समझ आ जाता है. ऐसे मामलों में जो पति पत्नी को जो सांत्वना मिश्रित पहली सलाह मिलती है वो ये है कि अरे कोई बात नहीं ! शुरू शुरू में दिक्कत होती है. बच्चे-वच्चे हो जाएँ एक बार तो फिर सब अपने आप ठीक हो जाता है. ये सलाह भारत की सबसे ज्यादा बेवकूफी भरी, शुद्ध धूर्तता वाली सलाह होती है.

बेवकूफी भरी और कपटपूर्ण दोनों एक साथ इसलिए क्योंकि जो ये सलाह मान रहे होते हैं, कि बच्चे हो जायेंगे तो सब ठीक हो जाएगा वो बेचारे बेवक़ूफ़ होते हैं. जो विवाह विच्छेद जैसी स्थिति में हों, वो दम्पति बाढ़ में डूबते सी स्थिति में होते हैं. इसलिए डूबते को तिनके का सहारा की तर्ज पर वो ये बेवकूफी कर भी जाते हैं. कपट पूर्ण इसलिए क्योंकि सलाह देने वालों ने कभी, किसी ऐसे सम्बन्ध को बच्चे हो जाने पर सुधरते नहीं देखा. जिनपर बच्चों की जिम्मेदारी नहीं थी, तब आपस में नहीं पटी, वो जिम्मेदारी किसकी के नाम पर तो और सम्बन्ध बिगाड़ेंगे. ये जानते हुए भी “सलाह” दी जा रही है, इसलिए कपटपूर्ण.

बच्चे हो जाने पर भी बिगड़े संबंधों वाला विवाह कोई सहचर्य नहीं होगा. एक ही घर में दोनों, एक दूसरे से बात भी करने से कतराते हुए, बच्चों की खातिर रहते रहेंगे. तलाक की सी स्थिति आई तो बच्चे ब्लैकमेल का भयानक हथियार होंगे. पति या तो बच्चों को ले नहीं जाने दूंगा कहकर ब्लैकमेल करेगा, या उस से भी बुरा जब पत्नी बच्चों को लेकर मायके जाए और अब यहीं रहूंगी कहकर पूरे परिवार को ब्लैकमेल करे. ज्यादातर मामलों में बच्चे होने के बाद वो ब्लैकमेल के हथियार की तरह ही नहीं इस्तेमाल होते, वो हंसने का बहाना भी देते हैं. अगर सम्बन्ध पहले ही अच्छे नहीं थे तो बच्चे कैसे हुए, के अजीब से सवाल का भी सामना करना होगा. यानि घर में बात करने के लिए पत्नी तो नहीं ही है, बाहर भी लोग आपपर हँसेंगे ही.

अगर वैवाहिक सम्बन्ध अच्छे ना हों, और कोई ये बच्चे हो जाने पर, वाली सलाह दे, तो उनसे पूछिए कि वो अगर किन्हीं ऐसे दम्पतियों को जानते हैं जिनके सम्बन्ध बच्चे हो जाने पर सुधर गए तो उनसे आपको मिलवा दे, ताकि आप सीधा ऐसी समस्या झेल चुके लोगों से सलाह ले सकें. बाकी मामलों के लिए मानकर चलिए कि अगर अच्छे आपसी सम्बन्ध बच्चे होने पर और अच्छे होते हैं, तो बुरे और भी बिगड़ जाते हैं. लोगों की सुनकर किसी के हाथ में ब्लैकमेलिंग का औजार मत थमाइये. झेलना आपको है, अपने खुद के दिमाग से सोचिये.

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