हाँ, हम मिलेंगे ज़रूर

love-astitva

खुली आँखों के तेरे, सब ख्वाब मुकम्मल होंगे,
आज ना हुए, ना सही, यकीनन कल होंगे ।

सतरंगो के इंद्रधनुष से सजेगी हकीकत,
मिलन के मधुर गीतों से खिले पल होंगे ।

बदल जायेगी फिजायें स्वप्नजगत की सारी,
अकल्पनीय, सुखद अनुभव सरल होंगे ।

धड़कनों का शोर होगा और सांसो की संगत,
मिलन के साक्षी, देव कोई विरल होंगे ।

होंठ मिलेंगे होंठो से सकुचाये, शरमाये से,
सांसो से सांसो के बंधन, पावन-पुष्ट -प्रबल होंगे ।

अंगो से अंग मिलेंगे व्याकुल, व्यथित विकल विरह के,
अहसास स्पंदन के सारे गूढ़, गतिज, तरल होंगे ।

लोचन नैनन पटाक्षेप कर गहन अंध में होंगे लय ,
फिर जो दिखेंगे दृश्य वो सारे सरस, सहज, सजल होंगे ।

फर्क ना कर पाओगे मुझमें और खुद में ,
एकाकार, अंतर्निहित, पूर्ण सकल होंगे ।

होगी शामिल उस वस्ल में ये कायनात भी,
चाँद होगा, हम होंगे और मुस्कुराते कमल होंगे ।

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