श्रीकृष्ण मुस्कुराते रहे : मानव की पीड़ा और परमात्मा का प्रेम

दुनिया भर में फैले इंसान, भगवान से बड़े नाराज थे. आखिर वो हम पर हुकूमत कर कैसे रहा है? उसे पीड़ा, दुःख-तकलीफ़ के बारे में पता ही क्या है? कोई अश्वेत आदमी था जो रंगभेद से पीड़ित था. किसी को यहूदी होने के कारण यातनाएं झेलनी पड़ी थी. किसी को भयावह कम्युनिस्टों की गुलाग जेल में डाला गया था. सबको लग रहा था कि जिस भगवान ने ऐसा कुछ देखा ही नहीं उसे क्या हक़ है लोगों के लिए पाप-पुण्य का फैसला करने का!

आखिर सबने तय किया कि अपना एक एक प्रतिनिधि भगवान कृष्ण के पास भेजा जाए. पूर्णावतार वही थे. उन्हीं से जवाब तलब हो कि जब लोगों के साथ इतने अन्याय हो रहे हैं तो वो कहाँ हैं? आखिर जब उन्होंने ऐसा कुछ झेला ही नहीं तो किस अधिकार से भगवान बने मंदिरों में अपनी पूजा करवा रहे हैं? प्रतिनिधि मंडल जब चला तो रास्ते में अपनी-अपनी शिकायतों की चर्चा करता जाता था.

कई लोग इकठ्ठा थे, तो कम समय में अपनी बात कह सकें इसलिए ढंग से सवालों की लिस्ट तैयार करना भी जरूरी था, आखिर लिस्ट भी रास्ते भर में बन गई. जब सब भगवान के पास पहुंचे तो लिस्ट पढ़ के सुनाई जाने लगी. लोग सिंहासन घेरे खड़े थे. सबका मानना था कि भगवान को धरती पर इंसान के तौर पर पैदा होना पड़े. अपनी दैवी शक्तियों का इस्तेमाल करके वो तकलीफों से बच ना पाए ये भी पाबन्दी हो. लिस्ट पढ़ कर सुनाई जाने लगी.

पैदा होते ही जेल में जाना पड़े तुम्हें. अपने माता-पिता के पास नहीं, कहीं और पाला जाए, लोग सवाल करें तुम्हारे पैदा होने पर. तुम्हारा रंग गोरा नहीं, काला हो. पैदा होते ही तुमसे लोगों को चिढ़ हो. इतनी नफ़रत हो तुमसे कि तरह-तरह के तरीकों से, कभी ज़हर देकर, कभी जानवरों से कुचल कर, कभी सीधा ही तुम्हारी हत्या के प्रयास किये जाएँ. तुम पर चोरी का, संपत्ति लूटने का, व्यभिचारी और लम्पट होने का आरोप आये.

तुम पर लगे अभियोगों की जांच करने वाले तुम्हारे शत्रु हों. तुम्हारे भाई बन्धु आपस में ही लड़ मरने को तैयार हों और तुम्हें उन्हें रोज़ रोकना पड़े. अपना बसा बसाया गाँव, घर, शहर सब छोड़ कर भागना पड़े तुम्हें. तुम्हारे यार दोस्त भाई परिवार सब मर जाएँ, अकेले हो जाना पड़े तुम्हें. बिलकुल अकेले में मौत हो तुम्हारी, किसी युद्ध में वीरगति जैसी नहीं, बिना लड़े, किसी अज्ञात के हाथों मारे जाओ.

आरोप एक सुना रहा था, बाकी सभा में सन्नाटा छाया रहा. एक-एक कर के आरोप लिखवाने वालों के सर झुकते जाते थे. श्री कृष्ण मुस्कुराते रहे. उन्होंने सब देख रखा था.

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