जाट आंदोलन के बाद हरियाणा में कांग्रेस प्रायोजित दूसरा खूनी राजनीतिक सर्कस तो नहीं राम रहीम!

बलात्कारी राम-रहीम के समधी और पूर्व कांग्रेसी मंत्री, पंजाब के मौड़ा से पूर्व विधायक हरमिंदर जस्सी को सिर्फ डेरा सच्चा सौदे के अराजक का समधी होने की बिना पर ज़ेड प्लस की सुरक्षा देने वाली यूपीए की कांग्रेस, क्या जबाब देगी कि उसका यह नेता उर्फ बलात्कार के सजायाफ्ता का समधी पंजाब-हरियाणा के पंचकुला में किस खेल में लगा है?

भला हो वर्तमान एनडीए की केंद्र सरकार का जिसने साल 2015 में इस कांग्रेसी सपूत और बलात्कारी के समधी की ज़ेड सुरक्षा वापस ली. जस्सी की लड़की की शादी राम रहीम के लड़के से हुई है.

गुजरात का ऊना, मध्य प्रदेश का मंदसौर बहुत पुराना नहीं हुआ जब कांग्रेस ने दलितों-किसानों के नाम पर प्रायोजित गुंडई, अराजकता, हिंसा कराई सड़कों पर.

पंचकुला जितना हरियाणवी है, उतना ही पंजाबी भी… बलात्कारी बाबा के कांग्रेसी समधी की खाद के बदौलत कहीं हरियाणा में एक और खूनी साजिश तो नहीं!

सड़कों पर जो अराजक मरे वे राम-रहीमी गुंडे हैं. अर्धसैनिक बलों, पुलिस के जवानों के घायल होने पर मानवीय दुख, लेकिन सड़कों पर हिंसा-आगजनी करते अराजक अमानवों के प्रति कोई संवेदना नहीं. सड़कों पर खून बटोरते और कितना दिंगबर होना है कांग्रेस आपको ?

राम-रहीम और उसके गुंडों को देख कर समझ में आता है कि कैसे स्व. इंदिरा गांधी ने भिंडरावाले पैदा कर दिया इसी देश में.

भला हो साल 2002… अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार जिसने खुली छूट दी इस गिरोहबाज के खिलाफ और 15 सालों की देर से ही सही, सरकारी केंद्रीय एजेंसी सीबीआई सज़ा करा पाने में सफल रही.

2002 से 2004 तक दो साल, 2014 से 2017 तक तीन साल : कुल पांच सालों की भाजपा सरकारों में केस दर्ज होने से लेकर सजा तक की प्रक्रिया पूरी हुई.

2004 से 2014 तक दस सालों में यूपीए 1-2 की कांग्रेसी सरकारों ने इस अराजक को अंजाम तक पहुंचाने में कितना और क्या योगदान दिया, इसका जबाब कौन देगा?

दस साल बनाम पांच साल. राजनैतिक सत्ता… जांच एजेंसियों की आज़ादी… परिणाम… आदरणीय न्यायालयों का न्यायोचित फैसला.

इंसाफ और न्यायपालिका की रफ्तार नापना चाहिए…. ‘इंचों’ में बिसात नापते सस्ते नारेबाजों और गिरोहों को उनके 10 और इनके 5 सालों की रफ्तार, परिणाम के बीच जरा एवरेज नापिये…. गाड़ी का स्वास्थ्य दुरुस्त रहेगा.

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