प्राइवट लिमिटेड कम्पनियाँ कैसे हो गईं लोकतंत्र का चौथा खम्बा?

न्याय पूर्ण नहीं हुआ. न्याय अधूरा है! अधूरा न्याय अन्याय होता है! राम रहीम पे जितनी कार्यवाही हुई, उसकी दोगुनी मीडिया वालों पे होनी चाहिए, उन सारे मीडिया वालों पे जिन्होंने राम रहीम को हीरो बनाया. निर्मल बाबा को प्रमोट किया. राधे माँ को प्रमोट किया.

काले धन के गोरखधंधे में तुम्हारे ही हाथ सबसे ज़्यादा सने हैं, कोई भी निकृष्ट व्यक्ति तुम ही से गुर सिखता है, अफ़वाहें, अंधविश्वास बिना तुम्हारी मदद नहीं फैलता! कमीशन के लिए तुम कुछ भी कर सकते हो! जब कमीशन मिलना बंद होता है तो उसी बाबा का स्टिंग ऑपरेशन करते हो! फिर उसे विलेन साबित करते हो! बड़ा भारी मीडिया वाले बन जाते हो!

धारा 144 लगी है, जो भी मीडिया वाला न्यूज़ देते दिखाई दे, मार मार के पिछवाड़ा लाल कर देना चाहिए या फिर सीधा गोली मारनी चाहिए. क्योंकि ऐसे बड़े दोगले दुनिया में खोजे नहीं मिलेंगे. देश में कुछ भी बुरा हो, सबकी जड़ में यही हैं.

ख़ुद को लोकतंत्र का चौथा खंबा बोलते हैं,काहें का बात का चौथा खम्भा? क्या मीडिया पब्लिक के पैसे से चलती है? या तुम्हारी ख़बरें जनता का दुःख दर्द दिखाती हैं? या तुम्हारे पर जनता का थोड़ा भी कंट्रोल हो? या तुम्हारे एडिटर को जनता ने रखा हो? बिना किसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्राइवट लिमिटेड कम्पनियाँ लोकतंत्र का चौथा खंबा कैसे हो गई?

कमीशन के चक्कर में पार्टियों की, बाबाओं की, उस हर एक चीज़ की जिससे देश का सर्वनाश हो जाए, उसकी दलाली करने वाली प्राइवट कम्पनियाँ ख़ुद को लोकतंत्र का पर्याय बताती फिर रही हैं! वाह!

पूरा न्याय तब होगा, जब इमर्जेन्सी लगाकर कोने कोने से खोज खोजकर इनके पिछवाड़े पे इतने डंडे बजाएँ जाए, ताकि ख़ुद को ये लोकतंत्र का चौथा खंबा कहना भूल जाएँ. इन मठाधीशों पे दोगुनी कार्यवाही की दरकार है!

– अश्विनी कुमार वर्मा

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