हरियाणा हिंसा में 31 लोगों मौत, नहीं हटाए जाएंगे सीएम खट्टर

नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, दुष्कर्म के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत से डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद भड़की हिंसा में 31 लोगों की मौत हुई है. बयान के मुताबिक, पंचकूला में 29 और सिरसा में दो लोगों की मौत हुई है. सीबीआई अदालत के फैसले के बाद हुई हिंसा में कम से कम 250 लोग घायल हुए हैं. घायलों में 60 पुलिसकर्मी भी हैं.

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी बयान के मुताबिक, हरियाणा में स्थिति अब भी तनावपूर्ण, पर नियंत्रण में है. इसके पहले केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हरियाणा में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए सुबह 11 बजे उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, गृह सचिव राजीव महर्षि, खुफिया ब्यूरो (आईबी) के प्रमुख राजवी जैन और गृह मंत्रालय के अन्य अधिकारी शामिल हुए.

इस बीच सूत्रों के हवाले से आई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बावजूद भाजपा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को उनके पद से हटाने के बारे में नहीं सोच रही है. दिलचस्प बात है कि इन्हीं मीडिया रिपोर्ट्स में शुक्रवार को दावा किया जा रहा था कि पार्टी आलाकमान और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा की घटनाओं से नाराज हैं, और खट्टर को हटाया जाना तय है.

पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी फिलहाल खट्टर को हटाने के पक्ष में नहीं है. हालांकि अगर बाद में किसी तरह का दबाव बनता है, तब पार्टी बाद में इस पर विचार करेगी, लेकिन फिलहाल खट्टर ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे.

अब शनिवार को पार्टी के सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि खट्टर को लेकर पार्टी में कोई नाराजगी नहीं है. शनिवार को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने हरियाणा के प्रभारी डॉ. अनिल जैन और महासचिव कैलाश विजयवर्गीय से बातचीत की और हालात की जानकारी ली. सूत्रों की मानें तो इस बातचीत के बाद पार्टी अध्यक्ष खट्टर को हटाने के बारे में नहीं सोच रहे हैं.

इन रिपोर्ट्स की मानें तो खट्टर ने राम रहीम के मामले को जिस तरह से हैंडल किया है, उसमें पार्टी आलाकमान की भी सहमति थी. पार्टी भी नहीं चाहती थी कि डेरा समर्थकों के साथ पहले से किसी तरह की सख्ती बरती जाए. सूत्रों का कहना है कि खट्टर सरकार ने दलील दी कि डेरा समर्थकों पर इसलिए पहले कार्रवाई नहीं की गई, क्योंकि डेरा समर्थक शांत थे.

पार्टी का तर्क है कि ऐसे में अगर पहले ही उन पर सख्ती की जाती तो उससे भड़कने वाली हिंसा के लिए राज्य सरकार को ही जिम्मेदार मान लिया जाता. जब भीड़ हिंसक हुई तो उसके बाद सरकार ने फौरन कदम उठाए और कुछ घंटों के भीतर ही हिंसा पर नियंत्रण पा लिया गया.

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