राम रहीम उपद्रव : वो सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

राम रहीम पर आरोप तय हो गए. बाहर हज़ारों की भीड़ थी उनके समर्थकों की. इसी भीड़ में कुछ छुपे हुए उपद्रवी तत्व भी थे, लेकिन अधिकतर लोग परिवार के साथ थे, बीवी बच्चों के साथ आये थे. मीडिया कर्मियों द्वारा बार-बार लोगों को भड़काया जा रहा था, पूछ रहे थे, ‘क्यों आये हो? बाबा ने बलात्कार किया सिद्ध हो गया, बाबा तो अब जेल जाएगा? कम से कम 15 साल की लगेगी बलात्कारी बाबा को, पुलिस मारती हुई ले जाएगी’ वगैरह वगैरह.

मीडिया को भड़काऊ बाईट (वीडियो का अंश) चाहिए थी इसलिए वो जनता को भड़का रही थी. थोड़ी देर में जनता भी भड़क गई और मीडियाकर्मियों पर पिल पड़ी. मीडिया की गाड़ियां तोड़ी जाने लगी, बस यही वो मौका था जिसके इंतज़ार में उपद्रवी तत्व इस भीड़ में शामिल होने आए थे. जनता के बीच में से अचानक ये निकल कर आये और इन्होंने पुलिस पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए, जबकि मीडिया से चिढ़ी जनता सिर्फ मीडिया को निशाना बना रही थी.

इन्ही उपद्रवी तत्वों ने गाड़ियों में आग भी लगा दी क्योंकि इनके पास पेट्रोल पहले से ही उपलब्ध था. मीडिया को मौका मिल गया, खूब छाती पीटना शुरू हो गया तो उधर उपद्रवी पुलिस पर हमला और तेज़ करते जा रहे थे. मीडिया इसे लगातार हाईलाइट कर के लाइव दिखा रहा था.

आखिर में पुलिस ने अंडर प्रेशर जनता पर लाठीचार्ज कर दिया, उद्देश्य तो सिर्फ उपद्रवी तत्वों को खदेड़ने का था लेकिन लाठीचार्ज की वजह से कई बेकसूरों और महिलाओं को भी चोट आई.

ये वो टर्निंग पॉइंट था जब पूरी की पूरी जनता ही पुलिस और प्रशासन के खिलाफ लामबंद हो गयी, और अब सभी ने पुलिस पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए. जो वीडियो सामने आए हैं उनमें पत्थर सिर्फ पुलिस पर फेंके जा रहे हैं और बगल में लाइन से खड़ी गाड़ियों को कोई नुकसान नहीं पहुचाया जा रहा.

अब मीडिया ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और देश को ऐसी तस्वीर दिखाई कि मानो पूरे देश मे आग लग गयी हो. मीडिया की ट्रिक काम कर गयी और सरकार ने अंडर प्रेशर आ कर गोली चलाने के आदेश दे दिए.

मीडिया खुश हुआ और अब और भी ज़्यादा ताकत से रिपोर्टिंग की. मीडिया का उद्देश्य था कि लाशों के अंबार लग जाये, न्यूज़ के लिए मसाला जो चाहिए था, जान जाती है जाए कौन हमारा रिश्तेदार है? मसाला मिलना चाहिए ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए.

जो मीडिया कल रात तक लाशों के ढेर लगाने की बात कर रही थी वही आज सुबह मारने वालों की लाश पर रो रही है और खट्टर को लाशों के ढेर पर बैठे मुख्यमंत्री की संज्ञा दे रही है.

राम रहीम ने खट्टर साहब को आश्वासन दिया था कि उपद्रव नहीं होगा, उनके अनुयायी शांतिप्रिय हैं, सब कुछ शांत था, फिर अचानक ये सब कैसे हो गया? खट्टर सरकार भीड़ में मौजूद चंद उपद्रवियों की पहचान कर उन्हें अलग करने में नाकाम रही, और उन्ही उपद्रवियों को मीडिया ने भड़का कर सारा बखेड़ा खड़ा करवा दीया.

क्या आप किसी पर हमला करने या किसी से लड़ने जाएंगे तो अपने बीवी बच्चों को साथ ले कर जाएंगे? क्या आपको उपद्रव की आशंका हो तो आप अपने परिवार के साथ उस आयोजन में शामिल होंगे?

ये लेख आज सुबह एक पुलिस उच्च अधिकारी से हुई बातचीत के आधार पर लिखा गया है.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY