अलग रहना तो कोई अपराध नहीं

कुछ कांग्रेसी और अपोले-सपोले तीन तलाक़ के मुद्दे पर जशोदा बेन को बीच में ला रहे हैं. मोदी जी ने कभी जशोदा बेन को तलाक नहीं दिया. मोदी जी ने कभी जशोदा बेन को त्याग के किसी और का हाथ नहीं थामा. किसी दूसरी औरत के साथ घर नहीं बसाया. दूसरी शादी नहीं की.

उन दोनों ने स्वेच्छा से, आपसी सहमति से अलग रहने का निर्णय लिया. उन दोनों के बीच इस अलगाव को लेकर कोई विवाद नहीं रहा. जशोदा बेन के सामने कभी भी गुज़ारे भत्ते जैसी कोई समस्या भी नहीं रही, क्योंकि वो राजकीय सेवा में थीं और वेतन पाती थीं.

इसके विपरीत मोदी जी समाज सेवा का कार्य करते थे और भिक्षाटन कर जीवन व्यतीत किया आपने. अगर तलाक और गुजारा भत्ता जैसे कोई विषय उठते तो गुज़ारा भत्ता तो जशोदा बेन देतीं मोदी जी को क्योंकि उनके पास एक fixed मासिक आय थी और मोदी जी तो फक्कड़ इंसान थे.

कानून और समाज दो व्यक्तियों की कानूनन शादी और तलाक़ जैसे विषय तो regulate कर सकता है पर वो किन्हीं दो व्यक्तियों के आपसी व्यवहार और साहचर्य को regulate या निर्देशित नहीं कर सकता.

समाज और कानून आपको दूसरा विवाह करने से रोक सकता है, तलाक़ को regulate और decide कर सकता है, गुज़ारे भत्ते पे ruling दे सकता है, बच्चों की custody पे ruling दे सकता है, पर साथ रहने, Sex, Cohabitation, Coexistance जैसे विषयों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता.

दुनिया का कोई कानून मुझे मेरी कानूनी ब्याहता से न तो अलग कर सकता है और न उसके साथ रहने, बात व्यवहार करने या sexual relations रखने या न रखने के लिए मजबूर कर सकता है.

मोदी जी ने न तो जशोदा बेन को तलाक दिया, न दूसरी शादी की और न इन दोनों के बीच गुज़ारा भत्ता और बच्चों की custody को ले के कोई विवाद है.

कुछ लोगों ने तर्क दिया कि यदि जशोदा बेन कोई शिकायत करें… क्या शिकायत करेंगी जशोदा बेन? ये कि मेरा पति घर नहीं आता? या इसने 20 साल से मुझसे प्यार नहीं किया… क्या complaint करेंगी???

तीन तलाक़ कानून का विषय है, कानूनी अपराध है…. अलग रहना कोई अपराध नहीं.

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