सरकार ध्यान रखे कि भेड़िये कभी अपना मूल स्वभाव नहीं बदलते

एक भेड़िया था. जन्मजात धूर्त और मक्कार. एक जंगल में उसने हिरण के बच्चे का शिकार किया और उसे खाने लगा. भेड़िये का परिवार भी उस हिरण के बच्चे का मांस खाने लगा, तभी मांस खाते वक्त भेड़िये और उसके बच्चे के गले में एक हड्डी अटक गई. बच्चा और भेड़िया दोनो तड़पने लगे, उन दोनों के गले लहूलुहान हो गए और उसमें गहरे घाव हो गए.

भेड़िया भागा भागा तालाब किनारे रहने वाले सारस के पास पहुँचा और दया की भीख मांगने लगा- “सारस भाई मदद करो मेरे और बच्चे दोनों के गले में हड्डी फंस गयीं हैं… केवल तुम ही इसे निकाल सकते हो.” सारस को उस पर दया आ गयी, उसने अपनी लम्बी चोंच से दोनों के गले में फंसी हड्डी निकाली और जंगल के पत्तों से बनी औषधि उसके गले में लगाई.

सारस रोजाना उनके खाने पीने का भी इंतजाम करता. एक हफ्ते कि चिकित्सा के बाद वे दोनों पूरी तरह ठीक हो गए. भेड़िये ओर उसके बेटे दोनों को उस सारस के रहने की जगह इतनी पसन्द आयी कि वे वहीँ रहने लगे और सारस के दाना पानी को ही खाने लगे और उस पर अपना अधिकार जताने लगे.

सारस ओर उसका परिवार उन दोनों की हरकतों से परेशान हो गया. उन्होंने भेड़िये से निवेदन किया कि अब वे स्वस्थ हो गए हैं तो अब इस जगह को छोड़कर जाने की कृपा करें. सारस के मुंह से यह सुनते ही भेड़िया भड़क उठा, उसने उल्टा सारस को धमकाना शुरू कर दिया, किन्तु सारस और उसका परिवार विनम्रतापूर्वक अपने घर को मुक्त करने का निवेदन करता रहा. तब भेड़िये और उसके बच्चे ने क्रोधित होकर अपने जातिगत गुणों के अनुसार सारस पर हमला कर दिया और उसके पूरे परिवार को मारकर खा गये और उनके घर पर ही कब्जा करके रहने लगे.

2 साल पहले तीन साल का एलन कुर्दी अपने पांच साल के भाई और मां के साथ समुद्र में डूब गया. पूरा परिवार 12 अन्य लोगों के साथ जंग से जूझ रहे सीरिया से निकलकर यूरोप जा रहा था. नाव समुद्र में पलट गई. एलन का पिता अब्दुल्ला बच गया. बच्चे का शव तुर्की के मुख्य टूरिस्ट रिजॉर्ट के पास समुद्र तट पर औंधे मुंह पड़ा मिला. बच्चे के शव की तस्वीर के सामने आते ही पूरी दुनिया में बहस छिड़ गई.

यूरोप के लिबरल मानवाधिकारवादी मीडिया और संगठनो ने इस घटना को लेकर आसमान सर पर उठा लिया. आम लोगों के साथ-साथ सरकारों के बीच भी बहस छिड़ी. जर्मनी ने कहा कि यूरोप के सभी देश रिफ्यूजियों को जगह देने से इनकार करने लगेंगे तो इससे “आइडिया ऑफ यूरोप” ही खत्म हो जाएगा. ये बच्चा बच सकता था, यदि यूरोप के देश इन लोगों को शरण देने से इनकार नहीं करते. तुरंत जर्मनी और फ्रांस ने एलान किया कि शरणार्थियों के लिए यूरोपीय देशों का कोटा तय होगा. मौजूदा नियम में भी ढील दी जाएगी, ताकि लोगों का आना आसान हो. यूएन रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल में 3 लाख लोग समुद्र के रास्ते ग्रीस आ चुके हैं.

मानवीय आधार पर तुर्की ने 20 लाख शरणार्थियों को अपनाया है, वहीं पूरे यूरोप ने बीते 5 साल में 10 लाख से अधिक लोगों को शरण दी, इन यूरोपीय देशों को उम्मीद थी कि इससे ये शरणार्थी मानवीय और गरिमापूर्ण जीवन के साथ यूरोपीय जीवन की मुख्यधारा में शामिल हो जायेगें.

सोमवार को स्पेन के मशहूर पर्यटन शहर बार्सिलोना में एक वैन से भीड़ पर हमला किया गया. इस हमले में कम से कम 13 लोग मारे गए हैं और करीब 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए. आतंकी संगठन ISIS ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. स्पेन के बार्सिलोना से 100 किलोमीटर दूर कैम्ब्रिल्स में एक और हमला हुआ कार ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़ कर भागने की कोशिश की. इसमें 7 नागरिक और एक पुलिस का जवान घायल हुआ है.

कुछ माह पूर्व ब्रिटेन के मैनचेस्टर शहर में अमेरिकी स्टार एरियाना ग्रांडे के पॉप कॉन्सर्ट के दौरान हुए विस्फोट में 19 लोगों की मौत हो गई और करीब 50 अन्य लोग घायल हो गए. कुछ माह पहले इंग्लेंड की संसद पर भी हमला हो चुका है. इससे पूर्व 2005 में भी लंदन में आत्मघाती हमला हुआ था जिसमें 52 लोग गए थे.

11 मार्च 2014 को स्पेन की राजधानी मैड्रिड में इस्लामिक चरमपंथियों ने कई ट्रेनों में सीरियल बम ब्लास्ट किया था. इस हमले में 191 लोग मारे गए थे जबकि 1800 से ऊपर लोग घायल हुए थे. अलकायदा से जुड़े मोरक्को के एक चरमपंथी ग्रुप ने लोकल ट्रेनों में 13 जगहों पर विस्फोटक सामग्री रख दी थी. सुबह दस बजे जब लोग ऑफिस के लिए जा रहे थे तभी बम धमाके हुए. मैड्रिड हमले के तीन हफ्ते बाद इसे अंजाम देने वाले सात लोगों ने पुलिस द्वारा घेरे जाने पर खुद को बम से उड़ा लिया था.

16 नवंबर, 2015 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में कई जगह हुए आतंकी हमलो में 129 से ज्यादा लोग मारे गए थे. गोलीबारी और धमाकों में 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. घटना के बाद फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी. इसके बाद फ्रांस की सीमा सील कर कर दी गई थी.

फ्रांस के नीस शहर में राष्ट्रीय दिवस ‘ब्रास्तील डे’ पर आतिशबाजी देखने के लिए पहुंची भीड़ पर एक लॉरी के हमले में 84 लोगों की मौत हुई थी. इस हादसे में 50 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. मोहम्मद लावेइज बूहलल नाम के हमलावर ने ट्रक को भीड़ में दौड़ा दिया. करीब लगभग दो किलोमीटर तक ट्रक दौड़ाता रहा जिसके बाद पुलिस ने उसे गोली मार दी.

पिछले दो सालों में यूरोप के कई देशों में आतंकी घटनाओं में बेहताशा बढ़़ोतरी हुई है. और जांच में ये तथ्य सामने आया है कि इन सारे हमलों में एशियाई या अफ्रीकी देशो से आए इन शरणार्थियों का ही हाथ है. जबकि उनके साथ कहीं कोई भेदभाव या अत्याचार नहीं किया गया उन्हें पूरे सम्मान और अधिकार के रहने की सुविधा दी गयी है.

भारत में भी 5 करोड़ से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठिये/शरणार्थी पूर्वोत्तर, बंगाल सहित पूरे देश में अवैध रूप से रह रहे हैं और लूट, हत्या जैसे अपराधों के साथ बमविस्फोट और आतंकी गतिविधियों में पकड़े जा चुके है. अब म्यांमार से आये 40हजार से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी मानवीय आधार पर भारत में शरण मांग रहे हैं. भारत के मानवाधिकारवादी उनकी मांग का समर्थन कर रहे हैं, सरकार ने अभी इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है.

सरकार जो भी निर्णय ले पर ध्यान रहे भेड़िये कभी अपना मूल स्वभाव नहीं बदलते.

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