मालेगांव ब्लास्ट के आरोपी बनाए गए कर्नल पुरोहित को सुप्रीम कोर्ट ने दी ज़मानत

नई दिल्ली. कांग्रेस के शासनकाल में भगवा आतंकवाद के नाम पर 2008 के मालेगांव ब्लास्ट के आरोपी बनाए गए कर्नल श्रीकांत पुरोहित को जमानत मिल गई है. कर्नल पुरोहित का बम धमाके से कोई लिंक नहीं मिला है और अगर धमाके के आरोप हट जाते हैं तो अधिकतम सजा सात साल हो सकती है जबकि वह 9 साल से जेल में थे.

इससे पहले 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नल पुरोहित की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस दौरान कर्नल पुरोहित के वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट से कहा कि न्याय के हित में पुरोहित को जमानत मिलनी चाहिए. पुरोहित की ओर से यह भी माना गया कि वह अभिनव भारत संगठन की मीटिंग में गए थे, लेकिन वह सेना की जासूसी के लिए वहां गए थे.

पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा कि उन्हें राजनीतिक क्रॉसफायर का शिकार बनाया गया है और ATS ने गलत तरीके से फंसाया है. जबकि NIA ने जमानत का विरोध करते हुए कहा है कि कर्नल पुरोहित को जमानत देने का यह उचित समय नहीं है. ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट ने माना है कि वह बम बनाने और सप्लाई करने में शामिल थे.

NIA ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर 2008 मालेगांव ब्लास्ट मामले में आरोपी कर्नल श्रीकांत पुरोहित की जमानत का विरोध किया है. NIA ने अपने जवाब में कहा है कि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का मामला श्रीकांत पुरोहित से अलग है. NIA ने अपने जवाब में कहा है कि पुरोहित के खिलाफ कई सबूत एकत्रित किए गए है. दरअसल, कर्नल पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने NIA को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत याचिका रद्द कर दी थी. बॉम्बे हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा को जमानत दे दी थी. याचिका में कर्नल पुरोहित ने कहा है कि वह आठ साल से जेल में बंद हैं. इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सही फैसला नहीं दिया है. हाईकोर्ट ने इसी आधार पर साध्वी प्रज्ञा को जमानत दे दी, लेकिन उनको जमानत देने से इनकार कर दिया इसलिए उन्हें भी समानता के आधार पर जमानत दे दी जाए.

उल्लेखनीय है कि 2008 में हुए मालेगांव धमाके में 6 लोगों की मौत हो गई थी और तकरीबन 100 लोग जख्मी हो गए थे. 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक बाइक में बम लगाकर विस्फोट किया गया था.

मालेगांव ब्लास्ट मामले में आरोपी कर्नल श्रीकांत पुरोहित की याचिका में यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने सेना की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की रिपोर्ट पर गौर नहीं किया, जिसमें कहा गया है कि वह सेना के लिए इंटेलीजेंस का काम करते थे.

गौरतलब है कि इसी साल 25 अप्रैल को 2008 के मालेगांव धमाका केस में बॉम्बे हाईकोर्ट से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को जमानत मिल गई थी. हाईकोर्ट ने प्रज्ञा पर लगाई गई मकोका धारा को भी हटा दिया था, जिसके बाद मकोका के तहत जुटाए गए सबूत भी केस से निकाल दिए गए. हालांकि इस मामले में कोर्ट ने कर्नल पुरोहित को जमानत देने से इंकार कर दिया था.

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