मैं यदि सहिष्णु ना होता हिंदू बदनाम नहीं होते, मैं यदि सहिष्णु ना होता तो तंबू में मेरे राम नहीं होते

पाप कभी नहीं करते हम सदा पाप से डरते हम
तुलसी का पूजन करते हैं रोज जलहरि भरते हम

रोज परिंदे अपनी छत पर दाना चुगने आते हैं
बड़े-बड़े उपहासों को भी हम यूं ही सह जाते हैं

ताकत के बल पर हमने किसे सताया ये बोलो
तलवार की धार दिखाकर तिलक लगाया ये बोलो

जिहादी जो मैल था उसको हम ने साफ किया
17 बार मोहम्मद गौरी को भी हमने माफ किया

मैं यदि सहिष्णु ना होता कश्मीर में काटा ना जाता
मैं यदि सहिष्णु ना होता यह भारत बांटा ना जाता

मैं यदि सहिष्णु ना होता गुरुओं पर वार न होते
आर्यावर्त के इस भारत के टुकड़े हर बार नहीं होते

मैं यदि सहिष्णु ना होता तो कोई कलंकी ना कहता
संसद के गलियारों में कोई भगवा आतंकी ना कहता

मैं यदि सहिष्णु ना होता हिंदू बदनाम नहीं होते
मैं यदि सहिष्णु ना होता तो तंबू में मेरे राम नहीं होते

लगता है तुम हिंदुस्तान कंगाल बना कर मानोगे
मेरा सारा भारत कश्मीर बंगाल बनाकर मानोगे

ना तंत्र काम में आता है ना मंत्र काम में आता है
जो शीश काट ले दुश्मन का वह यंत्र काम में आता है..

7 लाख कश्मीरी पंडित, कश्मीर से भगा दिए
तिलक लगाने वालों के भी होश ठिकाने लगा दिये..

मां को काटा बहन को लूटा वह चुपचाप खड़े रहे
गाड़ी बंगले वाले भी राहत शिविर में पड़े रहे..

अरे पंडितों सागर से बहती पतवार उठा लेते
हैं 7 लाख में से 100 ही हथियार उठा लेते..

दुश्मन की छाती पर जाकर सीधे तन जाते तुम
केवल कुछ दिन के खातिर ही परशुराम बन जाते तुम..

पाक का झंडा ना होता इस हिंदुस्तान की माटी में
हर हर महादेव के नारे लगते कश्मीर की घाटी में…

– अमित शर्मा

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