मोदी तो सिर्फ सपने बेचता है!

कल पन्द्रह अगस्त को दो बातें हुई. अध्यापकों ने अपने अपने स्कूलों पर झंडा फहराते हुए पोस्टर्स शेयर किए. कुछ मित्रों ने तो अपने चेहरे केसरिया और हरे कर रखे थे. और कल ही मैंने मोदी का भाषण सुना अपने एक मित्र के घर पहली बार. क्योंकि मेरे यहाँ टीवी ही नहीं. मैं यहाँ मोदी को मात्र संज्ञा रुप में प्रयुक्त कर रहा हूँ. किसी पार्टी, प्रधानमंत्री, नेता के रुप में नहीं. वाकई! बहुत बड़ा जुमलेबाज है मोदी. फेकू है. सपने बेचता है…. छोड़िए अभी उसकी बात.

ये फोटो देखिए. मेरे कोचिंग की है. सिपाही और दारोगा भर्ती की तैयारी करने वाले एकदम गंवार और पिछड़े बच्चे हैं ये. सड़क पर चलते हुए मोबाइल में भोजपुरिया गाने बजाते हैं. लड़कियों को घूरते हैं. जीप और बसों में किराया न देने वाले. किसी से न डरने वाले प्योर बलियाटिक.

मैंने पहले ही दिन एक सपना बेचा इनको. साफ साफ़ कहा कि-मेरी कोचिंग में पढ़ने वाला हर लड़का-लड़की सिपाही है. अभी से खुद को सिपाही मानना शुरू कर दो. और मैं तुम्हारा टीचर नहीं ट्रेनर हूँ. किसी के ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता. सब निरीह ढीले ढाले बैठे रहते हैं. मैं एक लड़के को उठाता हूँ और पूछता हूँ-क्या नाम है तुम्हारा? लड़का बोलता है-उपेन्दर तिवारी….

मेरे बाएँ हाथ का भरपूर थप्पड़ उसके गाल पर पड़ता है-चटाक!! तुरंत फिर पूछता हूँ-क्या नाम है तुम्हारा? लड़का अचानक से टाईट हो जाता है ऊंची आवाज़ में बोलता है-सिपाही उपेन्द्र तिवारी सर!! हाँ, मैं मुस्कुराता हूँ. बेच दिया मैंने सपना. अब लड़का तन कर बैठता है सिपाही की तरह.

अब ये प्रतियोगी छात्र नहीं, सिपाही हैं सिपाही. सड़क पर ठीक से चलने वाले. लड़कियों की सुरक्षा करने वाले. मोबाइल की वाल्यूम आधी रखने वाले. बस की बजाए साईकिल से आने वाले. ये भावना से जुड़े हैं मुझसे. फोटो बहुत साधारण है. पीछे खिड़की है एकदम खुली. बरसात में पानी, गर्मी में धूप और ठंडी में शीत पड़ती रहती है और नीचे ये बैठे रहते हैं. कमरा छोटा पड़ जाता है. सौ बच्चे हैं. कोई अपनी हवाई चप्पल पर बैठता है तो कोई घर से चटाई लिए आता है बैठने के लिए. इन लड़कों की स्टोरी सुनाऊँगा तो आश्चर्य होगा आपको. एक लड़का कोचिंग के बाद राजमिस्त्री का काम करने जाता है. लगभग सभी लड़कियाँ भोर में चार से सात खेतों में काम करती हैं. कोई ठेले पर सामान बेचता है कोई ट्रकों से बोरे उतारता है. कोई पान बेचता है.

साल भर पहले किसी ग्रुप सेन्टर से एक लड़के का फोन आया था-सर यहाँ की दौड़ बहुत कठिन है… लग रहा है मेरा हो नहीं पाएगा. मैंने पूछा था-कौन बोल रहे हो तुम? उधर से लड़का निराश स्वर में बोला था- सर दीपक कुमार. मैंने डांट के पूछा- अबे,कौन बोल रहे हो? तुरंत उधर से जोश में आवाज़ आई थी- सिपाही दीपक कुमार सर!! फिर फोन कट. तीन घंटे बाद फिर उसी लड़के की हाँफती आवाज़ आती है- सर! दौड़ में मैं एक्सीलेंट आया हूँ… मैं मुस्कुराया था. बेच दिया सपना. मेरा फेंका हुआ एक जुमला काम कर गया. यहाँ मैं अध्यापक नहीं होता. बस ट्रेनर होता हूँ.

अनीता सिपाही बन गई है. कुछ दिन पहले ही इसका रिजल्ट आया है. बहुत खुश है. मैं पूछता हूँ कि -अनीता शादी कब करोगी? अनीता मुस्कुरा के बोलती है -सर रिटायरमेंट के बाद. अचानक मेरे एक भरपूर थप्पड़ से गिरते गिरते बचती है. मैं कहता हूँ – बी एस एफ में रिटायरमेंट नहीं होता. शहीद होता है शहीद…. कल पंद्रह अगस्त को अनीता आई थी कोचिंग में. मैंने कहा- अनीता मिठाई तो खिला दो. वो कहती है-“सर! जिस दिन शहीद हो गई उस दिन मेरे घरवालों से खा लीजिएगा.” देखा!! मैंने बेच दिया सपना. वहाँ मुस्कुरा देता हूँ पर घर आकर खूब रोता हूँ. मेरी बच्ची है अनीता. मुझसे उम्र में बस चार साल छोटी है तो क्या हुआ. भगवान न करें ऐसा हो. मैं वाल पर तिरंगा नहीं लगाता. चेहरे को केसरिया हरा नहीं करता…. सपने बेचता हूँ…देश के नाम.

अब जहाँ मैं अध्यापक होता हूँ वहाँ की देखिए. ये महेंद्र है. अति से भी अति साधारण परिवार का. अभी एम ए अंतिम वर्ष में है बी एच यू में. पढ़ने में भी साधारण. बोलता था तो आठवीं के बच्चे की तरह. जब ये बी ए प्रथम वर्ष में था तब मैंने इसे एक सपना बेचा था. नेट/जेआरएफ का सपना. लौंडे ने एक दिन फोन किया -सर! बी ए लास्ट ईयर में नेट/जेआरएफ नहीं दे सकता क्या? मैं मुस्कुरा देता हूँ. मैंने बेचा था सपना. और एम ए में पहला सेमेस्टर पास करते ही इसने नेट निकाल कर दिखाया भी. जेआरएफ बस कुछ नंबर से रह गया. सैकड़ों ऐसे बच्चों को सपने बेच चुका हूँ जो अलग अलग जगहों पर सपनों में उलझे हैं.

मैं आपको टीचिंग थ्योरी और शिक्षण सूत्र नहीं बताऊँगा. इस पर तो हज़ारों किताबें हैं. मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि सपने दिखाइए. अगर आप प्राथमिक शिक्षक हैं तो तो बच्चे के माता पिता को सपना दिखाइए कि आपका बच्चा आई ए एस है. टीचर है. क्लर्क है. फिर देखिए-मां बाप दो रोटी कम खाएंगे लेकिन बच्चे का सपना टूटने नहीं देंगे. आप अध्यापक नहीं, बस माँ बाप हैं तो अपने बेटे को बेचिए सपना. भाई हैं तो बहन की तरफ फेंक दीजिए जुमला. हाँ एक बात यह कि, सपना बच्चे की पूरी जांच करके ही दिखाया जाए. ऐसा न हो कि वो अध्यापक बनने के लिये पैदा हुआ हो और आप उसे एस डी एम बना दें. तो फ्रस्टेड हो जाएगा वो. सपने टूटते भी हैं. इसलिये उसे तुरंत दूसरा सपना दिखाइये. उसे बताइये कि सपने तो टूटते ही नहीं, नींद टूटती है.

अब अपनी बात करता हूँ. क्या लगता है आपको असित बहुत विद्वान है. घोल के पिला देता है बच्चों को. नहीं. आप घोड़े को नदी तक ले जा सकते हैं उसे पानी नहीं पिला सकते. इलाहाबाद दिल्ली नहीं पढ़ता. मेज कुर्सी नहीं पढ़ती. लड़का पढ़ता है. मैं तो बस सपने दिखाता हूँ. जुमले फेंकता हूँ. इस अदा से कि मेरा बच्चा दौड़ ही जाता है उन सपनों के पीछे. मैं बस यह देखता रहता हूँ कि वो मेरे जुमले की असर से बाहर तो नहीं निकल रहा न!

क्या लगता है आपको! मोदी बहुत विद्वान है. नोट छाप देगा. खेतों में आकर जादू से उत्पादन कर देगा? नहीं. खेतों में काम किसान करेगा. फैक्ट्रियों में कर्मचारी करेंगे. स्कूलों में अध्यापक पढ़ाएंगे. मोदी तो बस जुमले फेंकता है. फेंकू है… मोदी तो सिर्फ सपने दिखाता है.

मैं वोट की बात नहीं कर रहा. आप पीस पार्टी को वोट दें. सपा बसपा राजद कांग्रेस निर्दल नोटा किसी को भी दें. आपकी प्रतिबद्धता अपनी जगह ही है. बस यह कहना चाहता हूँ कि -मोदी के सपनों को मिटने मत दीजिये. खूब सपने देखिए और दिखाइये. क्योंकि पाश ने भी कहा है-सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना.

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