दोगलेपन का इससे बड़ा उदाहरण कहीं देखा है आपने?

जम्मू-कश्मीर के महबूबा मुफ्ती और फारुक अब्दुल्ला ने पूरे देश के मीडिया के सामने चिल्ला चिल्लाकर कहा कि अनुच्छेद 35A और 370 को छेड़ा तो वो होगा जो कभी नहीं हुआ. जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मामले पर अपनी धुर विरोधी महबूबा के सुर से सुर मिलाते हुए केन्द्र सरकार पर जमकर निशाना साधा.

अब्दुल्ला ने केन्द्र सरकार को आगाह करते हुए कहा है कि अगर अनुच्छेद 35A और 370 के साथ छेड़छाड़ की गई तो इसका अन्जाम बहुत बुरा होगा, क्योंकि इसके बाद कश्मीर में अब तक का सबसे बड़ा विद्रोह होगा और यहां वो होगा जो अब तक कभी नहीं हुआ. इन दोनों ने 35A और 370 को संविधान द्वारा उनको दिया गया विशेषाधिकार बताया और बार बार संविधान और कानून की दुहाई दी.

उत्तरप्रदेश के समाजवादी पार्टी के नेता माविया अली ने 15 अगस्त, स्वतन्त्रता दिवस पर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत गाने की अनिवार्यता को लेकर खुलेआम न्यूज़ चैनल पर कहा कि संविधान से पहले उसके लिए ”मजहब” है और वो स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राज्य के सभी मदरसों में “ध्वजारोहण” और “राष्ट्रगान” कर उसकी “वीडियोग्राफी” कराने के सरकारी फरमान की कड़ाई से निंदा करता हैं. माविया अली ने ट्वीट कर कहा कि “उसके लिए पहले मजहब हैं फिर हिंदुस्तान. किसी भी संवैधानिक प्रावधान से उनके ”मजहब” का टकराव होता है, या फिर किसी भी कानून से “मजहबी उसूलो” पर प्रभाव पड़ता है तो उस कानून को मानने को हम तैयार नहीं हैं” …माविया ने संविधान और कानून को पूरी तरह खारिज कर मजहबी उसूलो को सर्वोपरी बताया. उसने आगे कहा कि हम देश के मालिक है, नौकर नहीं.

उल्लेखनीय है कि माविया अली 2016 मे देवबंद से कांग्रेस के टिकट पर उपचुनाव लड़कर विधायक बना था. बाद में 2017 में कांग्रेस को अलविदा कह वह सपा में चला गया… हालांकि वह इस बार यहां से चुनाव हार गया.

एक जैसी 2 घटनाएं, जो इसी सप्ताह हमारे देश में घटी है, पहली में “संविधान” की “दुहाई” दी जा रही हैं, बार बार उसका गुण गान किया जा रहा है क्योंकि यहां संविधान और कानून उनके अलगाववादी एजेंडे का तुष्टिकरण करता है… लेकिन दूसरी जगह “संविधान” को पूरी तरह खारिज किया जा रहा है, क्योंकि यहां उनका “विघटनकारी एजेंडा” पूरा नहीं हो रहा है.

दोगलेपन का इससे बड़ा उदाहरण कहीं देखा है आपने?

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