पटना को महामारी का इंतजार है!

पटना के कंकड़बाग से गोला रोड की दूरी लगभग 15 किलोमीटर है. इसे तय करना जहन्नुम की आग से गुजरने के बराबर है. अभी बारिश हो रही है, आधा बिहार बढ़ की चपेट में ऑलरेडी है और राजनीति के गिद्धों ने राहत के नाम पर होने वाली लूट के लिए, अपनी चोंच और पंजे तेज़ कर लिए हैं..

….पटना में कीचड़, गड्ढों, कूड़े, गंदगी,मक्खी और मच्छर का साम्राज्य है. यहां हैजा जब तक नहीं फैल रहा, तभी तक अचरज है और यहीं आकर भगवान पर भरोसा होता है. यहीं आस्तिकता दृढ़ होती है.

सुशासन बाबू उर्फ नीतीश कुमार ने एक वक्त कहा था,- ‘बिहार अभागा और बीमारू नहीं, सौभाग्यशाली प्रदेश है’. बिल्कुल जनाब, एक तो भारत, उसमें भी बिहार…इससे अधिक सौभाग्य किस प्रदेश का होगा.

जहां, सबसे अधिक भूखे, अधनंगे, शोषित, पीड़ित लोग रहते हैं, उस प्रदेश से अधिक सौभाग्य भला किसका होगा?

जिस प्रदेश के 60 फीसदी से अधिक दरिद्रनारायण गरीबी रेखा के आसपास विचरते हों, भला उससे अधिक सौभाग्य किसका होगा?

जिस प्रदेश के लाखों बच्चे-बच्चियों को अपना पैसा, इज्जत और भविष्य दांव पर लगाकर बाहर पढ़ाई करने जाना पड़ता हो, क्योंकि आपने, आपके बड़े भाई ने और उनसे भी पहले माननीय जगन्नाथ मिश्र ने प्रदेश की प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा की कमर तोड़ दी, मटियामेट कर दिया, भला उससे अधिक सौभाग्यशाली और स्वस्थ प्रदेश कौन होगा, मालिक??

जहां एनटीपीसी को धमकी देनी पड़ी हो कि अगर उसके ऑफिसर्स से उगाही और हफ्ता वसूली बंद न हुई, तो वह अपना बोरिया-बिस्तर समेट लेगी, भला उससे अधिक सौभाग्यशाली प्रदेश कौन होगा??

छह महीने बाढ़ मे आधा हिस्सा और छह महीने सुखाड़ में जो प्रदेश डूबा रहता हो, जहां बाकायदा बाढ़ राहत और सूखा राहत प्रदेश के कर्मचारियों, नेताओं, दलालों (वैसे इस शब्द की अलग से ज़रूरत ही क्या) और मुफ्तखोरों की कमाई का सबब हो, भला उस बिहार से अधिक सौभाग्य किस प्रदेश का होगा??
आप के निकलने पर ट्रैफिक डायवर्ट हो जाता है, इसलिए आपको नहीं दिखता कि राजा बाजार से सचिवालय की तीन-चार किलोमीटर की दूरी तय करने में आपकी राजधानी में जनता को 30 से 45 मिनट लगते हैं. इससे अधिक सौभाग्य क्या होगा??

पटना स्टेशन पर उतरते ही, महावीर मंदिर के पास दुर्गंध का ज़ोरदार भभका, कूड़े का वह पहाड़, सड़कों की वह अराजकता और दमघोंटू हवा, इससे बड़ा सौभाग्य भला बिहार के कूढ़मगजों को और मिल ही क्या सकता है??

यह केवल पटना की बात है, अभी मधेपुरा, सुपौल, दरभंगा, अररिया, बेतिया, मोतिहारी, झंझारपुर, सीवान, गोपालगंज, मढ़ौरा, बेगूसराय, लखीसराय, मधुबनी, सुपौल, पूर्णिया, सहरसा, छपरा आदि-इत्यादि के सौभाग्य का तो जिक्र ही छोड़ दीजिए, कृपानिधान!

शिक्षा, रोज़गार, रिहाइश, सड़कें, बिजली, कानून-व्यवस्था- इन सब के मामले में बिहार से बड़ा सौभाग्य भला किसका होगा??

बिहार को 1990 का सौभाग्य सौंपने के लिए बहुत धन्यवाद!
अपने सौभाग्य के लिए बिहारी जमूरा बजाएगा ताली, बोलेगा सुशासन बाबू की जय, बड़े भाई की जय……

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