अंसारी के जाते ही राज्यसभा टीवी के सीईओ सप्पल ने दिया पद से इस्तीफ़ा

राज्यसभा सीईओ गुरदीपसिंह सप्पल ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. दो दिन से गोरखपुर प्रकरण के चलते ये खबर पटल पर नहीं आ सकी. चैनल की बहसिया लिस्ट में शामिल न हो सकी. फेसबुक की पोस्ट पर नहीं उतरी. एक मामूली खबर दिख रही होगी बंधुओं. इतनी मामूली कि 37 बच्चों की मौत की खबर के आगे इसकी बात ही नहीं होनी चाहिए. लेकिन सप्पल की खबर तो केवल ‘टिप ऑफ़ आइसबर्ग’ है.

ऑफिस ऑफ़ प्रॉफिट मामले में आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों को मुश्किल में लाने वाले वकील प्रशांत पटेल ने नया मोर्चा पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के ख़िलाफ़ खोलकर उनकी विदाई ख़राब कर दी. पटेल ने अंसारी के अधीन चल रहे राज्यसभा टीवी में बड़े घोटाले का आरोप लगाया है. अंसारी का मुस्लिम वाला बयान बहुत सोचसमझकर दिया हुआ है. यदि कल को जाँच बैठी तो उनपर उंगली ज़रूर उठेगी और तब वे बचाव में मुस्लिम कार्ड खेल सकेंगे.

अब फिर सप्पल पर आते हैं. सप्पल एक समय अंसारी की सुरक्षा सेवा में हुआ करते थे. अंसारी से प्रगाढ़ता उन्हें भारत सरकार के सम्मानीय पद तक ले गई. सप्पल का त्यागपत्र ठीक अंसारी के निवृत होने के बाद आया है. इसके बड़े गहरे मायने हैं. या तो अंदरखाने जांच शुरू हो चुकी या होने को है.

प्रशांत पटेल ने कहा है कि राज्यसभा टीवी में कई कांग्रेसी और वामपंथी विचारधाराओं के पत्रकारों की या तो नियुक्तियां हुईं या फिर उन्हें गेस्ट के तौर पर बुलाया गया. किसी से प्रोग्राम बनवाए गए. इसके एवज में उन्हें मोटा भुगतान किया गया. एंकर और गेस्ट एंकर के नाम पर कांग्रेस के तनखैया पत्रकारों पर लाखों-करोड़ों रुपये लुटाए जा चुके हैं. यहीं नहीं 14 करोड़ रुपये से राग देश नामक फिल्म भी राज्यसभा टीवी की ओर से बनाई गई. खास बात है कि इस फिल्म के प्रमोशन के नाम पर आठ करोड़ लुटाए गए.

राग देश जैसी बेहतरीन फ़िल्म का इस्तेमाल एक नया निशाना साधने के लिए किया गया. राग देश पहले मई में रिलीज होने वाली थी लेकिन डेट बदल दी गई. अगली डेट जुलाई की थी जिस दिन मधुर भंडारकर की फ़िल्म ‘इंदू सरकार’ प्रदर्शित होने वाली थी.

योजना ये थी कि यदि मधुर की फ़िल्म खुद से न पिटे तो राग देश उसके दर्शक तोड़ दे. मधुर की फ़िल्म खुद से ही पिटी और बाकी की घेराबंदी ‘राग देश’ से करवा दी गई. इस फ़िल्म पर दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘फिल्म ‘इंदु सरकार’ एक काल्पनिक फिल्म है. ‘इंदु सरकार’ और ‘राग देश’ की तुलना नहीं हो सकती है. एक फिल्म काल्पनिक है, तो दूसरी देशभक्ति के लिए प्रेरणा देती है.’

‘भाजपा शासित राज्य में एक नलका भी टूट जाए तो टीवी चैनलों का मेला सज जाता है. अखबार रंग दिए जाते हैं. एक झंडू से चेज को राष्ट्रीय समस्या बता दिया जाता है… लेकिन, लेकिन, लेकिन

कांग्रेस के शासनकाल में हुआ एक बड़ा घोटाला आप न किसी चैनल में देखते हैं, न अख़बार में सप्पल का नाम पढ़ पाते हैं. मीडिया अंसारी जी की विदाई छाप रहा तो प्रशांत पटेल का आरोप क्यों नहीं.

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