होर्डिंग न रहे तो कैसे कायम रहेगा भिया का आतंक!

बहुत साल पहले इंदौर के राजबाड़ा पर कुछ लोगों ने एक होर्डिंग लगाया गया. रंजन पँवार ने ये होर्डिंग बनाया था. इसमें शहर के कुत्तों को जन्मदिन की बधाई दी गई थी. रंजन बताते हैं कि “इस होर्डिंग की योजना आड़ा बाजार के ओटले (चबूतरा) पर रात्रि बैठक में बनी थी. भाजपा के दो नेता इसमें सहयोगी थे. डिजाइन और आईडिया मेरा था, लगवाया उन्होंने ही था”.

शहर की नेता-नगरी को ये व्यंग्यात्मक विरोध रास नहीं आया था. कांग्रेस हो या भाजपा, शहर के चौराहे पर इनके नेताओं के होर्डिंग आज तक कोई नहीं हटा पाया. जन्मदिन से लेकर सावन तक की बधाइयां चिंदी-चिंदी होकर मार्ग संकेतकों पर अनंत काल तक लटकती रहती है.

रंजन पँवार द्वारा परिकल्पित और डिज़ाइन किया हुआ चर्चित होर्डिंग

शहर का कोई चौराहा इंदौरी नेता-नगरी से मुक्त नहीं है. किसी चौराहे पर पंजा तो कहीं कमल का अवैध कब्ज़ा है. कुछ साल पहले इस पर खोजी खबर बनाई थी जो नेताओं के चमचे एक संपादक ने नहीं छपने दी थी.

उस वक्त मध्यप्रदेश में एक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को नेता परेशान किये दे रहे थे. कंपनी के अधिकारी ने बताया कि एक बार इनके होर्डिंग उतरवा दिए तो आधी रात को कुछ गुंडे घर में घुस गए और धमकी दी कि दोबारा ऐसी हिमाकत मत करना.

रंजन पँवार द्वारा परिकल्पित और डिज़ाइन किया हुआ एक अन्य होर्डिंग

ये स्वच्छ इंदौर है लेकिन होर्डिंग मुक्त आज तलक नहीं हो पाया. एक नेता ने कहा था कि सावन की बधाई न देंगे तो लोग पहचानेंगे कैसे यानि दूसरे शब्दों में ‘भिया का आतंक कैसे कायम रहेगा’. इस होर्डिंग राजनीति को कोई खत्म करने का इच्छुक नहीं है क्योंकि कांग्रेस-भाजपा दोनों की सहमति है.

ये वीडियो मित्र Sanjay Sidhaye ने बनाया है. 15 अगस्त से ठीक पहले वे इंदौर वासियों से अपील कर रहे हैं कि इस आजादी दिवस पर शहर को होर्डिंग परंपरा से आज़ादी चाहिए.

मैं फिर दोहराता हूँ कि शहर के अख़बार इस गंदी परंपरा को मौन सहमति देते आए हैं और देंगे. और दूसरी बात अपने शहर के लिए आपकी जिम्मेदारी बनती है. ‘मेरे शहर को गंदा मत करो’.

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