जापानी इंसेफलाइटिस-1 : मरीज़ पूर्वांचल में, AIIMS रायबरेली में ले उड़ीं मैडम

जापानी इंसेफलाइटिस यानी JE (Japanese Encephalitis) नामक बीमारी से सम्बन्धित कोई भी बात हो तो 1983 घूम आता है पटल पर. इसी वर्ष हमारी दादी का JE से देहांत हुआ था. गोरखपुर के सदर हस्पताल में पूरे महीने भर्ती होने के बाद जब गाँव वापस आये तो मानसिक रूप से विक्षिप्त दादी को साथ लेकर. जिनको चलने, उठने, बैठने, खाने, पीने, नित्यकर्म का कोई होश नहीं था. जो कब कहाँ पहने कपड़े उतार के फेंक दें, किधर भी निकल जाएं, बिस्तर और कपड़े खराब कर दें… हस्पताल से वापस आने के लगभाग तीन माह बाद आखिर एक दिन वो चल बसीं.

उस वर्ष गाँव में चार बच्चे और दो अन्य बुजुर्ग भी JE से मरे थे. JE का इलाज कराते कराते गाँव वालों को JE होने के कारण पता चल गए थे… तब इससे निपटने की कोशिश चालू हुई… गाँव का घूर सीमाओं और खेतों में भेजा गया और आगे से गोबर, कूड़ा आदि गांव के बाहर फेंका जाने लगा, गाँव के अंदर के तालाब और पानी इकठ्ठा होने के जगह भर दिए गए थे.

इसके बाद कई गांवों में जा-जा कर दादाजी और गाँव के अन्य लोग JE से बचाव पर पंचायत किया करते थे… मच्छरदानी का इस्तेमाल करना सबने शुरू कर दिया था… हमारे गाँव में इसके बाद किसी को JE नहीं हुआ… JE के खिलाफ मोर्चा खोले जाने की वजह से 1994 या 1995 में हमारे परिवार के साथ पूरे गाँव की निकटता गोरखनाथ मंदिर में नए-नए आये योगी आदित्यनाथ से हुई …

योगी आदित्यनाथ ने JE के खिलाफ काम चालू किया और पहली बार ज़मीनी तौर पर किसी नेता या धर्मगुरु ने JE के खिलाफ काम करना शुरू किया था. चूँकि हमारे गाँव में काफी लोग इसके खिलाफ एक्टिव हैं तो कई लोगों को इन छोटे-छोटे पंचायतों को कराने की जिम्मेदारी दी जाती थी. हमारे गाँव के लोग गोरखपुर से देवीपाटन, तमकुही, नेपाल के बीरगंज और बिहार के बेतिया और सीतामढ़ी तक जाते थे इन पंचायतों को करने के लिए.

योगी आदित्यनाथ ने पहली बार इसको 1998-99 में संसद में उठाया… अटल जी की सरकार थी और गोरखपुर में पहली बार JE फण्ड आया… पहले NIV – National Institute of Virology, पुणे से लोग आते थे JE से सीजन में और सैंपल ले जाते थे. ये मामला संज्ञान में आया और अटल सरकार ने गोरखपुर में ही NIV की ब्रांच खोलना मंजूर कर दिया.

गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज के दो कमरों में सन 2000 में NIV शुरू हुआ… परन्तु उदासीन राज्य सरकारें NIV के लिए जगह नहीं दे सकी और आज भी गोरखपुर का NIV बस उन दो कमरों में ही चलता है जोकि एक तरह से सैंपल कलेक्शन सेंटर भर रह गया है.

फिर आया समय जब उत्तर प्रदेश में AIIMS खोलने की बात चली. गोरखपुर में योगी जी ने इस AIIMS को लाने के कारण उस समिति संसद में बताए. गोरखपुर केंद्र है पूरे पूर्वांचल का, JE नमक महामारी से पीड़ित, पूर्वांचल, तराई, बिहार का चम्पारण इलाका, या वैशाली और कभी-कभी मिथिलांचल तक के मरीज़ गोरखपुर ही आते हैं, वो चाहे JE हो या अन्य बीमारी… गोरखपुर का BRD कम से कम 50 जिलों का बोझ उठता है. गोरखपुर की जनता साथ थी योगी के …

AIIMS को गोरखपुर लाने के लिए हम गोरखपुर से निकले शहर में बसे लोग पहली बार योगी जी से मिले. योगी जी ने बताया कि आसान नहीं है, राजनीति चल रही है. आप लोग अपने-अपने स्तर से पूर्वांचल के सांसदों और सरकार में मंत्री लोगों से मिलिए उनपर दबाव बनाइये, हम संसद में आपकी और अपनी बात रखेंगे.

इसके बाद हम लोगों ने खलीलाबाद के बसपाई सांसद (पूर्व सपाई), कुशीनगर के कांग्रेसी सांसद, महराजगंज, देवरिया, बहराइच के कांग्रेसी, बांसगांव के कांग्रेसी सांसद आदि से कई बार मुलाकात की. कभी लखनऊ के VIP गेस्ट हाउस, कभी दिल्ली में सांसदों के आवास, कभी लोकसभा के इलाकों में…

हम लोगों को पता चल चुका था कि AIIMS गोरखपुर नहीं आएगा… मुझे याद है कि एक अंतिम प्रयास के लिए हम लोग दिल्ली के ले मेरीडियन होटल वाले गोल चक्कर के पास के बंगले में रहने वाले सांसद के घर गए…

हम लोगों ने सांसद को समझाने की कोशिश की कि रायबरेली को नहीं बल्कि गोरखपुर को AIIMS का जरूरत है. रायबरेली से 72 किमी पर SGPGI, 86 किमी पर KGMC और अन्य हॉस्पिटल जैसे राम मनोहर लोहिया, बलरामपुर, आदि पहले से मौजूद हैं. इधर JE जैसे महामारी का प्रकोप भी नहीं. गोरखपुर 50 जिलों को संभालता है.

एक और कांग्रेसी सांसद आये जो अब भाजपा की शोभा बढ़ा रहे हैं… उन्होंने कहा कि मरीज़ रायबरेली आ जाएगा… मैंने ही जवाब दिया था कि देवरिया के मरीज को गोरखपुर आने में 1 घण्टा जबकि राय बरेली आने में 6 घंटा लगेगा तब तक वो मर सकता है. मरीज के लिए एक एक मिनट कीमती है…

बात बढ़ती जा रही थी और हम लोगों का गोरखपुर पर बात करना उन सांसद लोगों को असहनीय हो चुका था… एक सांसद जी ने साफ़ कहा कि मैडम का कहना है राय बरेली AIIMS, तो बात ख़त्म… चलो भागो यहाँ से…

उस दिन रात 9 बजे बेइज़्ज़त होकर हम पांच लोग पैदल ही चुपचाप बिना कुछ बोले पहाड़गंज होटल आ गए… अगले दिन फिर बेइज़्ज़त होने के लिए पी एल पूनिया, आर पी एन सिंह और निर्मल खत्री के यहाँ गए… फिर सारी बेइज़्ज़ती सहने के बाद… उसी दिन वापस हम लखनऊ आ गए और गोरखपुर के लोग आगे बढ़ गए.

दिन याद नहीं लेकिन लेकिन उसी समय संसद के कार्यसमय में AIIMS राय बरेली घोषित हो चुका था… बसपा और सपा सांसदों ने टेबल बजा के स्वागत किया था… वो हर ताली पूर्वांचल को AIIMS की जरूरत समझने वाले हर इंसान की छाती पर लात मारने जैसे लग रही थी…

अखिलेश यादव सरकार ने संसद का वो सत्र समाप्त होने के पहले ही AIIMS रायबरेली के लिए 200 एकड़ ज़मीन आवण्टित भी कर दी थी… अखिलेश सरकार के पूर्वांचल के मंत्री इस कदम पर लहालोट हो रहे थे. इन सबके द्वारे हम लोग AIIMS को गोरखपुर लाने की दरख्वास्त ले कर जा चुके थे… और बड़ी इज़्ज़त से हर बार बेइज़्ज़त होकर भगाए जा चुके थे.

2014 में समय बदला और नई सरकार ने आते ही AIIMS गोरखपुर की घोषणा कर दी… AIIMS रायबरेली मामले में संसद का सत्र समाप्त होने से पहले 200 एकड़ की जमीन सोनिया गाँधी के चरणों में अर्पण करने वाले अखिलेश यादव ढाई वर्ष तक, यानी जब तक जनता ने बाहर का रास्ता नहीं दिखाया, तब तक गोरखपुर में AIIMS के लिए जमीन नहीं खोज पाए.

10 अगस्त की रात JE से मरने वाले बच्चों और वयस्कों की लाशें विटामिन और प्रोटीन बन कर आयीं कांग्रेस/ सपा/ बसपा के लिए… प्रोटीन उस कांग्रेस का जिसके गोरखपुर से ही दो केंद्रीय मंत्री और पूर्वांचल के 5 सांसद गोरखपुर की जगह रायबरेली में AIIMS बनवा के मैडम के प्यारे चरणचम्पू बन चुके थे…

विटामिन सैफई में बॉलीवुड के हीरो और हीरोइन नचा के करोड़ों फूकने वाले सपाई जिन्होंने गोरखपुर में AIIMS नहीं बनने दिया और BRD मेडिकल कॉलेज का पैसा तक रोक दिया…

और NRHM घोटाले को अंजाम देकर गरीबों के इलाज का पैसा हड़पने वाली बसपा के लिए ये लाशें प्रोटीन और विटामिन दोनों हैं… उफ़ इन बदमाश लोगों के मगरमच्छी आँसू…

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