शर्म करो कि सब पहचानती है जनता

गोरखपुर मेडिकल कालेज की शर्म डॉ. कफील खान और उत्तर प्रदेश में भूतपूर्व हो चुके समाजवाद, अफसरशाही, नेतागिरी की मिली-जुली रिश्तेदार छाप कव्वाली.

पूर्वांचल के कोढ़, जापानी इंसेफेलाइटिस से हुई दर्दनाक मौतों पर… स्थापित मीडिया के तमाम वैचारिक गाभिन… दार्शनिक मादाओं ने जिस तरह आपराधिक चरित्र के ऑक्सीजन सिलेंडर चोर, सज़ायाफ्ता फर्जी मेडिकल प्रवेश परीक्षार्थी, सामूहिक बलात्कार के आरोपी, भू-माफिया गिरोहबाज़… के सिंदूर से खुद को सुहागिन बनाना शुरू किया… दशकों से इस क्षेत्र की इस भीषण स्वास्थ्य त्रासदी पर चिंतन की बजाय माहौल राजनैतिक नारेबाजी सा दिखने लगा.

शीघ्रपतन के शिकार तथाकथित प्रचंड राष्ट्रवादियों ने भी हमेशा की तरह गिरोहों के खिलौनों से खेलना शुरू कर दिया. सब राजनीति थी और है… सिवाय मासूम जिंदगियों के हमारे बीच से असमय चले जाने के. इन मासूम मौतों के जिम्मेदारों से कोई समझौता नहीं. पूर्व प्रिंसिपल डॉ राजीव मिश्रा, कफील सहित बाकी जिम्मेदारों के खिलाफ 302 का मुकदमा और वाजिब सज़ा होनी ही चाहिए.

लेकिन यहां राजनीतिक रिश्तों की कव्वाली कैसे है? आइये लौटते हैं गोरखपुर की शर्म कफील पर.

ऊपर दी गई तस्वीर में शर्म कफील… उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी जावेद अहमद के साथ बाहैसियत रिश्तेदार दिख रहा है, जिसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. पूर्व डीजीपी से हाथ मिलाते तस्वीर के तीसरे शख्स को पहचानते हैं आप?

मनुरोजन यादव, जो गोरखपुर समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष रह चुके हैं. परिचय मात्र इतना ही नहीं, इनकी पत्नी श्रीमती गीतांजलि यादव वर्तमान गोरखपुर जिला पंचायत अध्यक्ष हैं.

आइये ज़रा इस अवैध रिश्तेदारी के और पीछे चलें… जनवरी 2016 में तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार ने यह निर्णय किया कि गोरखपुर जिला पंचायत का अध्यक्ष पद उसे चाहिए. मामला कड़ा था क्योंकि जिला पंचायत सदस्यों का बहुमत दूसरे प्रत्याशी अजय यादव के पास था.

समाजवादी हाईकमान ने गोरखपुर के प्रशासन को हुक्म दिया कि गीतांजलि यादव को जिताना है. लेकिन समीकरण देख कर तत्कालीन जिलाधिकारी रंजन कुमार ने समाजवादी पार्टी प्रत्याशी को जिताने में असमर्थता जाहिर कर दी.

मात्र दो दिनों के भीतर 4 जनवरी 2016 को डीएम रंजन कुमार गोरखपुर से हटा दिए गए. और तत्कालीन सपा मंत्री उर्फ गोरखपुर प्रभारी राजकिशोर सिंह की ठेकेदारी में उनके रिश्तेदार और नए नियुक्त ओ. एन. सिंह को समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को जिताने की मजदूरी में लगाया गया.

मैदान में महज दो प्रत्याशी थे और बहुमत दूसरे खेमे के पास था लेकिन जिलाधिकारी ने दूसरे प्रत्याशी अजय यादव के पक्ष में पड़े 11 जिला पंचायत सदस्यों का वोट इनवैलिड उर्फ अवैध घोषित करते हुए तस्वीर में दिख रहे मनुरोजन यादव की पत्नी और वर्तमान गोरखपुर जिला पंचायत अध्यक्ष गीतांजलि यादव को विजयी घोषित कर दिया.

गोरखपुर की धरती से इस महान अनुराग का इनाम मिला ओ. एन. सिंह को और वे गोरखपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रहते हुए अभी कुछ महीनों पहले रिटायर हुए.

वह कफील… जो सरकारी सेवा में रहते हुए… भाई राहुल गांधी से प्रियंका गांधी मैम को विधानसभा चुनावों में गोरखपुर जरूर लाने का आग्रह करता बरामद होता है. वह कफील जो अखिलेश यादव को सार्वजनिक राजनीतिक मुखबरियां करता बरामद होता है : वही कफील गोरखपुर मेडिकल कालेज की त्रासद मौतों के बीच खबर के ठेलों से लेकर तमाम सस्ते-महंगे गिरोहबाज़ों की मांग का सिंदूर बना नजर आता है!

क्या कहते हैं? क्या यह लाशों पर उड़ते राजनैतिक गिद्धों का महाभोज नहीं है? मौत की देहरी पर राजनीतिक खेल बंद करो… शर्म करो कि जनता सब पहचानती है.

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