गिरोहबाज़ों को तो ये ही पता है कि ऑक्सीजन सिलेंडर है इंसेफेलाइटिस का इलाज

गोरखपुर ने एम्स जो मांगा था, वर्तमान मुख्यमंत्री ने गोरखपुर सांसद के तौर पर एम्स की जो पैरवी की थी, और वर्तमान केंद्र सरकार.. ने जो एम्स दिया गोरखपुर को : हम सबको यह पता था कि दशकों से इंसेफेलाइटिस उर्फ जापानी बुखार का इलाज… ऑक्सीजन नहीं है.

हम यह भी जानते हैं कि पूर्वांचल, बिहार के एक बड़े हिस्से और नेपाल की तराई इस जानलेवा दंश को झेल रही है दशकों से, सह रही है मौतों को. इन सभी का एकमात्र आसरा गोरखपुर मेडिकल कालेज ही है अभी तक : यह भी हमें पता है.

हम सब यह भी जानते हैं कि इंसेफेलाइटिस का मच्छर धान के खेतों से पैदा होकर, पहले सूअर को काटता है, वहां से सफर कर उसे अपने दुर्भाग्य को ढोता कोई बच्चा… कोई किशोर, कोई जवान मिल जाता है इस जानलेवा बीमारी को देने के लिए.

हम यह सब जानते हैं क्योंकि, हम पूर्वांचलवासियों ने इस दंश को, इससे होने वाली मासूम मौतों को साल दर साल झेला है अपने आस-पास, जानने वालों, रिश्तेदारों के बीच : आंसू बहाए हैं, शव यात्राओं में शामिल हुए हैं. सड़कों पर उतर एम्स मांगा है, हस्ताक्षर अभियानों में हिस्सा लिया है.

लेकिन इसी देश के कुछ पाखंडियों को जानलेवा इन्सेफेलाइट्स बीमारी का नाम भले बीती 11 तारीख को पता चला हो : लेकिन इन दूषित मानसिकताओं, गिरोहबाजों को यह बात अभिमन्यु की तरह अपने माँ के गर्भ से पता है कि : जेई उर्फ जापानी इंसेफेलाइटिस का इलाज… ऑक्सीजन सिलेंडर है.

हे आदरखोरों! गोरखपुर को आजादी के बाद से 2014 तक एम्स जैसा उच्च मेडिकल शोध संस्थान और सुविधायुक्त अस्पताल क्यों नहीं मिला? इस प्रश्न का उत्तर यदि जन्म उर्फ पैदा होने के बाद भी मालूम हो… तो कृपा करिये न बताने की!

मुझसे निश्चिंत रहिएगा… मैं अस्सी के दशक से आज तलक इंसेफेलाइटिस से हुई मौतों के आंकड़े न दूंगा, न पूछना चाहूंगा. हां… गोरखपुर की माटी की पैदाइश होने के हक की ज़मीन से यह सवाल जरूर पूछूंगा, अपने आंसुओं को पोछते हुए.

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