जानिये क्यों आवश्यक है यज्ञ की सनातनी परंपरा

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हर छोटी बीमारी में डॉक्टर के पास दौड़ लगाने वालों को घरेलू उपचार की सलाह दो तो कहते हैं, पहले की बीमारियाँ अलग थीं तो उनका इलाज भी अलग होता है. आजकल की बीमारियों पर घरेलू उपचार लागू नहीं होते.

लेकिन उन्हें ये नहीं पता पुरातन काल में ये बीमीरियाँ क्यों नहीं होती थी क्योंकि उस काल में हमारे यहाँ घर घर में ही नहीं, राज्य स्तर पर भी छोटे बड़े हवन यज्ञ होते रहते थे. जिसकी वजह से कोई बीमारी हमारे देश की सीमा रेखा में प्रवेश के पहले ही चारों खाने चित्त हो जाती थी. मात्र रोग निवारण ही नहीं, वर्षा लाने, अनाज की अच्छी उत्पत्ति, लक्ष्मी वैभव की प्राप्ति से लेकर लेखन विद्या और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्ति तक के लिए हवन पूजन घर घर में किया जाता था.

जैसे ही हमने हमारी परम्परा को भूला दिया हमारी परम्पराओं और संस्कृति से जलने वाले विदेशी आक्रान्ताओं को बीमारी के कीटाणु हमारे देश में पहुंचाने में सुविधा हो गयी. AIDS नामक घृणित बीमारी ने हमारे देश में कैसे प्रवेश पाया किसी से छुपा नहीं है.

तो आइये हम प्रतिज्ञा लें कि हमारे यज्ञ हवन की परम्परा को हम दोबारा उसी स्तर ले आएँगे कि कम से कम अब कोई नई बीमारी हमारे देश की सीमा रेखा में प्रवेश ना कर पाए और जो बीमारियाँ पहले ही घर कर चुकी हैं उनको भी ख़त्म करने का प्रयास किया जाए.

और वैसे भी हमारे लिए अग्नि हमेशा से पूजनीय रही है. अग्नि के मानस देवता का हमारे कई ऋषि मुनियों ने साक्षात्कार किया है. और मात्र शारीरिक व्याधियां या बीमारियाँ दूर करने के लिए ही नहीं दैवीय शक्तियों के आह्वान के लिए भी यज्ञ हवन उतना ही आवश्यक है. ठीक उसी तरह जैसे किसी मुद्दे पर सोशल मीडिया पर हलचल मच जाने पर सारे राष्ट्रवादी एक साथ लिखना शुरू कर राष्ट्रीय ऊर्जा को एकत्रित कर देते हैं. यह भी एक तरह का यज्ञ ही है.

बहरहाल, कुछ यज्ञ विधियां यूं तो सोशल मीडिया से प्राप्त हुई हैं, उसको एक बार अवश्य पढ़ें. और आपके संपर्क में कोई विद्वान योग्य ब्राह्मण हो तो उनसे इन सामग्रियों की जानकारी लेकर यज्ञ अवश्य करें.

यूं तो यज्ञ हवन के लिए आम की लकड़ी, बेल, नीम, पलाश का पौधा, कलीगंज, देवदार की जड़, गूलर की छाल और पत्ती, पीपल की छाल और तना, बेर, आम की पत्ती और तना, चंदन की लकड़ी, तिल, जामुन की कोमल पत्ती, अश्वगंधा की जड़, उपयोग में आती हैं, परन्तु आपके पास इतना बड़ा आयोजन करने के लिए समय और सामग्री न हो तो गोबर के कंडे पर थोड़ी सी मात्रा में आहुति देकर उसे घर भर में घुमा देने से भी बहुत लाभ होगा.

1 कैंसर नाशक हवन

गुलर के फूल, अशोक की छाल, अर्जन की छाल, लोध, माजूफल, दारुहल्दी, हल्दी, खोपारा, तिल, जो , चिकनी सुपारी, शतावर , काकजंघा, मोचरस, खस, म्न्जीष्ठ, अनारदाना, सफेद चन्दन, लाल चन्दन, ,गंधा विरोजा, नारवी ,जामुन के पत्ते, धाय के पत्ते, सब को सामान मात्रा में लेकर चूर्ण करें तथा इस में दस गुना शक्कर व एक गुना केसर दिन में तीन बार हवन करें.

2 संधि गत ज्वर ( जोड़ों का दर्द )

संभालू ( निर्गुन्डी ) के पत्ते , गुग्गल, सफ़ेद सरसों, नीम के पत्ते, गुग्गल, सफ़ेद सरसों, नीम के पत्ते, रल आदि का संभाग लेकर चूरन करें , घी मिश्रित धुनी दें, हवं करीं निमोनियां नाशक पोहकर मूल, वाच, लोभान, गुग्गल, अधुसा, सब को संभाग ले चूरन कर घी सहित हवन करें व धुनी दें.

3 जुकाम नाशक

खुरासानी अजवायन, जटामासी, पश्मीना कागज, लाल बुरा, सब को संभाग ले घी सचूर्ण कर हित हवन करें व धुनी दें. पीनस ( बिगाड़ा हुआ जुकाम ) बरगद के पत्ते, तुलसी के पत्ते, नीम के पत्ते, वाय्वडिंग, सहजन की छाल, सब को समभाग ले चूरन कर इस में धूप का चूरा मिलाकर हवन करें व धूनी दें श्वास – कास नाशक बरगद के पत्ते, तुलसी के पत्ते, वच, पोहकर मूल, अडूसा – पत्र, सब का संभाग कर्ण लेकर घी सहित हवं कर धुनी दें. सर दर्द नाशक काले तिल और वाय्वडिंग चूरन संभाग ले कर घी सहित हवं करने से व धुनी देने से लाभ होगा.

4 चेचक नाशक खसरा

गुग्गल, लोभान, नीम के पत्ते, गंधक, कपूर, काले तिल, वाय्वासिंग, सब का संभाग चूरन लेकर घी सहित हवन करें व धुनी दें

5 जिह्वा तालू रोग नाशक

मुलहठी, देवदारु, गंधा विरोजा, राल, गुग्गल, पीपल, कुलंजन, कपूर और लोभान सब को संभाग ले घी सहित हवन करीं व धुनी दें.

6 टायफायड

यह एक मौसमी व भयानक रोग होता है. इस रोग के कारण इससे यथा समय उपचार न होने से रोगी अत्यंत कमजोर हो जाता है तथा समय पर निदान न होने से मृत्यु भी हो सकती है. उपर्वर्णित ग्रन्थों के आधार पर यदि ऐसे रोगी के पास नीम, चिरायता, पितपापदा, त्रिफला, आदि जड़ी बूटियों को समभाग लेकर इन से हवन किया जावे तथा इन का धुआं रोगी को दिया जावे तो लाभ होगा.

7 ज्वर

ज्वर भी व्यक्ति को अति परेशान करता है किन्तु जो व्यक्ति प्रतिदिन यज्ञ करता है, उसे ज्वर नहीं होता. ज्वर आने की अवस्था में अजवायन से यज्ञ करें तथा इस की धुनी रोगी को दें. लाभ होगा.

8 नजला, सिरदर्द जुकाम

यह मानव को अत्यंत परेशान करता है.| इससे श्रवण शक्ति, आँख की शक्ति कमजोर हो जाती हैं तथा सर के बाल सफ़ेद होने लगते हैं. लम्बे समय तक यह रोग रहने पर इससे दमा आदि भयानक रोग भी हो सकते हैं. इन के निदान के लिए मुनका से हवन करें तथा इस की धुनी रोगी को देने से लाभ होता है.

9 नेत्र ज्योति

इस के लिए हवन में शहद की आहुति देना लाभकारी है. शहद का धुआं आँखों की रौशनी को बढ़ाता है, मस्तिष्क को बल मस्तिष्क की कमजोरी मनुष्य को भ्रांत बना देती है. इसे दूर करने के लिए शहद तथा सफ़ेद चन्दन से यज्ञ करना चाहिए.

10 वातरोग

वातरोग में जकड़ा व्यक्ति जीवन से निराश हो जाता है. इस रोग से बचने के लिए यज्ञ सामग्री में पिप्पली का उपयोग करना चाहिए. इस के धुएं से रोगी को लाभ मिलता है.

11 मनोविकार

मनोरोग से रोगी जीवित ही मृतक समान हो जाता है. इस के निदान के लिए गुग्गल तथा अपामार्ग का उपयोग करना चाहिए. इस का धुआं रोगी को लाभ देता है.

12 मधुमेह

यह रोग भी रोगी को अशक्त करता है. इस रोग से छुटकारा पाने के लिए हवन में गुग्गल, लोबान, जामुन वृक्ष की छाल, करेला का डंठल, सब संभाग मिला आहुति दें व् इस की धुनी से रोग में लाभ होता है.

13 उन्माद मानसिक रोग

सीताफल के बीज और जटामासी चूरन समभाग लेकर हवन में डालें तथा इस का धुआं दें तो लाभ होगा.

14 चित्भ्रम

यह भी एक भयंकर रोग है. इस के लिए कपूर, खास, नागरमोथा, महया, सफ़ेद चन्दन, गुग्गल, अगर, बड़ी इलायची, नारवी और शहद संभाग लेकर यज्ञ करें तथा इसकी धुनी से लाभ होगा.

15 पीलिया

इस के लिए देवदारु, चिरायत, नागरमोथा, कुटकी, वायविडंग संभाग लेकर हवन में डालें. इस का धुआं रोगी को लाभ देता है.

16 क्षय रोग

यह रोग भी मनुष्य को क्षीण कर देता है तथा उसकी मृत्यु का कारण बनता है. ऐसे रोगी को बचाने के लिए गुग्गल, सफेद चन्दन, गिलोय, बांसा(अडूसा) सब का १०० – १०० ग्राम का चूरन कपूर ५- ग्राम, १०० ग्राम घी, सब को मिला कर हवन में डालें. इस के धुएं से रोगी को लाभ होगा.

17 मलेरिया

मलेरिया भी भयानक पीड़ा देता है. ऐसे रोगी को बचाने के लिए गुग्गल, लोबान, कपूर, हल्दी, दारुहल्दी, अगर, वाय्वडिंग, बाल्छाद, ( जटामासी) देवदारु, बच, कठु, अजवायन, नीम के पत्ते समभाग लेकर संभाग ही घी डाल हवन करें. इस का धुआं लाभ देगा. अपराजित या सर्वरोग नाशक धुप गुग्गल, बच, गंध, तरीन, नीम के पत्ते, अगर, रल, देवदारु, छिलका सहित मसूर संभाग घी के साथ हवन करें. इससे लाभ होगा तथा परिवार रोग से बचा रहेगा.

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