बकाया नहीं मिला तो बंद कर दी ऑक्सीजन सप्लाई, 30 बच्चों की मौत

गोरखपुर. ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म द्वारा 69 लाख रूपये बकाया के चलते सप्लाई ठप कर देने से गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती 30 बच्चों की मौत हो गई. मरने वालों में 13 बच्चे एनएनयू वार्ड और 17 इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती थे. बताया जा रहा है कि 69 लाख रुपये का भुगतान न होने की वजह से ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म ने ऑक्सीजन की सप्लाई गुरुवार की रात से ठप कर दी थी.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के अगले दिन हुई इस दर्दनाक घटना के पीछे का कारण बताया जा रहा है कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म ने 69 लाख रूपये बकाया के चलते सप्लाई ठप कर दिया था. सुबह से ऑक्सीजन की किल्लत का खामियाजा बेचारे मरीजों को भगुतना पड़ा.

हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इतनी संख्या में बच्चों की मौत को खारिज करते हुए यह कहा है कि दोपहर बाद से ऑक्सीजन की सप्लाई सुचारू हो गई है. बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बीते दो सालों से परिसर में लगे लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट से इंसेफेलाइटिस वार्ड व नियोनेटल वार्ड में ऑक्सीजन की सप्लाई की जाती है.

इस प्लांट से मेडिकल कॉलेज के करीब 300 मरीजों को प्रतिदिन ऑक्सीजन की जरूरतों को पूरा किया जाता है. बताया जा रहा है कि ऑक्सीजन सप्लाई का ठेका जिस फर्म को है उसका करीब 69 लाख रूपये बकाया है. भुगतान में देरी के चलते गुरूवार की शाम को फर्म ने ऑक्सीजन की सप्लाई ठप कर दी.

इसके बाद से मेडिकल कॉलेज के नेहरू चिकित्सालय में हाहाकार मच गया. किसी तरह सुबह तक काम तो चल गया लेकिन उसके बाद दिक्कतें शुरू हो गईं. बताया जा रहा कि ऑक्सीजन के नहीं मिलने के चलते बच्चों की मौत हो गई. अस्पताल प्रशासन इस लापरवाही से हुई मौतों पर फिलहाल पर्दा डालने में लगा हुआ है.

बताया जा रहा कि घंटों तक मरीजों को अंबू बैग के सहारे किसी तरह ऑक्सीजन की सप्लाई की गई लेकिन वह नाकाफी साबित हुई. उधर, अस्पताल प्रशासन ने ऑक्सीजन की कमी से मौतों को सिरे से खारिज कर रहा. प्राचार्य के अनुसार ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू हो चुकी है.

शुक्रवार सुबह सात बजे ऑक्‍सीजन पूरी तरह खत्‍म हो जाने के चलते इंसेफेलाइटिस वार्ड में करीब दो घंटे तक मरीजों को अम्‍बू बैग के सहारे रहना पड़ा. 12 बजे कुछ सिलेंडर पहुंचे लेकिन इंसेफेलाइटिस इमरजेंसी वार्ड में अभी भी सिलेंडरों की क्राइसिस बनी हुई है. इंसेफेलाइटिस के वार्ड नंबर 100 में हर डेढ़ घंटे में 16 सिलेंडर खर्च हो रहे हैं, चारों तरफ अफरातफरी मची हुई है.

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