फेसबुक पर स्मृति ने जमकर ली सोनिया की खबर

नई दिल्ली. केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से बुधवार को संसद में दिए गए भाषण के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की जमकर खबर ली. इस पोस्ट में भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर संसद के विशेष सत्र में सोनिया गांधी की तरफ से दिए गए बयान की आलोचना करते हुए स्मृति ने लिखा कि जहां प्रधानमंत्री ने ‘करो या मरो’ के कालजयी नारे के साथ राष्ट्र को संबोधित किया, वहीं सोनिया ने अपने परिवार को याद किया.

इस पोस्ट में स्मृति इरानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी जमकर तारीफ की. उन्‍होंने लिखा कि पीएम मोदी राष्ट्र की बात करते हैं, जबकि सोनिया गांधी केवल परिवार की बात करती हैं.

पीएम मोदी के भाषण का जिक्र करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा ‘करो या मरो’ की शपथ को अपनाने को कहा है. पीएम ने न सिर्फ सरदार वल्लभ भाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं की बात की बल्कि महिलाओं के योगदान को भी अपने भाषण में सम्मान दिया. प्रधानमंत्री मोदी ने बीते हुए दिनों की ही बात नहीं की साथ ही आने वाले भविष्य की भी बात अपने भाषण में की.

सोनिया गांधी ने बुधवार को संसद के विशेष सत्र में आजादी के आंदोलन में भाग लेने वाले वीरों को सलाम करने के बाद देश के वर्तमान राजनीतिक हालात पर टिप्‍पणी करते हुए कहा कि इस समय देश में नफरत और विभाजन का दौर चल रहा है. सोनिया ने यह भी कहा था कि लोकतांत्रिक मूल्‍य खतरे में पड़ रहे हैं. हमें आजादी की कुर्बानियों को याद रखना होगा और इन्‍हें बचाने के लिए काम करना होगा.

सोनिया गांधी के संसद में दिए गए भाषण के जवाब में स्मृति ईरानी ने लिखा- अपेक्षा की जाती है कि भारत छोड़ो आंदोलन जैसी ऐतिहासिक घटना के बारे में हमें सही रूप में अपने विचार रखने चाहिए थे, लेकिन सोनिया गांधी अपने भाषण में 2014 की अपनी सत्ता की हार का अफसोस मनाती दिखीं. यह 2014 में उनकी पार्टी की हार से पहले तक छाए रहे नेहरू वंश के नियंत्रण को खोने की ‘लंबी, दयनीय हताशा’ है.

बुधवार रात किए गए फेसबुक पोस्ट में केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि सोनिया ने यह साबित किया कि पारिवारिक संबंध अन्य चीजों से ऊपर हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने लोकसभा में अपने भाषण में केंद्र पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या अंधकार की ताकतें लोकतंत्र की जड़ें नष्ट प्रयास कर रही हैं.

[स्मृति ईरानी का फेसबुक पोस्ट के लिए यहां क्लिक करें]

स्मृति ने लिखा कि भारत छोड़ो आंदोलन जैसी देशव्यापी ऐतिहासिक घटना के बारे में हमें निष्पक्ष रहकर अपनी बात रखनी चाहिए थी, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का भाषण 2014 में मिली सत्ता की हार के अफसोस मनाने जैसा नजर आया. सोनिया गांधी अपने पूरे भाषण में सिर्फ जवाहर लाल नेहरू के योगदान की बात करती रहीं, क्योंकि वो उनके परिवार से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने सुभाषचंद्र बोस और सरदार वल्लभभाई पटेल तक का नाम नहीं लिया. सोनिया गांधी का भाषण किसी चुनावी कैंपेन के जैसा था.

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