ऐसी होती हैं देश की बेटियां

पोस्ट के साथ दिए गए चित्र में मंगल यान के सफल प्रक्षेपण पर खुशी से झूमती ISRO की इन महिला वैज्ञानिकों को देश की बेटी कहने में हर भारतवासी को गर्व की अनुभूति होती है. अपनी बेटियों को मिली सफलता पर उनके साथ पूरा देश झूमा था.

भारत की इन बेटियों की मेधा, प्रतिभा, योग्यता क्षमता का डंका केवल देश ही नहीं सारी दुनिया में बजा है. इनके तेजस्वी व्यक्तित्व, अतुलनीय कृतित्व के सम्मान में हर देशवासी का शीश श्रद्धा से झुक जाता है.

सफलता के नए शिखरों को लगातार चूमने का अनोखा कीर्तिमान स्थापित कर रही इन बेटियों के रोम रोम में भारतीय सभ्यता संस्कृति और संस्कारों की त्रिवेणी कल कल कर प्रवाहित होती प्रतीत होती है.

भारत की इन बेटियों का जीवन आनेवाली अनेक पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक, प्रेरणास्त्रोत की भूमिका का निर्वाह करता रहेगा. इसलिए यही हैं भारत की वास्तविक बेटियां. देश के दिल पर उसकी यही बेटियां ही राज करेंगी.

आज इन बेटियों का उल्लेख इसलिए ताकि यह स्पष्ट कर सकूं कि आधी रात तक दारू के अड्डों पर बैठकर दारू पीनेवाली, शराबखानों में डिस्कोगीत गा बजाकर शराबियों का दिल बहलाने वाली कोई लड़की अपने माता पिता की सन्तान तो हो सकती है लेकिन वो देश की बेटी नहीं हो सकती. क्योंकि वह लड़की यह सारे काम अपनी किसी मजबूरी के कारण नहीं करती. वह लड़की समाज के सर्वाधिक साधन शक्ति सम्पन्न वर्ग समझे जानेवाले IAS पिता की दुलारी सन्तान है.

ध्यान रहे कि 2-4 चाटुकारों ने 70-72 साल पहले किसी को हज़ारों वर्ष प्राचीन इस देश का बाप घोषित कर दिया था.

पिछले तीन चार दिनों से उसी शैली में दो-चार न्यूजचैनल मिलकर दारू के अड्डों पर आधी रात के बाद तक बैठकर दारू पीनेवाली, शराबखानों में डिस्कोगीत गा बजाकर शराबियों का दिल बहलाने वाली को इस देश की बेटी घोषित करने पर आमादा हो गए हैं.

जिसे मानना हो वह माने, लेकिन मैं यह मानने को बिल्कुल तैयार नहीं हूं. मेरे लिए तो देश के जनमन में रजनीगन्धा की तरह सुगन्ध बिखेर रही ISRO की यह महिला वैज्ञानिक तथा देश और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में इन महिला वैज्ञानिकों की तरह अपनी मेधा अपनी प्रतिभा अपनी योग्यता का परचम शान से लहरा रहीं बेटियां ही इस देश की वास्तविक बेटियां हैं, जिन पर देश को गर्व हैं.

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