पुरानी पीढ़ी से नाराज़, वही गलतियाँ दोहराती नई पीढ़ी

एक सताईस साल का युवक आया अपने इलाज के लिये. डिप्रेशन और साथ में अंदर भरा हुआ गुस्सा. माता-पिता साथ आये थे. बड़े चिन्तित थे अपने एकलौते बेटे को लेकर.

करियर, असफल प्रेम और सबसे ज्यादा अपने अभिवावक को दोषी मान रहा था वह लड़का अपने हालात के लिए. पूरे बचपन उसने अपने माँ-बाप को लड़ते देखा था. उनका गुस्सा अक्सर इस पर भी उतरता था और इन बातों ने इसके मन में अपने पेरेंट्स के लिए गुस्सा भर दिया.

पूछने पर कि क्या अभी भी घर की हालत वही है, उसका जवाब था- नहीं, अब कुछ सालों से पैरेंट्स के बीच लड़ाइयाँ काफी कम हो गयी है. मनोचिकित्सक ने टिपण्णी की कि तुम्हारे पैरेंट्स का व्यवहार काफी cooperative है तुम्हारे इलाज को लेकर तो उसका जवाब था, लेकिन इसके बावजूद मैं अपने पैरेंट्स से मतलब नहीं रखना चाहता.

पैरेंट्स को लेकर इतने सारे बच्चों में गुस्सा भरा हुआ है कि यह संख्या थोड़ी आश्चर्यजनक लगती है. ये बच्चे समाज के सामने भले ही ना दिखाये लेकिन किसी ना किसी रूप में रिएक्ट करते हैं, और जब परेशान होकर किसी मनोवैज्ञानिक के पास आते हैं, तो खुल कर अपनी भड़ास निकालते हैं.

अब इस सिचुएशन के अक्सर दो पक्ष होते हैं.

1. बच्चों का गुस्सा बिल्कुल जायज है. बहुत से पैरेंट्स बच्चे पैदा कर देते हैं, पर उन्हें वो केयर या ट्रेनिंग नहीं दे पाते जो उन्हें एक अच्छा, मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ इंसान बनने में मदद करे. ऐसे में बाद में चल कर पैरेंट्स के प्रति नकारात्मक भाव आना कोई बड़ी बात नहीं है.

2. दूसरा पक्ष जो मैं महसूस करती हूँ, वह यह कि ऐसे बच्चों का व्यवहार थोड़ा नाजायज हो जाता है. अक्सर माता-पिता समय के साथ स्थिर होते जाते हैं. पिता अब बेटे पर हाथ छोड़ने से कतराता है और माँ बेटी को अब एक सौ छत्तीस के स्पीड से ताने नहीं देती. वो खुद थोड़े परिपक्व हो जाते हैं और अक्सर इस नकारात्मकता से खुद ही थकना शुरू कर चुके होते हैं. बच्चों को लेकर उनका परसेप्शन बदल चुका होता हैं. अब वो बच्चों में सहारा ढूँढना शुरू करते हैं.

पर जब तक माता-पिता की यह स्टेज आती है, बच्चा खुद इमोशनली ज्यादा इंडिपेंडेंट हो जाता है और वही गलतियाँ करना शुरू करता हैं जो पहले पैरेंट्स ने की थी.

वह खुद की सोच के साथ कट्टर हो जाता है. एक lifelong grudge ढोता है. और जब उसे एक बेहतर परिवार बनाने का अवसर मिलता हैं तो पुराने गुस्से की वजह से उसपर लात मार देता है.

कुल मिलाकर बच्चा अगले चालीस साल रिश्ते को ना सम्भालने की वही गलती करता है जो पिछले बीस साल माता-पिता ने की. और अंत में किसी के हाथ कुछ नहीं लगता और सभी एक खराब जिंदगी की शिकायत करते हुए स्वर्ग सिधारते हैं.

ऐसे बच्चों को सख्त जरूरत हैं कि वो अपनी समझ थोड़ी विकसित करें, थोड़ा माफ़ करना सीखे. यकीन मानिये अब आप अपने पैरेंट्स के साथ एक नयी शुरुआत कर सकते हैं. अब आप वापस एक बेहतरीन BOND विकसित कर सकते हैं. बस पहला कदम थोड़ा असहज होगा.

But it’s better late than never

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY