किशोरमय गीत जो हर दिल को कर जाए किशोरवय

kishor kumar ma jivan shaifaly

पांच रुपैया बारह आना, मारेगा भैया ना ना ना ना, के पीछे की कहानी तो लगभग सबको पता ही होगी, कैसे इंदौर के क्रिश्चन कॉलेज की कैंटीन में पांच रुपैया बारह आने की उधारी के पीछे इस गाने की रचना हुई.

मुझे यह इसलिए पसंद आता है क्योंकि मुझे यह गीत मेरे इंदौर के दिनों के साथ साथ, मेरी किशोर उम्र की याद दिलाता है जब उन दिनों चार आने, आठ आने और बारह आने चलते थे. मेरी किशोर उम्र में मेरी सखियाँ जब मिथुन चक्रवर्ती और गोविंदा के गीत पर थिरकती थीं, मैं गुरुदत्त की फिल्मों के गाने सुना करती थी.

मोहम्मद रफ़ी और मुकेश के गाने तो उन दिनों मेरे लिए सोलह आने खरे होते थे लेकिन किशोर के गाने रूपये में बारह आने की तरह थे. कुछ गीत तो बहुत पसंद थे, लेकिन कुछ इतने चलताऊ थे कि लगता था उन गीतों को यदि कोई गा सकता था तो सिर्फ और सिर्फ किशोर कुमार ही थे क्योंकि मोहम्मद रफ़ी और मुकेश की आवाज़ में वो अल्हड़ नटखट गीत भी बूढ़े लगने लगते और जैसे किशोर तो ताउम्र उस उम्र से निकल ही नहीं पाए जिसे Teenage कहते हैं, ठीक उनके नाम की तरह.

ऐसे गानों की फेहरिस्त लम्बी हैं लेकिन आज की तारीख में जिस गाने को मैंने सबसे अधिक बार सुना है, वो है याराना फिल्म का अमिताभ पर फिल्माया “भोले ओ भोले”.

एक बार फिर यही कहूंगी हर किशोर उम्र के व्यक्ति को यह गाना सुनना चाहिए क्योंकि यही उम्र होती है जब हम खूब सारे दोस्त बनाते हैं और दोस्ती के वास्तविक अर्थ को समझ सकते हैं. सच्चे दोस्त का रूठ जाना क्या होता है और उसको मनाने के लिए एक दोस्त क्या क्या कर सकता हैं, यह इस गीत से समझा जा सकता है.

मुझे यह गीत सिर्फ उसके एक अंतरे के कारण बहुत पसंद है, और जैसा कि अब जीवन का हर गीत स्वामी ध्यान विनय के ज़िक्र के बिना अधूरा है, तो जब कभी मैं रूठ जाती हूँ तो मेरे लिए वो यह गाना बजा देते हैं… और फिर जैसा हर गाने के साथ होता है वो उसके किसी न किसी वाद्य में डूब जाते हैं वैसे ही इस गाने के तबले पर उनकी ऊँगलियाँ टेबल पर थिरकने लगती हैं.

और फिर वो भूल जाते हैं कि गाना मुझे मनाने के लिए बजाया जा रहा है और मैं उनको गीत के साथ यूं एकाकार होते देख खुद ध्यानमग्न हो जाती हूँ और खुद ही भूल जाती हूँ कि मुझे रूठे रहने का अभिनय करना है. और फिर अचानक ध्यान तब टूटता है जब उनको अमिताभ की स्टाइल में एक हाथ ऊपर उठाकर नाचते देखती हूँ… फिर तो यह भी याद नहीं रहता कौन किससे रूठा है, याद रहता है तो इनके मनाने का तरीका, अमिताभ का डांस, किशोर की आवाज़ और हमारे प्रेम से अंजान फिर भी जैसे हमारे लिए ही अनजान द्वारा लिखी यह पंक्तियाँ-

क्या होगा फिर तेरा गौरी जो रूठ जाए
शंकर तेरे माथे का चंदा जो टूट जाए
डम डम डम डमरू ना बाजे
बम बम बम फिर तू ना नाचे
यार अगर ना माने
मेरे यार को मना दे
वो प्यार फिर जगा दे…

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