गुजरात कांग्रेस का इतिहास : 1993 का सूरत रेलवे स्टेशन बम ब्लास्ट

सन 1993, सूरत रेलवे स्टेशन पर बम ब्लास्ट होता है. उसी वक्त सूरत के वराछा में एक स्कूल में ब्लास्ट होता है. उनकी योजना गुजरात एक्सप्रेस को उड़ाने की थी पर ना जाने क्यों उन्होंने स्टेशन पर ब्लास्ट कर दिया. हालांकि स्टेशन ब्लास्ट में कोई जान नहीं गई पर करीब 30 से 40 लोग घायल हुए और स्कूल के ब्लास्ट में एक लड़की की दुखद मृत्यु होती है.

इन्वेस्टिगेशन में सबसे बड़ा चौंकाने वाला नाम आता है गुलाम मोहम्मद सुरति. जी हां ये ‘सुरति’ गुजरात में उस वक्त की कांग्रेस सरकार में परिवहन और दरियाई मंत्री थे. हालांकि ये जांच पड़ताल कांग्रेस ने दबा कर रखी थी. लेकिन जब 1995 में भाजपा की सरकार आई तब इस जांच रिपोर्ट से पर्दा उठा.

मोहम्मद सुरति और उसके साथी मुश्ताक पटेल और दूसरे 30 लोगों की गिरफ्तारी हुई. उस वक्त भाजपा के हमारे क्षेत्र के विधायक श्री धीरूभाई गजेरा ने विधानसभा में जोरदार तथ्य पेश करके इनकी गिरफ्तारी करवाई. वो ही धीरूभाई मोदी विरोध के चलते आज कांग्रेस में है.

टाडा कोर्ट ने इन लोगों को 20 साल की सजा सुनाई. कुछ बच गए और कुछ 10 साल के लिए अंदर गए. अगर 1995 में भाजपा नहीं आती तो ये मामला दबकर ही रह जाता.

सुरति जो है एक केले बेचने वाला आदमी था. केले की लॉरी लेकर बाकायदा वो गली-गली घूमता और कांग्रेस के पोस्टर चिपकाता. साथ मे गुंडई करने की क्षमता थी तो आ गए कांग्रेस के बड़े नेताओं की नज़र में. सीधे विधानसभा का टिकट मिल गया और चुनाव जीतते ही परिवहन मंत्री और दरियाई मंत्री बन गए.

अब एक चुनाव में इतना आगे आना सम्भव ही नहीं है. कहा जाता है कि इनके सर पर दाउद और हमारे ‘बाबूभाई’ के चार हाथ थे. ‘सुरति’ के दरियाई मंत्री बनने के बाद गुजरात के दरिया से ही पाकिस्तान ने RDX, नकली नोट, सोना, चरस, गांजा, अफीम, ड्रग्स आदि की सप्लाई में तेजी आ गई. सब कुछ बेरोकटोक चलने लगा.

उस वक्त भी कांग्रेस में ‘बाबूभाई’ कांग्रेस में बहुत बड़ा स्थान पा चुके थे. राजीव गांधी से गहरे संबंध बन चुके थे. सुरति हो या अन्य कोई, किसी की भी नियुक्ति ‘बाबूभाई’ की सलाह के बिना संभव ही नहीं थी. और ये बात तो कोई मान ही नहीं सकता कि सुरति के बारे में ‘बाबूभाई’ ना जानते हो.

परिवहन मंत्री बनते ही सुरति ने राज्य परिवहन की बसों में ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम बस ड्राइवर और कंडक्टर की भर्ती कर दी. आज अगर आप गुजरात की बसों में सफर करेंगे और अगर कोई बूढ़ा चच्चा जान ड्राइवर या कंडक्टर दिखे तो समझ जाइएगा कि वो सुरति और ‘बाबूभाई’ की ही मेहरबानी से है.

और ये सब मुस्लिम ड्राइवर कंडक्टर ज्यादातर भरूच से ही थे. हां वही भरूच, जो ‘बाबूभाई’ का गाँव और चुनावी क्षेत्र है. मेरे पिताजी बताते हैं कि भर्ती में हिन्दुओं की घोर उपेक्षा होती थी. इतने कांड करने के बाद भी ‘बाबूभाई’ ने सुरति को बचाये रखा.

अब सुरति को तो उनके कर्मों की सजा मिल गई. बाकी बचे ‘बाबूभाई’, तो लगता ऐसा है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बहुत जल्द ही उनके राजनीतिक करियर को ख़त्म करके ये काम भी पूरा कर ही देंगे.

सुरति को 20 साल की सज़ा के बारे में ‘द हिन्दू’ का समाचार पढ़ने के लिए क्लिक करिए

 

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY