जीत भी गए अहमद पटेल तो भी कांग्रेस के लिए नफ़रत ही कमाएंगे

सन 2012 में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल ने नरेंद्र मोदी जी से मतभेद के चलते और दूसरे पाटीदार नेताओ के बहकावे में आकर अपनी अलग पार्टी बनाई थी. गुजरात परिवर्तन पार्टी (GPP). जब चुनाव हुए तो उस पार्टी के सिर्फ एक mla चुनकर आया. वो खुद केशुभाई ही थे.

उस वक्त हम सब दोस्तों ने हमारे एक खास कांग्रेसी मित्र के कहने पर कांग्रेस के उम्मीदवार के पोस्टर हमारी गली में चिपकाए थे. उस चुनाव में हमने भाजपा के लिए बहुत मेहनत की थी. कांटे की टक्कर थी.

तब उसी कांग्रेसी मित्र ने ये कहा कि इस GPP को बनाने के लिए केशुभाई और उनके चेलों को कांग्रेस ने 700 करोड़ रुपये दिए थे. सबको पता था कि GPP कभी नहीं जीतेगी, पर सिर्फ अगर भाजपा के वोट भी काटती तो कांग्रेस को फायदा होता.

जब प्रचार हो रहा था तब केशुभाई ने एक वाक्य कहा था कि राक्षस की जान तोते में है और हमें उस तोते को पकड़ना है. उसे गुजरात में नहीं घुसने देना है.

वो तोता कोई और नहीं अमित शाह थे, जो उस वक्त न्यायालय के आदेश के कारण गुजरात में प्रवेश नहीं कर सकते थे और दिल्ली में थे.

चुनाव में मोदी जी बहुमत से जीते. अमित शाह भी गुजरात वापस आये. केशुभाई के पैरों तले से ज़मीन खिसक गई थी. उनको डर था कि मोदी उन्हें परेशान करेंगे.

लेकिन मोदी जी जो हैं… वो जिनका सम्मान करते हैं उनको केवल निवृत्त करते है, जैसे शंकरसिंह बापू हों या आडवाणी जी. लेकिन जिनको वो दुश्मन मान लें उनकी नैया डुबोकर ही मानते हैं. और अमित शाह की डिक्शनरी में तो माफी नाम का शब्द ही नहीं है.

गुजरातम में मोदी-शाह को प्रताड़ित करने का सारा षड्यंत्र अहमद पटेल और सोनिया गांधी का था. अहमद पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनना था.

लेकिन प्रचार के दौरान मोदी जी ने एक वाक्य का प्रयोग कर पटेल को खुद ही पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. और वो वाक्य था – ‘कांग्रेस खुल कर क्यों नहीं कहती कि वो अहमद मियां पटेल को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है.’

बस इस एक वाक्य ने गुजरातियों में यह संदेश भेज दिया कि भाई कांग्रेस एक मुसलमान को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है और फिर क्या होना है ये सोच लो.

बस सभी हिन्दू वोटरों ने भाजपा के लिए एकजुट वोटिंग की. अहमद पटेल की यह सफाई कि ‘वे नहीं सीएम पद के उम्मीदवार नहीं हैं’, का भी कोई असर नही हुआ. पटेल उस वक्त बुरा सा मुंह लेकर दिल्ली लौट गए.

अब वापस एक बार फिर पटेल के सामने चुनौती है कि क्या वो गुजरात से राज्यसभा का चुनाव जीतकर जाएंगे? क्योंकि इस बार तो पत्ते भी शाह पीस रहे हैं और गेम शो भी वो ही करेंगे.

अब देखते है. पटेल जीत भी गए तो उनको ये जीत हमेशा याद रहेगी, क्योंकि इस जीत के बदले में वो गुजरात में कांग्रेस के लिए नफरत ही कमाएंगे. कारण – वो विधायक जो बंगलुरु में मौज उड़ा रहे हैं, उनके क्षेत्रों में बारिश के चलते बाढ़ आई हुई है और वे जनता के बीच से नदारद है.

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