चाटुकारिता की हद है

जैसे मोदी जी को कैम्पेनिंग मोड से बाहर आने में डेढ़-दो साल लग गया था, वैसे ही रवि शास्त्री को कमेंट्री मोड से बाहर आने में लगेगा.

पानी पी-पीकर गा रहे हैं – “कोहली ये है, वो है. मैं तो सीरीज़ को अपॅरचुनिटी के रूप में देखता हूँ. मुझे कोई बटन नहीं दबाना पड़ा, बस ‘प्ले’ बटन दबाना पड़ा. पॉज़िटिव माइंडसेट इज़ की टू सक्सेस.”

ब्लाह… ब्लाह… दिस एंड दैट.

मुझे युवराज का इनश्योरेंस वाला विज्ञापन याद आ गया: “जब तक बल्ला चल रहा है, ठाठ हैं.” उसके बाद युवराज का चेहरा जैसा होता था, वो हर क्रिकेटर की लाइफ में आएगा.

श्रीलंका की इस टुच्ची टीम को ये ‘मुरली, संगकारा, दिलशान, जयवर्धने’ की टीम से आँक रहे हैं कि पहले कोई टीम जीत कर नहीं गई. कैसा आदमी है ये? और टॉन्ट कस रहे हो गाँगुली, द्रविड़, तेंदुलकर, ज़हीर, लक्ष्मण और कुम्बले जैसे खिलाड़ियों को बिग नेम्स का कटाक्ष वाला नाम देकर! चाटुकारिता की हद है.

जो ‘बड़े नामों वाली टीम’ ना कर सकी वो कोहली की टीम ने किया : शास्त्री

टीम इंडिया के ताज़ा-ताज़ा हेड कोच बने रवि शास्त्री ने कहा है कि विराट कोहली की कप्तानी वाली मौजूदा भारतीय टीम ने अतीत की उन कई टीमों से ज्यादा उपलब्धियां हासिल की है जिनमें बड़े-बड़े नाम शामिल थे.

शास्त्री ने कहा कि मौजूदा टीम इंडिया ने अब तक बहुत कुछ ऐसा कर लिया है, जो अतीत की भारतीय टीमें और कई बड़े नाम अपने कैरियर में नहीं कर सके. जिसमें श्रीलंका के 2015 दौरे पर टेस्ट सीरीज जीतना शामिल है. कोहली की अगुवाई वाली टीम ने 2015 में 22 साल बाद यहां टेस्ट सीरीज जीती थी.

शास्त्री ने कहा, भारत के कई बड़े खिलाड़ी श्रीलंका में 20 साल से खेलते आ रहे हैं और वो कई बार श्रीलंका आए होंगे लेकिन कभी यहां टेस्ट सीरीज नहीं जीत सके. इस टीम इंडिया ने वह कर दिखाया है. इस टीम ने ऐसा बहुत कुछ किया है, जो पहले कई भारतीय टीमें नहीं कर सकी और वह भी विदेश में.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY