क़िस्सा ए जम्मू-कश्मीर : 25 हज़ार नागरिकों पर अत्याचार का कारण है धारा 35A

हुआ ये कि 1957 में एक बार जम्मू-कश्मीर में सफाई कर्मियों ने हड़ताल कर दी. उन दिनों वहां CM की जगह PM यानी प्रधानमंत्री होता था. तो PM थे बक्शी गुलाम मुहम्मद. किसी ज़माने में बक्शी साब National Conference के सबसे बड़े नेता शेख अब्दुल्लाह के चेले हुआ करते थे और उनके डिप्टी PM हुआ करते थे पर 1953 में इन्होने अब्दुल्लाह से बगावत कर दी और खुद PM बन बैठे.

सो 1957 में सफाई कर्मियों ने हड़ताल कर दी. शहरों में गंदगी के अंबार लग गए. ऐसे में PM बक्शी ने पंजाब के CM प्रताप सिंह कैरों से बात की… भाई मेरे, 250-300 आदमी भेज दे, सफाई करने को….

बक्शी कैरों के पक्के यार… तो कैरों ने कहा, साले… तेरी हिम्मत कैसे हुई… अबे पंजाबी बंदा तुम साले कश्मीरियों की गंदगी उठाएगा? हरगिज़ नहीं…

तो बक्शी ने कहा, भाई ऐसे नही उठवाऊंगा, बाकायदे पक्की नौकरी दूंगा… म्यूनसिपल्टी में सफाई कर्मी की…

कैरों ने कहा, ऐसे कैसे दे देगा? मने ये जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासी (PR) तो हैं नही… कैसे देगा नौकरी?

गुलाम मुहम्मद बक्शी ने नया प्रावधान निकाला… म्यूनसिपल्टी में सफाई कर्मी की नौकरी पाने के लिए जम्मू-कश्मीर का स्थायी निवासी होना ज़रूरी नहीं…

1957 में 250 से ज़्यादा परिवार पंजाब से आ के जम्मू में बस गए. उन्हें सफाई कर्मी की नौकरी दे दी गयी. उन्हें वाल्मीकि बस्ती, गांधी नगर जम्मू में बसा दिया गया.

अब यहां से शुरू हुआ उन 250 परिवारों पर अत्याचार… आज 60 साल बाद उन परिवारों की जनसंख्या बढ़ के लगभग 25,000 हो चुकी है.

पर भारतीय संविधान की धारा 35A के कारण ये 25,000 लोग सिर्फ और सिर्फ भंगी मेहतर की नौकरी करने के लिए अभिशप्त हैं.

क्यों???

आपको याद होगा कि PR तो इनपे थी नहीं, सो सिर्फ म्यूनसिपल्टी का मेहतर बनने के लिए इनको PR से छूट मिली थी… और PR वो आज तक न हुए.

अब इनके बच्चे न किसी सरकारी Professional college, University में पढ़ सकते हैं, न कोई Scholarship ले सकते हैं, न कोई ज़मीन, मकान, दुकान खरीद सकते हैं और न कोई सरकारी नौकरी कर सकते हैं.

आज इनके परिवार का कोई बच्चा पढ़ लिख के डॉक्टर, इंजिनियर कुछ भी बन जाये, जम्मू-कश्मीर में नौकरी उसको सिर्फ और सिर्फ मेहतर की ही मिलेगी. मेहतर में भी उसको आजीवन कोई प्रमोशन नही मिलेगा क्योंकि मेहतर के अलावा और कोई पद पाने का हक़ ही नही.

इन 25000 वाल्मीकियों को विधान सभा और स्थानीय निकायों के चुनावों में मतदान तक का अधिकार नही. ये सिर्फ लोकसभा में वोट कर सकते हैं.

उन 25,000 वाल्मीकियों पर ये अत्याचार होता है हमारे संविधान की धारा 35A के कारण. धारा 35A के कारण ही जम्मू काश्मीर में धारा 370 का दुरुपयोग होता है.

जबकि धारा 35A पूरी तरह असंवैधानिक है क्योंकि इसको कभी भारत की संसद ने पास ही नही किया. ये चोर दरवाजे से सिर्फ राष्ट्रपति के आदेश से ही लागू कर दी गयी जिसका उन्हें अधिकार ही नही.

अब इसी धारा 35A को रद्द करने की याचिका सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है… जिस पर राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती बिलबिला कर कह रही हैं कि यदि इसे हटाया गया तो राज्य में कोई तिरंगा उठाने वाला न बचेगा.

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