देख मोदी सरकार के तेवर और ढंग, चीन-पाकिस्तान हैं बौखलाए और दंग

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हिंदी फिल्मों में एक कहानी ज़बर्दस्त तरीके से अनेक बार दोहराई गयी है… यह कि जब किसी कॉलेज में कोई नया छात्र आता है तो वहां के पुराने गुंडे और मवाली छात्र उस नये छात्र पर पहले तो कड़ी नजर रखते है… उसकी हर तरह की गतिविधि पर नजरें गड़ाये रहते है… उसके परिवार में कौन-कौन है… उस छात्र में प्रतिरोधक क्षमता कितनी है… है भी या नही…?

फिर पूरी तरह नाप-तौल करने के बाद वे गुंडे मवाली उस छात्र पर धीरे-धीरे रौब जमाने का प्रयास करते है… देखते है कि वह विरोध करता है या नहीं… उसमें विरोध करने की क्षमता कितनी है… यदि लगता है कि नया छात्र विरोध नहीं कर रहा है… तो इससे उनकी हिम्मत बढ़ती ही चली जाती है…

यदि नया छात्र कुछ प्रतिरोध करता है तो उसके साथ साथ गुंडे मवाली भी अपनी हरकतें बढ़ाते चले जाते हैं… उसके साथ मारपीट या हमला कर यह देखा जाता है कि सामने वाले में प्रतिरोध करने की क्षमता कहां तक है… वह अपनी सुरक्षा के लिये कहां तक जा सकता है…?

जब छोटा गुंडा पिट जाता है तो वह अपने गुट के सरगना बड़े गुंडे के पास जाता है… अंत में संघर्ष होता है और नया छात्र पुराने गुंडे मवालियों की तबियत से धुलाई कर देता है तो सारे गुंडे लफंगे दुम दबाकर भाग जाते है… फिर किसी की हिम्मत नहीं होती उस छात्र को परेशान करने की. ऐसी सैकड़ों फ़िल्में बनी हैं भारत में, जिनके नाम सबको मुंह जुबानी याद होगें…!!!

कुछ ऐसा ही खेल भारत के साथ उसके पड़ोसी भी खेल रहे हैं. पहले पाकिस्तान और हाल ही में अब चीन भी इसमें शामिल हो गया है और ये दोनों देश पिछले तीन साल से भारत की मोदी सरकार के साथ यहीं नापतौल का हिसाब लगा रहे है.

वे तौल रहे है कि नयी सरकार का सेनापति अपने देश की सुरक्षा के लिये किस स्तर तक जा सकता है. वे मोदी सरकार की कड़ी परीक्षा ले रहे है. ये पाकिस्तान की ओर से बार-बार हो रहे हमले, कश्मीर में आतंकी घटनाएं, चीन के साथ डोकलाम सीमा विवाद और चीनी मीडिया द्वारा रोजाना दी जा रही युद्ध की धमकी… ये सब एक बेहद सोची समझी रणनीति के तहत किये जा रहे हैं. ये एक सैनिक युद्ध से अधिक एक मनोवैज्ञानिक युद्ध है, जो पाकिस्तान और चीन भारत के साथ लड़ रहे हैं.

यही मनोवैज्ञानिक लड़ाई फिलिस्तीनियों और 13 अरब राष्ट्रों ने यहूदियों और इज़रायल के साथ लड़ी थी… जिसमें हर बार इज़रायल ने फिलीस्तीनियों और अरब राष्ट्रों को आम भारतीय फिल्मों के गुंडो की तरह तबीयत से धोया.

परिणाम… ISIS और किसी अरब राष्ट्र ने हाल के कुछ वर्षो में आज तक किसी यहूदी या इज़रायली सैनिक की हत्या नहीं की… जबकि इसी दौरान ISIS ने लाखों इराकी यजीदियों, शियाओं, कुर्दो के साथ हर तरह का अमानवीय अत्याचार किया… बच्चों की हत्या की… यजीदी महिलाओ की मंडी सजाई नीलामी में उनकी बोली लगी… कैदियों के गर्दन काटने के वीडियो पूरी दुनिया को दिखाये!

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में इज़रायल की यात्रा की है जहां उनका भव्य स्वागत हुआ. 1962 में चीन, 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी और 1999 के कारगिल के युद्ध जो चीन और पाकिस्तान के साथ हुए थे… इन युद्धों में इज़रायल ने भारत को सैन्य और रणनीतिक सहायता दी थी.

अब 2017 में तो इज़रायल के साथ खुलेआम राजनीतिक सम्बन्ध बन गये हैं तो पाकिस्तान और चीन बौखला रहे हैं… पाकिस्तान के ‘गटरछाप धर्मान्ध अखबारों’ के बाद अब चीन ने भी अपने सरकारी अखबार ग्लोबल टाईम्स में कह दिया है कि भारत में हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा के फैलने के कारण चीन और पाकिस्तान के साथ उसके सम्बन्ध तनावपूर्ण हो गये हैं और भारत को इस ‘हिंदू राष्ट्रवादी’ विचारधारा पर रोक लगाना चाहिये, नहीं तो भारत और चीन युद्ध की स्थिति तक भी पहुंच सकते हैं.

अब तक भारत में छद्म सेकुलर लिबरल सरकारें रहीं हैं जिन्होंने राष्ट्रहित की बजाय ‘काल्पनिक आदर्शवाद’ और ‘तुष्टिकरण’ के आधार पर ‘राष्ट्र नीति’ और ‘विदेश नीति’ बनाई… जिसमें हर बार भारत ने अपने हितों का बलिदान दिया.

तिब्बत, अक्साई चिन, पीओके… हमने युद्ध में या समझौते की टेबल पर गवां दिये… किंतु पिछले तीन सालों से जिस तरह कश्मीर में आतंकियों का सफाया किया जा रहा है… पीओके में सर्जिकल स्ट्राईक की गयी… डोकलाम में भारत की सेना डटी है… इस तरह की कार्यवाई और साहस अब तक केवल अमेरिका और इज़रायल का नेतृत्व ही दिखा सका है.

अब इसी राह पर अब भारत बढ़ चला है तो देश के साथ विदेशी शत्रु भी बैचेन हो उठे है… क्योंकि ‘भारत’ और ‘हिन्दुओं’ को अब तक एक सॉफ्ट टारगेट माना जाता था और जिन्ना की विचारधारा वाले, ‘हंस के लिया है पाकिस्तान… लड़ के लेगें हिंदुस्तान’ का जाप करने वाले जो भारत को सीरिया और हिंदुओं को यजीदी बना कर गज़वा-ए-हिंद के सपने रात-दिन देखते रहते थे… उनकी आशाओं पर तुषारापात हो गया.

2014 के लोकसभा चुनाव में रास्ता एकदम साफ था… देश के सामने दो राहें थी… या तो यहूदी और इज़रायल बन कर दुश्मन का मुकाबला करें… नहीं तो भारत के केरल, कश्मीर, बंगाल, असम और अनेक क्षेत्रों, जिलों, शहरों, गांवों का सीरियाकरण हो चुका था और ये प्रक्रिया अभी भी जारी है.

यदि छद्म सेकुलर लिबरल सरकार कुछ साल और बनी रहती तो पूरे भारत के सीरिया और हिंदूओं के यजीदी बनने की नियति साफ नजर आ रही थी क्योंकि पिछली सरकार ने ‘लक्षित साम्प्रदायिक हिंसा अधिनियम’ द्वारा इसकी पूरी तैयारी कर ली थी… पर 2014 में बाजी पलटने से यह प्रक्रिया रुक गयी… और भारत इज़रायलीकरण की ओर बढ़ गया, जो आंतरिक और बाहरी दोनों मोर्चे पर शत्रुओं को मुंहतोड़ जवाब दे रहा है.

यहीं कारण है कि बॉर्डर पर बढ़ता तनाव और चीन द्वारा रोज़ युद्ध की धमकी चीन और पाकिस्तान की बढ़ती बौखलाहट को दर्शा रहे है… दूसरी ओर आंतरिक दुश्मन और ‘जयचंद’ भी लहुलुहान हुए जा रहे हैं या बुरहान की तरह सैनिकों की गोली का शिकार होकर जहन्नुम का टिकट कटा रहे हैं.

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