पटेल की मुश्किल बढ़ी, चार और कांग्रेस विधायकों का इस्तीफा, और इस्तीफों की संभावना

अहमदाबाद. शंकरसिंह वाघेला के कांग्रेस छोडने के बाद गुजरात में कांग्रेस का कुनबा बिखर रहा है. 10 दिन में राज्यसभा चुनाव होने हैं और इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. इन सबसे पहले कांग्रेस में विधायकों के इस्तीफे की झडी लगी हुई है. महज़ दो दिनों में 7 विधायकों का इस्तीफा हो चुका है और इस सिलसिले के आगे जारी रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है.

इस हालत में सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल का राज्यसभा पहुंचना मुश्किल हो गया है. अब तक कुल सात कांग्रेस विधायक इस्तीफा दे चुके हैं. माना जा रहा है कि यह आंकड़ा और बढ़ेगा क्योंकि चार और विधायकों के इस्तीफा देने का संदेह है. गुरुवार को तीन विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था उसके बाद शुक्रवार (28 जुलाई) को भी चार और विधायकों ने इस्तीफा दे दिया.

ये सभी विधायक शंकरसिंह वाघेला के करीबी बताए जा रहे हैं. इनमें बलवंतसिंह छत्रसिंह राजपूत, पीआई पटेल, तेजस्वीबेन पटेल, तेजश्री पटेल, रामसिंह परमार, मान सिंह चौहान और छानाभाई चौधरी का नाम शामिल है.

कांग्रेस विधायक मान सिंह चौहान और छानाभाई चौधरी ने शुक्रवार (28 जुलाई) को विधान सभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया. साल 1990 से 1995 के बीच कांग्रेस की सरकार में चौहान परिवहन मंत्री थे. दोपहर होते-होते गोधरा के विधायक सी के रौली और थासरा के विधायक राम सिंह परमार ने भी अपना इस्तीफा विधान सभा स्पीकर को सौंप दिया.

गुजरात में कांग्रेस के कुल 57 विधायक थे, लेकिन अब छह विधायकों के पाले बदलने की वजह से संख्या घटकर 50 रह गई है. दूसरी तरफ अहमद पटेल को जीत के लिए 47 विधायकों का वोट चाहिए.

इस आंकड़े के हिसाब से अभी अहमद पटेल की जीत में दिक्कत नहीं दिख रही है लेकिन उन्हें असली समस्या भाजपा नेतृत्व की अगली चाल से है. माना जा रहा है कि किआन्ग्रेस से इस्तीफा देने वाले विधायकों का आंकड़ा और बढ़ेगा क्योंकि चार और विधायकों के इस्तीफा देने का संदेह है.

राज्य में आठ अगस्त को संसद के ऊपरी सदन के लिए चुनाव होना है. 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या अब 50 रह गई है. राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 47 विधायकों के वोट की जरूरत होगी. अगर चार और विधायकों ने पार्टी छोड़ी तो अहमद पटेल का संसद पहुंचना मुश्किल होगा.

हालांकि, कांग्रेस को एनसीपी के दो और जदयू के एक विधायक का समर्थन हासिल है. बावजूद इसके क्रॉस वोटिंग का भी खतरा है. हाल ही में राष्ट्रपति चुनाव में ऐसा हो चुका है. कांग्रेस के 57 विधायक होने के बावजूद मीरा कुमार के समर्थन में सिर्फ 49 वोट पड़े थे.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भाजपा इस कोशिश में जुटी है कि गुजरात कांग्रेस के कम से कम 22 विधायक उसका साथ छोड़ दें. ऐसा करने से गुजरात विधानसभा में कांग्रेस की सदस्य संख्या 57 से घटकर 35 हो जाएगी. दूसरी तरफ कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफे से विधानसभा की सदस्य संख्या 182 से घटकर 160 हो जाएगी.

भाजपा को इसका फायदा ये होगा सदन की सदस्य संख्या घटने से राज्यसभा में एक सीट की जीत के लिए 40 विधायकों के वोट की जरूरत पड़ेगी. इस बीच कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि 10 करोड़ रुपये कांग्रेस के विधायकों को ऑफर किए जा रहे हैं.

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