आपका ‘दिया’ हर कपड़ा इन ‘दियों’ को भारी तूफ़ान, वर्षा और ठण्ड के दौरान भी प्रज्ज्वलित रखेगा

“दिया” एक ऐसा शब्द है जिसके उच्चारण मात्र से एक प्रकाश पुंज की कल्पना साकार होती सी दिखाई देती है. एक छोटा सा दिया जिसे चाहे किसी ने भी जलाया हो उसका प्रकाश और ऊष्मा सबको मिलती है. वो प्रकाश देने में कोई भेदभाव नहीं करता कि जिसने दिया जलाया प्रकाश उसी को मिले.

दिया का एक अर्थ होता है देना. जब आप पूरी विनम्रता से किसी को कुछ देते हैं तो विश्वास कीजिये उसका प्रकाश केवल देने वाले तक नहीं सभी तक पहुँचता है. और यदि वो देना समाज के उत्थान के लिए है, तो आपके व्यक्तित्व और समाज के साथ साथ देश भी समृद्ध होता है. और हम भी इस देश का हिस्सा हैं तो अप्रत्यक्ष रूप से हम स्वयं को ही कुछ दे रहे हैं.

ऐसा ही एक नि:स्वार्थ दिया अजित सिंह ने प्रज्ज्वलित किया था उदयन के नाम से. उदयन का अर्थ ही होता है उदित होना. यहाँ इस उदयन का अर्थ मात्र नभ में सूर्य के उदित होने से नहीं, यहाँ पर उदित हुए मुसहर बस्ती के छोटे छोटे दिये. लेकिन उन्हें उदयमान बनाए रखने के लिए अजित सिंह के प्रेम, हौसले और समय के साथ आवश्यक है उन छोटे छोटे दियों में निरंतर नेह डलते रहना.

ये नेह आपके स्नेह के साथ साथ आपके सामर्थ्य अनुसार एक छोटी सी रकम भी हो सकती है जिसे हम सप्ताह के अंत में कभी मल्टीप्लेक्स में कोई फिल्म देखने में खर्च कर देते हैं या फिर परिवार के साथ किसी पिज़्ज़ा हट या मैक्डोनल्ड में जंक फ़ूड खाकर खर्च कर देते हैं.

मैं ये नहीं कहती कि आप जंक फ़ूड खाना छोड़ दीजिये और उदयन के बच्चों को दान में दे दीजिये. बस इतना सा आग्रह है कि महीने के चार या पांच सप्ताह में खर्च किये जाने वाली रकम का एक छोटा सा हिस्सा निकालकर अलग रख दीजिये. जैसे हम घर में रोटी बनाते समय एक रोटी गाय के लिए निकाल कर रख देते हैं ठीक वैसे ही. यकीन मानिये उसके लिए भी आपको उतना ही पुण्य मिलेगा जितना गाय को रोटी खिलाने में मिलनेवाला है. क्योंकि ऐसा करने में हम उन बच्चों को फिर से चूहे खाकर पेट भरने के दयनीय कर्म से मुक्त कर रहे हैं.

इस बार बस एक निवेदन और है ठण्ड करीब आ रही है, बल्कि भारी वर्षा के कारण मुसहर बस्ती में पानी भर जाने से वहां के बच्चे यूं भी ठण्ड से ठिठुर रहे हैं, तो आपके पास यदि बच्चों के पहनने लायक पुराने कपड़े हैं तो उसे उदयन के बच्चों को दे दीजिये. आपके पास भेजने लायक पर्याप्त कपड़े नहीं है तो अपने आसपास वालों से कहिये.

उदयन बहुत छोटे स्तर पर किया गया अभियान था, और आप लोगों की शुरुआती मदद के फलस्वरूप वहां बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती गयी. परन्तु दुर्भाग्य से शुरुआती हौसले के बाद बच्चों की संख्या के साथ आप लोगों की मदद मिलना बंद हो गयी.

दो साल पहले जब उदयन शुरू हुआ था तो मैं खुद कपड़ों का बड़ा सा पुलिंदा लेकर माहपुर गयी थी. लेकिन इतनी दूर बार बार सफ़र करना मेरे लिए भी मुमकिन नहीं. बच्चों के कपड़े अवश्य हैं मेरे पास जिनको भेजने की व्यवस्था में लगी हुई हूँ. आप भी लग जाइए इस देने की तैयारी में क्योंकि आपका “दिया” हर कपड़ा उन छोटे छोटे दियों को भारी तूफ़ान वर्षा और ठण्ड के दौरान भी प्रज्ज्वलित रखेगा. आपका एक “दिया” उन्हें जीवन की गर्माहट देगा.

एक अनुरोध और है कपड़ों का पार्सल कृपया कुरियर से ना भेजें क्योंकि माहपुर की वो मुसहर बस्ती जिसे अजित सिंह ने शिवपुरी नाम दिया है, वहां तक कुरियर वाले भी जाने में असमर्थ हैं. इसलिए कृपया उसे पोस्ट से ही भेजें.

पता नोट कर लीजिये-
अजित सिंह
ग्राम पोस्ट -माहपुर, तहसील सैदपुर,
जिला- गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश
पिन- 233304
मोबाइल – +91 78892 58317

Shri Ram govind singh udayan foundation
Ac no 707001010050000
Union bank of india
Malikpur branch
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