महिलाओं में सुन्दरता का पैमाना

ma jivan shaifaly no make up look

लगभग हर समाज में स्त्रियों पर सुंदर दिखने का दबाव पुरुषों के मुकाबले कई गुणा ज्यादा रहा है. जाहिर है जब इस so-called beauty standards से औरतें cope-up नहीं कर पाती हैं तो “अंगूर खट्टे हैं” ट्रेंड के अंतर्गत मन की सुंदरता को बढ़ावा देने के लिये तन की सुंदरता को गड़ियाना शुरू करती है.

और समस्या इसी सोच से शुरू होती है. अगर आपको बाजारवाद से लड़ना है तो ये मत बोलिये कि सुंदर दिखने की जरूरत औरतों को है ही नहीं. यह एक प्राकृतिक इच्छा है जो प्रत्येक स्त्री-पुरुष के दिमाग में महत्व रखता है.

मनुष्य छोड़िये तमाम जानवर है जिनके दिमाग में सुंदरता का कुछ पैमाना फिट है. कई प्रजातियों की मादा चिड़िया ज्यादा चटख नर ही पसन्द करती है. कोई मोर अगर कटे-फ़टे पंख के साथ सुंदरता के उस पैमाने पर खड़ा नहीं उतरेगा तो मोरनी उसे भाव नहीं देगी, जबकि मोरनी ना तो समाजिक कंडीशनिंग की मारी है ना ही बाजारवाद के कब्जे में.

पर मनुष्यों में सुंदरता का पैमाना क्या है?

# पुराने चीन में औरतें टार्चर की हद तक अपने पैर बांध कर उन्हें मुड़े हुए और छोटे रखना पसंद करती थी.

# इथोपिया की कारो आदिवासी महिलाएं पीठ पर जला कर दाग बनाने को सुंदर मानती हैं.

# थाईलैंड की कायान औरतें पूरी जिंदगी गर्दन को लोहे के छल्लो में बांध कर रखती है क्योंकि अप्राकृतिक रूप से लम्बी गर्दन ही उनके लिए सुंदर है.

# न्यूजीलैंड की माओरी औरतें नीले होंठ और chin पर भयानक (मेरे हिसाब से) काले टैटू रख कर अपनेआप को सुंदर पाती है.

# हजारों ईरानी औरतें हर साल नाक की सर्जरी करवा रही हैं क्योंकि उनके लिये सुंदरता is all about नाक.

# साउथ कोरिया में हर दस में से एक औरत पलकों की प्लास्टिक सर्जरी करवा रही हैं क्योंकि आज कोरिया सुंदरता के पश्चिमी पैमाने के पीछे भाग रहा है.

# ज़ीरो फिगर का अंधा ट्रेंड लड़कियों में है, बिना इस बात को समझे कि इसे लाने के पीछे पश्चिम के वे फैशन डिज़ाइनर्स है जो नहीं चाहते कि उनके कपड़ों के बजाय curvy model पर दर्शकों का ध्यान ज्यादा जाये, यानि इसके पीछे लड़की को कम आकर्षक दिखाने की मंशा थी जिसको पूरी दुनिया ने सुंदरता का एक पैमाना मान लिया.

कुल मिला कर दुनियाभर में सुंदरता का पैमाना अलग है, पर गौर करने वाली बात यह है कि “है जरूर”. यह इंसानी मनोविज्ञान का हिस्सा है इसलिये आप सुंदर दिखने और सुंदर जीवनसाथी की तलाश की इस जरूरत को नकार नहीं सकते.

आप कह सकते हैं कि मुझे तो स्वभाव से मतलब है. सच है, पर आपको अपने मनपसंद स्वभाव के साथ शारीरिक रूप से ज्यादा खूबसूरत ऑप्शन मिल रहा/रही है तो क्या आप किसी ऐसे को चुनेंगे जिसके पास सिर्फ स्वभाव हो?

शारीरिक सुंदरता से पूरी तरह ऊपर उठना कम से कम जवानी के दिनों में (when u r fit for mating) लगभग असंभव है, क्योंकि यह प्राकृतिक है.

लेकिन भयानक समस्या यह है कि भारत जैसे गरीब देश में कास्मेटिक इंडस्ट्री करीब 80 हजार करोड़ का है. हम हर साल खुद को गोरा बनाने के लिए करीब 50 करोड़ डॉलर खर्च कर रहे हैं. मतलब साफ है कि शारीरिक सुंदरता का हमारा पैमाना आज बुरी तरह चरमराया हुआ है. हमारी मानसिकता पर बाजारवाद और सुंदरता का पश्चिमीकरण हावी है.

इससे बचने का बस एक ही उपाय है कि फ्रांस के लोगों की तरह ही हम अपना beauty perception बदलें (क्योंकि खत्म करना सम्भव नहीं है.)
पेरिस भले ही फैशन कैपिटल हो लेकिन फ्रांस आज भी औरतों को बिना मेकअप प्राकृतिक रूप में ही पसन्द करता है. अगर स्त्रियों को बाजारवाद के वस्तुकरण की टेंडेंसी से बचना है तो प्राकृतिक सुंदरता को महत्व देना ही होगा.

You can’t stop being beautiful, you can just perceive yourself to be beautiful when you are natural..

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