हामिद का चिमटा : भारत और चीन की व्यापार नीति

चिमटे का सबसे बढ़िया प्रयोग प्रेमचंद ने ईदगाह नामक कहानी में किया था जिसका नायक हामिद नामक बालक है.

इस कहानी में हामिद को एक निर्धन बालक के रूप में दर्शाया गया है जिसे उसकी दादी मां बड़े अभावों के बावजूद पाल-पोस रही है. हामिद मेले में जाकर एक चिमटा खरीदता है.. जबकि उसके दोस्त भिश्ती, गुल्लक, खँजरी, वकील न जाने क्या क्या मिट्टी के खिलौने खरीदते हैं.

मेले से वापस लौटते समय सभी दोस्त अपने द्वारा खरीदे गये खिलौनों की आपस में तुलना करते हैं. अंत में हामिद महमूद से कहता है – “मेरा चिमटा वकील साहब को कुर्सी से पटककर जमीन पर गिरा देगा और सारा कानून वकील साहब के पेट में डाल देगा.”

इस तर्क से सभी बच्चे परास्त हो जाते हैं और हामिद के चिमटे को सभी खिलौनों के ऊपर विजयश्री मिल जाती है.

चीन वैश्विक अर्थव्यवस्था के संदर्भ में 70 के दशक का हामिद है जिसने आयात के रूप में कच्चे माल की खरीद प्रक्रिया आरम्भ की जिससे कि उस कच्चे माल से उत्पादक वस्तुएं बनाकर विश्व को निर्यात कर सके. यह उसकी प्रमुख रणनीति रही है.

आईये जरा कुछ मूलभूत आंकड़ों पर दृष्टिपात किया जाए –
सितम्बर 1989 में भारत और चीन के बीच व्यापार बैठक होती है जिसमें कि दोनों पक्ष आपस में व्यापार बढ़ाने पर सहमत हुए.

चीन ने क्या आयात किया ?

1.. 1 मिलियन टन लौह अयस्क

2.. 100 मिलियन टन क्रोमाइट अयस्क

3.. 2 लाख टन से 3 लाख टन यूरिया

भारत ने क्या आयात किया ?

1.. 50 मिलियन डॉलर मूल्य के सिल्क और सिल्क के धागे

2.. 10 से 12 मिलियन डॉलर मूल्य का दलहन

3.. 6 मिलियन डॉलर मूल्य का मुन्नका

4.. 5 मिलियन डॉलर मूल्य के पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पाद

वो chinise बनाने में रहे और हम indians खपाने में रहे !

हमारी प्राथमिकताएं बहुत खोखली थी. जो सामान हम आयात कर रहे थे उनमें सभी वस्तुएं गैर-उत्पादक थी. हम भारतीय केवल मुन्नका और खजूर चाँप रहे थे जबकि चीनी लोग लौह अयस्क और क्रोमाइट को साफ करके उनसे दूसरे देशों को निर्यात के लायक वस्तुएं बना रहे थे.

दुर्भाग्य था देश का !

हमारा देश महमूद की तरह गैर-उत्पादक था जो मेले में वकील का खिलौना खरीद कर, जलेबी खरीद कर खुद को मानसिक रुप से और चटोरी जीभ की स्वादग्रंथियों को तुष्ट कर रहा था.

जबकि चीन ने हामिद की तरह चिमटा खरीदा जिससे वह कंधे पर रखकर दूसरों को धमका भी सकता था और अपनी दादी अम्मा को रोटी सेंकने वक्त काम भी लेता था.

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