क्या अब हमें मालवा निमाड़ में बड़े भूकम्प का इंतज़ार है?

गुजरात में अन्तिम छोर तक नर्मदा का पानी पहुंचाने और ज्यादा बिजली पैदा करने के लिए सरदार सरोवर बाँध को उसकी अधिकतम ऊंचाई तक अब भरा जाने का काम शुरू हो गया है. गुजरात के विकास के लिये यह जरूरी था. इस दृष्टि से गुजरातवासियों के लिए बधाई.

मध्यप्रदेश के मालवा निमाड़ क्षेत्र के लोगों को पर अब सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि….

1) अम्बा डोंगर और निसरपुर क्षेत्र में जमीन के नीचे की कच्ची चट्टानों में केलसाईट के साथ “फ्लोराईड” के डिपोजिटस् हैं. सरदार सरोवर बांध को ज्यादा भरने के कारण निसरपुर तो पानी में डूबने जा रहा है. इस पूरे क्षेत्र का भूमिगत जल स्तर अब ऊपर उठ जाएगा. इस कारण इधर के पूरे इलाके के हैण्ड पम्पों और कुओं के पानी में फ्लोराईड की मात्रा में इजाफा होगा. फ्लोराईड एक ऐसा पदार्थ है जो पानी में घुलकर जब शरीर में जाता है तो पहले तो दांतों को सड़ा देता है और फिर धीरे धीरे हड्डियों को गलाकर “लुंज पुंज” कर देता है.

अब सरकार को चाहिये कि इस पूरे इलाके के पेयजल स्त्रोतों पर तीखी नजर रखे और पेय जल में “फ्लोराईड” की मात्रा का नियमित आकलन करे. घातक सीमा से अधिक फ्लोराईड मिलने पर इन ग्रामों में पेय जल की वैकल्पिक व्यवस्था करे.

२) सरदार सरोवर बाँध से 12 और 17 किलोमीटर की गहरी दूरी पर पिपलोद और तिलकवाडा बडोदी की भूमिगत विकृतियां मौजूद हैं. यहाँ पर जमीन के नीचे बहुत गहराई तक चट्टानों के बीच खड़ी दरारें (vertical faults) मौजूद हैं. यह पानी को सीधे धरती के गर्म लावा वाले मोहो क्षेत्र तक पहुंचा सकती हैं. इस क्षेत्र में पानी के अधिक भराव के कारण जमीन के भीतर जब पानी घुसेगा तो मोहो तक जाकर पानी की भाप बनकर खन्दकों में भर जाएगा तथा भाप का दबाव धीरे धीरे बढ़कर चाय की केटली के ढक्कन की तरह धरती को हिलायेगा. सरदार सरोबर बाँध के निर्माताओं ने स्वंय माना है कि इस कारण 6.5 रेक्टर शक्ति का भूकम्प आ सकता है.

३) अब अगर बाँध को पूरा भरने से 6.5 शक्ति का भूकम्प सरदार सरोवर क्षेत्र में आता है तो मालवा निमाड़ में इसका कितना असर होगा इसका आकलन तत्काल करना चाहिये.

४) अब प्रश्न यह उठता है कि क्या हम निमाड़ क्षेत्र और मालवा के निवासी इस भूकम्प से निपटने को तैयार हैं? अभी तक तो हमें इसका कोई अनुभव नहीं है कि भूकम्प जब आता है तो क्या होता है, भूकम्प आने पर हमें क्या करना चाहिये?

५) पूरा बाँध ऊपर तक पानी से भरने के बाद अगर 6.5 रेक्टर का भूकम्प सरदार सरोवर पर आएगा तो इन्दौर में उसके झटके कितनी शक्ति के हो सकते हैं? उनसे हम कितने सुरक्षित हैं? हमारी बहुमंजिली इमारतें उन झटकों को सहन कितना कर सकती हैं?

मेरा अपना विचार है कि इन मुद्दों पर हमें गंभीरता से विचार करना ही होगा. मेरी चिन्ता का सबसे बड़ा कारण यह है कि आज से ठीक एक साल पहले 17 जुलाई 2016 की रात को गुजरात के भावनगर और सूरत में 4.7 रेक्टर शक्ति का भूकम्प आया था. इस भूकम्प का केन्द्र सरदार सरोवर बाँध ही बताया गया था. गुजरात सरकार ने इस भूकम्प के झटकों की जानकारी अज्ञात कारणों से गुप्त रखी.

यद्यपि गुजरात में 5, मध्यप्रदेश में तीन और महाराष्ट्र में एक सिस्मिक स्टेशन सरदार सरोबर बाँध के आसपास बनाकर उन्हें चौबीसों घंटे काम करना चाहिये. पर आश्चर्य है इनमें से कौन सा काम कर रहा है कौन सा नहीं कोई नहीं जानता. मध्य प्रदेश का तो आलम यह है कि लीडस् वि० वि० इग्लैण्ड का एक प्रोजेक्ट मैं स्वंय लेकर आया था उसे शासन को प्रस्तुत आफीशियली किया गया था. पर वह प्रोजेक्ट सरकारी मशीनरी में गुम हो गया.

सबसे अचम्भे की बात तो यह है कि मध्य प्रदेश सरकार ने नर्मदा घाटी में सिस्मोग्राफ लगाने के कार्य में मुझे सलाहकार बनाया था. बाकायदा सरकारी आदेश पारित करके आदेश प्रसारित हुआ था कि नर्मदा घाटी में जो भूकम्प मापी यंत्र लगे इस प्रकरण में “उपकरण लगने के पहले और लगाते समय मुझसे सम्पर्क किया जाए.” पर यह हमारे देश में ब्यूरोक्रेसी की महिमा है कि एक अधिकृत सलाहकार होने के बाद भी मुझ से यह कभी नहीं पूछा गया कि कहाँ कैसे किस जगह कौन से भूकम्पमापी यंत्र लगाने हैं. सरकारी सलाहकार होने के बाद भी मुझे आज तक यह मालूम नहीं है कि नर्मदा घाटी में कहीं पर सिस्मेग्राफ लगे हैं या नहीं? अगर लगे भी हैं तो वह क्या सचमुच काम कर रहे हैं या अटाले में पड़े धूल खा रहे हैं. (आपके सन्दर्भ के लिये आदेश की प्रति, और लीडस विवि के प्रोजेक्ट की कॉपी संलग्न कर रहा हूं.)

17 जुलाई 2016 के सरदार सरोबर बाँध के भूकम्प के झटकों को देखते हुए अच्छा तो यही होता कि सरदार सरोवर बाँध को एक दम 453 फुट तक नहीं भरते. सभी 30 गेट को एक दम नहीं बन्द करना चाहिये था. कोयना और बर्गी बाँध के भूकम्पों को ध्यान में रखते हुए अच्छा होता कि बाँध को धीरे धीरे कम कम भरकर तीन चार साल में पूरी ऊंचाई तक भरना चाहिये था. इससे सीपेज धीरे धीरे होता तथा 450 फुट गहरे पानी के भारी दबाव को बाँध की जलमग्न भूमि को “री सेटेलमेन्ट” होने का पर्याप्त समय मिल जाता. जल्दबाजी में पूरा बाँध भरने के लालच में कहीं ऐसा न हो कि हम किसी त्रासदी को जल्दी आने का न्यौता तो नहीं दे रहे हैं?

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