ज़्यादातर वामपंथी मार्क्स की दाढ़ी की जूएँ, असली दैत्यों का तो नाम ही नहीं लेते

from L to R : LeonTrotsky, Antonio Gramsci, Hannah Arendt

वामपंथ को समझने की कोशिश मत कीजिये, खुद वामी भी उसे कम समझते हैं. ज़्यादातर मार्क्स की दाढ़ी की ही जूएँ हैं. बाकी एंगेल्स, लेनिन, स्टेलिन, माओ से बाहर नहीं आते. कभी-कभी रोजा लकजेमबर्ग भी ‘कोट’ कर देंगे. ट्रोत्स्की का नाम मत लीजिये वो सुन्नी सलाफ़ी के सामने किताब उल काफी का हवाला देने जैसी बात हो जाएगी.

बाकी इनसे भी असली वाले कमीने जैसे ग्रामसी जैसा महाबदमाश इटालियन हो या फ्रेङ्क्फ़ुर्ट स्कूल के दैत्य हैं जैसे अडोर्नो, लुकास, होर्कहेमर हों, या फिर हन्ना अरेण्ड्ट जैसी डायन हो, इनके काम का तो यहाँ के वामी नाम भी नहीं लेते.

आजकल का इटालियन नेगरी भी कम खतरनाक नहीं है. इनकी सीख बहुत कम वामी जानते हैं लेकिन इन हरामियों के काम का कभी अनुवाद नहीं करेंगे. संस्कृति बिगाड़ने के लिए इन्होंने किस कदर घनघोर काम किया है ये हिन्दी में आए तो इनकी कब्र खुद जाएगी.

ये इनके ही सूत्रों पर काम करते हैं यह तो इनका काम देखने पर पता चलता ही है. अरे, समीक्षा कैसी की जाये, इस पर भी ये किताबें लिखते हैं, इगलटन सब से प्रसिद्ध है.

चलिये, इन सब को पढ़ने की ज़रूरत नहीं, यह तो बस बता रहा था कि इनको ये हदीसों की तरह या फिर मौलानाओं की विद्वत्तापूर्ण टिप्पणियों की तरह उपयोग करते हैं, मार्क्स बाबा का ग्रंथ समझाने. और अंत में आप को पहले से कई ज्यादा कनफ्यूज़ करके छोड़ देते हैं, एक कुटिल मुस्कान के साथ.

छोड़िए इस सब को, आखिर विचारधारा की परीक्षा उसके अनुयायी से होती है. इस्लाम को हम 1400 साल के इतिहास से समझ रहे हैं, मुसलमान कुछ भी कहें. अगर वे खुद उस अच्छे किताबी इस्लाम को कभी अपना नहीं सके तो समझ में आता है कि किताबी अच्छाइयाँ केवल काफिरों को बरगालने के लिए हैं – ‘आप तो इस्लाम को समझे ही नहीं. देखो यहाँ क्या लिखा है.’

तो आप के 1400 साल के क़त्लोगारद का क्या हिसाब देंगे आप? और Naskh भी हम समझते हैं और M और Y आयतों का फेर भी. झूठ अब नहीं चलने वाला.

वैसे इसी तरह वामी को समझना है तो रामायण और महाभारत का सहारा लीजिये जहां वामपंथी के कुलदेवता मौजूद हैं. रामायण में मंथरा माई का अभ्यास कीजिये, महाभारत में शकुनि बाबा का.

गौर से पढ़िये, फिर आप किसी भी वामपंथी या वामियाइन को एक पोर्नो किताब की तरह पढ़ सकते हैं. हर वामीपुर में इनके नाम का डीह और चौरा होना चाहिए, जिस पर शराब के साथ chick, chicken और chakhna का भोग लगे और प्रसाद बंटे.

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