मुसलमान नहीं बने तो काट डालेंगे हाथ-पांव, प्रख्यात साहित्यकार को कट्टरपंथियों की धमकी

तिरुवनंतपुरम. अभिव्यक्ति की आज़ादी और देश में बढ़ती असहिष्णुता के नारेबाजों के मुंह पर तमाचा मारती एक घटना केरल के कोझिकोड में सामने आई है जिसके बाद से सेक्यूलर कहलाने के शौकीनों की ज़बान को लकवा सा मार गया है.

इस्लामिक कट्टरपंथियों ने एक लेखक को मुसलमान न बनने पर हाथ-पांव कट डालने की धमकी दी है. यह धमकी एक गुमनाम पत्र द्वारा दी गई है. पुलिस ने केस दर्ज करते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है

कोझिकोड में केपी रमनउन्‍नी नाम के एक लेखक को इस्लामिक कट्टरपंथियों की ओर से जान से मारने की धमकी मिली है इस संबंध में छह दिन पहले उन्हें एक धमकी भरा पत्र मिला, जिसकी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है

माना जा रहा है कि रमनउन्‍नी ने एक मलयालम अखबार में लेख लिखा था, जो इस्लामिक कट्टरपंथियों को पसंद नहीं आया अपने लेख में उन्होंने सांप्रदायिक सदभाव और भाईचारे बनाए रखने की बात कही थी इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरोप लगाया कि इस लेख का मकसद मुस्लिमों को गुमराह करना था

उल्लेखनीय है कि रमनउन्‍नी उपन्‍यास और लघु कहानियां लिखते हैं. वह केरल साहित्‍य अकादमी अवार्ड और वायलार अवॉर्ड से सम्‍मानित हैं. उनके पहले उपन्‍यास ‘सूफी परांजा कथा’ पर फिल्‍म भी बन चुकी है. इसका तानाबाना एक मुस्लिम व्‍यक्ति और हिंदू महिला की प्रेम कथा के इर्द-गिर्द बुना गया है.

रमनउन्‍नी को भेजे गए इस गुमनाम खत में आरोप लगाया गया है कि उनके हालिया लेखों की वजह से मुस्लिम युवक ‘भटक’ रहे हैं. उसमें चेतावनी देते हुए लिखा गया है कि वह अपनी हरकतों से बाज आएं और छह महीने के भीतर इस्‍लाम कबूल कर लें. यदि वह ऐसा नहीं करते तो उनके दाहिने हाथ और बाएं पैर को काट दिया जाएगा.

इस मामले में लेखक का कहना है कि इस बात का कोई संकेत खत से नहीं मिलता कि इसके पीछे कौन है लेकिन ऐसा समझा जा रहा है कि इसको मलप्‍पुरम जिले के मंजेरी से भेजा गया है. रमनउन्‍नी को छह दिन पहले कोझिकोड स्थित आवास पर मिले इस खत के बाद उन्‍होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.

रमनउन्‍नी का कहना है कि पहले तो उन्‍होंने इस खत को नजरअंदाज किया लेकिन वरिष्‍ठ लेखकों की सलाह के बाद उन्‍होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. उन्‍होंने कहा, ”मुझे इस खत के पीछे की मंशा के बारे में नहीं पता. मैंने कोझिकोड पुलिस कमिश्‍नर के पास शिकायत दर्ज कराई और मामले को देखने का आग्रह किया है.”

खत में यह भी लिखा गया है कि यदि वह नहीं माने तो उनकी भी हालत प्रोफेसर टीजे जोसेफ की तरह कर दी जाएगी. 2010 में प्रोफेसर जोसेफ का दायां हाथ एक कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन से जुड़े लोगों ने काट दिया था. इस संगठन का आरोप था कि एक प्रश्‍नपत्र सेट करने के दौरान प्रोफेसर जोसेफ ने उनकी धार्मिक भावनाओं को कथित तौर पर आहत किया था.

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