कोर्ट साब और परधान जी, खामख्वाह असल मुद्दे से भटक रहे हैं आप

नमस्कार माननीय न्यायालय जी और प्रधान सेवक जी. गौरक्षकों के मामले पर आप लोग बहुत सक्रिय हैं और उनकी गुंडागर्दी के खिलाफ आपकी चिंता सम्मानजनक है. मैं गावों, कस्बों, शहरों की पगडण्डियों और सड़कों पर टहलने वाला एक आम इंसान हूँ. आप लोगों के पास गौ वाला मामला सही तरीके से नहीं पहुंचा है, तो सोच रहा हूँ कि कुछ बातें बता दूँ.

मान लीजिये की मैं किसी गाँव में 3-5 बीघे जमीन वाला कास्तकार हूँ और मेरे पास एक जोड़ी गाय – भैंस है. ये हमें रोज 20 लीटर दूध देती हैं जिसमें से 3 लीटर मैं अपने बच्चों के लिए बचा के बाकी बेच देता हूँ. इससे मेरे परिवार की जरूरतें पूरी होती हैं और मैं ठीक-ठाक आम जीवन व्यतीत करता हूँ.

फिर अचानक एक दिन मेरी गाय और भैंस चोरी हो जाती है. मेरे बच्चों के मुंह से दूध और रोज का मेरी आमदनी का जरिया चला जाता है. एक झटके में मुझे एक लाख के पशुधन का नुक्सान भी हो जाता है. अब मेरे पास घुट-घुट के जीने के सिवाय या फिर आत्महत्या करके आपके माथे किसान आत्महत्या का एक टीका और चिपका देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता.

मेरा तो सब उजड़ गया लेकिन जिन्होंने मेरे पशु चोरी किये उन्होंने अपने लपलपाती जीभ की आग बुझा ली या फिर कुछ हज़ार के एवज में कसाईघर को बेच दिया, या फिर बिहार-बंगाल होते हुए बांग्ला देश में भेज दिया.

विश्वास कीजिये आदरणीय जन, मैं रोज-रोज अपने पशुधन चोरी हो जाने के डर में जीता हूँ. मेरे ही तरह कमोबेश गाँव के हर परिवार को इसी डर में जीना पड़ रहा है. इसलिए मैंने अपने एक बच्चे को गाँव के अन्य बच्चों के साथ रात में पहरेदारी पर लगा दिया है जिससे गाँव के लोगों के पशुधन की सुरक्षा हो सके. वो रात भर गाँव की सीमा पर घूम-घूम के लाठी और टॉर्च लेकर पहरेदारी करते हैं.

ऐसे में अगर कभी कोई पशु चोर दिख जाता है तो हम उसको पकड़ के थूर देते हैं और पुलिस के हवाले कर देते हैं. अभी तक कोई पशु चोर हमारे हाथों मारा नहीं गया है… बस पीटा गया है… आप सीतापुर, बाराबंकी, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर आदि से इन आकंड़ों को मंगवा लीजिये.

अब आते हैं और असलियत पर. जो पशु चोरी होते हैं वो सिर्फ हिन्दुओं के ही नहीं होते, भैंस तो आज़म खान की भी खोल ली गयी थीं लेकिन वो बड़े आदमी ठहरे, पुलिस उनकी भैंस 24 घंटे में बरामद करा लाई. हम जैसे क्या करें जिनका नाम भीखू, रामखेलावन, रहमत, जुम्मन, करतार और बसेसर है. हम लाठी लेकर पहरेदारी करते हैं.

हम जब कोई पशु चोर पकड़ते हैं तो उसका वीडियो नहीं बनाते, रात में कैसे वीडियो बनाएँ, ठीक से किसी को समझ ही नहीं आएगा. और दिन में जिनको पकड़ते हैं बस उतना उनको पीटते हैं जितने में कि वो मरे न और फिर उसके बाद सीधे पुलिस के हवाले कर देते हैं.

हम तब भी वीडियो नहीं बनाते… अगर हमारे मारने से चोर मर जाएंगे तो हम भी जेल जाएंगे, बच्चों और परिवार का क्या होगा इसलिए हमारे मारे आज तक कोई पशु चोर न मरा है. आप उन वीडियो बनाने वालों को पकड़ें, पता चल जाएगा कि माज़रा क्या है.

भारत की एक मूढ़ बिरादरी है जिसको मीडिया बोलते हैं. उनके चक्कर में न पड़िए, ये हमारी रोजी-रोटी और धन की चोरी को भी हिन्दू और मुसलमान बना के दिखाते हैं… ये फ़र्ज़ी के खबर के सौदागर हैं, एक दो लाश गिरने के बाद इनको मज़ा आता है…

इन चोरों और दलालों की रिपोर्टिंग पर अपना मत बिलकुल नहीं बनाइये… इनको तो आप किसी अभागे की तरह एक कोने पड़े रहने दीजिये… ये लाशखोर कुनबा है… अराजकता इनका टॉनिक है…

और अंत में एक बात और… आप बस इतना इंतज़ाम करवा दीजिये कि अवैध पशु कटाई बंद हो देश भर में. पशु पालन करने वाले के पशु चोरी न हों इसलिए पशु चोरों और तस्करों को पकड़ के अंदर करिये.

आप बंगाल का कैटल कॉरिडोर बंद करा दीजिये, जहाँ से ये तस्करी होती है… आप पशु तस्करों को पशु चुराने का अंजाम भुगतने का इंतज़ाम कराइये… आज तक एक भी पशु तस्कर पकड़ने की खबर नहीं आई है…

आप पशु तस्करी बंद कराने का इंतज़ाम कीजिये जो आपका असली काम है… खामख्वाह आप असल मुद्दे से भटक रहे हैं… जब पशु चोरी बंद होगी, हम भी चोरों को कूटना बंद कर देंगे और हमारे बच्चे रात को लाठी-टॉर्च लेकर सिवान-सिवान भटकने की जगह आराम से घर में सोयेंगे.

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