ये देश है वीर जवानों और साथ में हज़ारों गद्दारों का

कुछ ही हफ्ते पहले सऊदी और दस अन्य देशों ने क़तर पर इकोनॉमिक सैंक्शंस लगाए थे, ब्लॉकेड किया और क़तर से अपने तमाम राजनयिक रिश्ते खत्म किये.

इन देशो का क़तर पर आरोप था कि वो आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है. सैंक्शंस और ब्लॉकेड हटाने के लिए इन देशों ने क़तर के सामने 13 मांगे रखीं जिनमे से एक मांग क़तर के अल जजीरा न्यूज़ चैनल को बैन करने की थी.

अल ज़जीरा पर भी यही आरोप था कि वो दुनिया भर में कट्टरपन को बढ़ावा दे रहा है, प्रोपेगेंडा का फैला रहा है.

हमारे देश में लिबरल और सेक्युलर लोग रहते हैं जो मोदी सरकार और हिंदुत्व से बहुत त्रस्त हैं. इनमे बहुत से लोग JNU में पाए जाते हैं.

और इनमे से बहुत लोग अल जज़ीरा के लिए नियमित लिखते हैं. उसके प्रोग्राम में जाते हैं. इनमे से बहुत फेसबुक पर भी सक्रीय हैं और अपनी पोस्ट्स में अल जज़ीरा में लिखे लेखों का जिक्र करते हैं.

लिबरल और सेक्युलर बुद्धिजीवियों से तो उम्मीद नहीं लेकिन राष्ट्रवादी अब इस चैनल का प्रतिकार करें और सरकार को भी इसके प्रसार पर निगाह रखनी चाहिए. आतंकवाद को बढ़ावा देने की छूट हासिल नहीं होनी चाहिए.

हालाँकि करन थापर जो एक मशहूर पत्रकार हैं वो अल जज़ीरा को आतंकवाद या कट्टरवाद को प्रोत्साहित करने वाला चैंनल नहीं मानते. उन्होंने एक आर्टिकल लिखकर इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया और बैन हटाने की मांग की. साथ में अपने साथियो से इस बैन के खिलाफ खड़े होने की अपील की.

दो दिन पहले पाकिस्तान में एक न्यूज़ चली थी की चीन ने भारतीय सेना के 158 जवानो को मार दिया. खुद चीन ने इस न्यूज़ को गलत बताया. चीन ने इस तरह की न्यूज़ की ऑफिशियल निंदा भी की. लेकिन फेसबुक पर बहुत से प्रेरित भाई इस न्यूज़ को शेयर करते मिले. बहुत से शांतिपसंद भाई इस न्यूज़ पर भरोसा करते मिले. सेक्युलर लिबरल न्यूज़ को प्रसारित कर रहे थे मुस्लिम भाई भरोसा कर रहे थे.

पिछले साल चीन ने यूनाइटेड नेशंस में पाकिस्तान के आतंकवादी मसूद अजहर को UN द्वारा आतंवादी घोषित कर उसकी फंडिंग पर रोक लगाने के प्रस्ताव को वीटो कर दिया. 15 देशो में से एक वही देश था जिसने मसूद अजहर को आतंकवादी नहीं माना था. और जब पूछा गया कि क्यों समझता है, तो चीन ने उत्तर दिया खुद भारत में इस पर यूनिटी नहीं है कि मसूद अजहर आतंकवादी है. चीन तमाम उन आर्टिकल्स का उल्लेख कर रहा था जो भारत में लिबरल लोग लिखते हैं.

ऐसे में क्या आश्चर्य जब चीन कह रहा है कि उसके और हमारे बीच मतभेद की वजह उग्र हिंदुत्व है.

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