आतंकवादियों के प्रति वामपंथियों की हमदर्दी

कश्मीर में आतंकवादियों के प्रति वामपंथियों की हमदर्दी ने एक बार फिर वामपंथियों का असली चेहरा सामने लाया है. यह अत्यंत घृणास्पद है कि ये वामपंथी अब अमरनाथ-यात्रा हमले में लिप्त आतंकवादियों में “मानवता” दर्शाने का प्रयत्न करते हुए कई मिथ्याओं को ‘प्लांट’ कर रहे हैं, जैसे “आतंकियों के निशाने पर तो पुलिस थी और यात्री तो ‘क्रॉस-फायर’ में ‘गैर-इरादतन’ मारे गए “ आदि.

हार्वर्ड के विद्वान डॉ माजिद रफिजादेह इस्लामी आतंकियों के प्रति वामपंथियों की ऐसी ही विश्वव्यापी हमदर्दी के दसियों उदाहरण देते हुए लिखते हैं, “एक मुस्लिम होने के नाते मैं वामपंथियों की इन हरकतों से स्तंभित हूँ… इस्लामिक आतंकवाद के प्रति वामपंथियों की इसी हमदर्दी के कारण कई मुस्लिम चाहते हुए भी इस्लाम में शांतिपूर्ण सुधार नहीं कर पाए.”

उधर अरब में पले-बढे और अब कनाडा में बसे लेखक अली रिजवी कहते हैं कि वामपंथी बड़ी सहजता से ईसाइयत की आलोचना कर देते हैं लेकिन जब इस्लाम के कुछ विवादित पहलुओं की बात उठती है तो अपने हाथ खड़े कर देते हैं.

इस विषय के विख्यात विशेषज्ञ रोबर्ट स्पेंसर कहते हैं कि वामपंथी ऐसे इस्लामिक आतंकवाद को न सिर्फ ढंकते की कोशिश करते हैं बल्कि उसे सामान्य सी घटना बता देते हैं. कई अन्य लब्धप्रतिष्ठ विशेषज्ञों ने भी वामपंथियों की इन शोचनीय हरकतों पर खुल कर लिखा है.

भारत में, महज चार प्रतिशत मत पाए ये वामपंथी अब आतंकवाद के लिए ‘ऑक्सीजन’ इसलिए बन पाए हैं कि अपने छिछले ज्ञान के बावजूद इनका समूह दशकों की राजनैतिक कृपा से शैक्षणिक व इतिहास-शोध आदि प्रभावशाली केन्द्रों पर जगह पाता चला गया और फिर वहां केवल अपनी ही जमात की प्रविष्टि और पैठ भी निश्चित करता चला गया. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी इन वामपंथियों के छिछले ज्ञान पर टिप्पणी की थी. बौद्धिक, तार्किक, और ताथ्यिक क्षमता में बेहद कमज़ोर मगर मक्कारी में बेहद तेज़ इस वामपंथी समूह की सच्चाई लेकिन अब खुलती जा रही है. देर आयद दुरुस्त आयद!

(सन्दर्भ : (1) Dr Mazid’s article in New York based ‘Gatestone Institute’s magazine (2 Ali Rizvi’s interview in US journal Vox, (3) Robert Spencer in The Blaze )

 

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