जानिए इस करामाती तेल की करामात

Patanjali Mustard Oil

एक समय था जब उत्तर भारत में खाना पकाने के लिए सरसों का तेल काफी लोकप्रिय था. 20वीं सदी के मध्य के बाद से वनस्पति तेलों की बड़े पैमाने पर उपलब्धता के कारण सरसों के तेल की लोकप्रियता में थोड़ी गिरावट आई. यह अभी भी जटिल रूप से संस्कृति में समाहित है, इसका इस्तेमाल आज भी विशेष अवसरों पर किया जाता है.

जब पहली बार कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति घर में आता है तब प्रवेशद्वार के दोनों किनारों में इसका प्रयोग किया जाता है (उदाहरण के लिए, एक नव विवाहित जोड़े या बेटा या बेटी जब एक लंबी अनुपस्थिति के बाद घर आते हैं, या परीक्षा या किसी चुनाव में सफलता प्राप्त करने के बाद)
पंजाबी शादियों में पारम्परिक जग्गो बर्तन ईंधन में इस्तेमाल किया जाता है.
घर में बनाए जाने वाले सौंदर्य प्रसाधन के हिस्से के रूप में प्रयोग किया जाता है.
दीपावली जैसे उत्सवों पर मिट्टी के दीये जलाने के लिए ईंधन के रूप में प्रयुक्त किया जाता है.
बालों के लिए अत्यंत फायदेमंद माना जाता है.

अन्य लाभ

सरसों का तेल मालिश करने पर शरीर के रक्त संचार को बढ़ाता है. थकान दूर करता है. नवजात शिशु एवं प्रसूता की मालिश इसी तेल से करनी चाहिए. सर्दियों में इस तेल की मालिश लाभदायक है.

सरसों के तेल को पैर के तलुओं में सुखाने से थकान तुरंत मिटती है तथा नेत्रज्योति बढ़ती है.
दाद, खाज, खुजली जैसे चर्म रोग से निजात पायी जा सकती है. चर्म रोग पर सरसों का तेल, आक का तेल, हल्दी डाल कर गर्म करें. ठंडा हो जाने पर लगायें. सरसों का तेल गुनगुना कर पिंडलियों पर लगायें, दर्द ठीक हो जायेगा. गठिया पर सरसों के तेल से मालिश करने पर आराम मिलता है.

सरसों का तेल नियमित रूप से बालों पर लगाते रहने से बाल समय से पहले सफेद नहीं होते.
सरसों के तेल में सेंधा नमक डाल कर मसूड़ों की मालिश करें. पायरिया ठीक होगा. मसूड़ों से खून आना बंद होगा.

बच्चों या बड़ों को जुकाम हो जाये, तो तेल में लहसुन पका कर तेल वापस थोड़ा ठंडा होने पर सीने पर मालिश करें. सर्दी-जुकाम ठीक हो जाता है.

सरसों के तेल में 60% मोनोअनसेचुरेटेड फैटी एसिड होता है जिसमें 42% इरुसिक एसिड और 12% ओलेक एसिड होता है, इसमें 21% पोलीअनसेचुरेटेड होता है, जिसमें से 6% ओमेगा-3 अल्फा-लिनोलेनिक एसिड और 15% ओमेगा -6 लिनोलेनिक एसिड होता है और 12% संतृप्त वसा होता है.

भारत में, सरसों के तेल को खाना पकाने से पहले जलने तक गरम किया जाता है; ऐसा गंध को कम करने और स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जा सकता है. बहरहाल, अधिक देर तक गरम होने के परिणामस्वरूप तेल में ओमेगा-3 समाप्त हो जाता है और स्वास्थ्य में इसकी अद्वितीय भूमिका कम हो जाती है. पश्चिमी देशों में, अक्सर इसकी बिक्री भारतीय आप्रवासियों के निमित्त दुकानों में “केवल बाह्य इस्तेमाल के लिए” होती है, चूंकि उत्तर भारत में सरसों के तेल का प्रयोग रगड़ने और मालिश के लिए भी किया जाता है, ऐसा माना जाता है कि इससे रक्त परिसंचरण, मांसपेशी विकास और त्वचा की बनावट में सुधार होता है; यह तेल जीवाणुरोधी भी होता है. कभी-कभी लैंगिक संसर्ग से पहले भी पुरूष अपने यौन शक्ति को बनाए रखने या अपने पौरूष को बढ़ाने के लिए पुरूष गुप्तांगों में इस तेल का इस्तेमाल करते हैं.

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