अमेरिका ने माना, आतंकवाद का संरक्षक है पाकिस्तान

वाशिंगटन. अमेरिका ने आखिरकार पाकिस्तान को आतंकवाद का गढ़ घोषित कर दिया है. उसने पाकिस्तान का नाम आतंकवाद के पनाहगाह देशों की सूची में डाल दिया है. अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने अपनी सालाना रिपोर्ट में माना है कि वर्ष 2016 में पाकिस्तान से लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद जैसे खूंखार आतंकी संगठनों ने ना सिर्फ आतंक मचाया, बल्कि अपना संगठन खड़ा किया और उसके लिए धन जुटाया.

अमेरिका ने आतंकवाद के पनाहगाह देशों या स्थानों की सूची में पाकिस्तान के अलावा, अफगानिस्तान समेत 12 अन्य देशों या स्थानों को भी शामिल किया है. इसमें सोमालिया, ट्रांस सहारा क्षेत्र, सुलु/सुलावेसी सागर क्षेत्र, दक्षिणी फिलीपींस, मिस्र, इराक, लेबनान, लीबिया, यमन, कोलंबिया और वेनेजुला भी शामिल हैं.

आतंकवाद पर अमेरिकी कांग्रेस में पेश होने वाली वार्षिक रिपोर्ट का ब्योरा देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि पाकिस्तान को आतंकवाद के सुरक्षित पनाहगाह देशों और क्षेत्रों की सूची में शामिल कर लिया गया है. इसमें पाकिस्तान के अच्छे और बुरे आतंकवाद की असलियत की भी कलई खोल दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों ने केवल उन संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की जो उनके देश में हमले करते हैं, जैसे-तहरीक-ए-तालिबान-पाकिस्तान.

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगान तालिबान या हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, ताकि अफगानिस्तान में अमेरिकी हितों को खतरे में डालने की उनकी क्षमता बनी रहे. इतना ही नहीं, पाकिस्तान ने 2016 में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के जरिए दूसरे देश (भारत) पर हमले कराने में पूरा जोर लगा दिया.

पाकिस्तान की जमीन से हक्कानी नेटवर्क, लश्कर और जैश समेत अनगिनत आतंकी संगठनों ने कहर बरपाना जारी रखा. इस दौरान इन आतंकी संगठनों ने पाकिस्तान से ऑपरेट करना, आतंकियों का प्रशिक्षण, संगठन खड़ा करना और पाकिस्तान में ही इनके लिए धन जुटाना जारी रखा.

वैसे तो लश्कर पर पाकिस्तान में प्रतिबंध है लेकिन उसके धड़े जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन ने इस्लामाबाद समेत पूरे देश में आतंकवाद के लिए खुलेआम धन जुटाया. संयुक्त राष्ट्र से घोषित आतंकी लश्कर प्रमुख हाफिज सईद ने 2017 के फरवरी में भी बड़ी-बड़ी रैलियां कीं. पाकिस्तान सिर्फ दिखावे के लिए उसके आने-जाने पर पाबंदी लगा देता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत पर माओवादी उग्रवादियों और पाकिस्तान में बसे आतंकवादियों के हमले जारी रहे. भारतीय प्रशासन जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से होनेवाले हमलों के लिए पाकिस्तान को लगातार जिम्मेदार ठहराता रहा. जनवरी में भारत ने पंजाब के पठानकोट स्थित अपने सैन्य अड्डे पर भीषण आतंकी हमले का सामना किया.

भारतीय प्रशासन का आरोप था कि यह जैश ने कराया है. जैसे-जैसे वर्ष 2016 आगे बढ़ा, आतंकवाद के खिलाफ भारत सरकार और अमेरिका के बीच सहयोग और सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ गया.

रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार ने खूंखार विदेशी आतंकी संगठनों आइएस और अलकायदा के भारत में पैंठ बनाने की कोशिशों पर भी पैनी निगाह रखी. भारत में हमले का एलान कर चुके इन संगठनों की सेंध का पता तब चला जब मुंबई के कुछ लड़कों के आइएस में शामिल होने की खुफिया खबर मिली.

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